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विश्व संग्रहालय दिवस आज: इंदौर में इतिहास को सहेजने का जुनून, किसी ने सिक्के तो किसी ने संजोए 90 हजार गाने

सार

मध्य प्रदेश के इंदौर में इतिहास को सहेजने का जुनून है, आज विश्व संग्रहालय दिवस पर ऐसे लोगों को बारे में पढ़िए, जिन्होंने सदियों पुरानी चीजों को सहेज कर रखा है।
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World Museum Day today - फोटो : अमर उजाला
आज 18 मई को विश्व संग्रहालय दिवस है। 1983 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने संग्रहालय के प्रति जागरूकता और उनके महत्व को जानने, प्राचीन सामग्री को देख इतिहास को समझने के लिए इसे मनाए जाने का निर्णय लिया था। इतिहास की प्राचीन सामग्री को देख हमें उस काल की कार्यप्रणाली को समझने में सहूलियत मिलती है।
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World Museum Day today - फोटो : अमर उजाला
सौ वर्ष पहले से संग्रहालय कायम किया
होल्कर रियासत में 1923 में तुकोजीराव होल्कर तृतीय के कार्यकाल में नररत्न मंदिर नाम से एक संस्था स्थापित की गई थी। इसका उद्देश्य पुस्तकें, चित्र और ऐतिहासिक सामग्री को एकत्र करना था। अक्टूबर 1929 में यशवंत राव होल्कर द्वितीय ने नगर में केंद्रीय संग्रहालय की स्थापना की थी। 1931 में नररत्न मंदिर को केंद्रीय संग्रहालय में सम्मिलित कर दिया गया। केंद्रीय संग्रहालय एबी रोड पर 1966 से स्थित है, जहां होल्कर रियासत के अलावा अन्य सिक्के, शस्त्र, प्राचीन खुदाई में प्राप्त मूर्तियां, प्राचीन अभिलेख हैं, और एक पुस्तकालय भी है, जो शोध छात्रों के लिए काफी मददगार सिद्ध होता है।
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सुमन चौरसिया। - फोटो : अमर उजाला
चौरसिया के पास 90 हजार गीतों का संग्रह 
इंदौर में संग्रह का शौक कई लोगों को है, उनमें सबसे अधिक चर्चित सुमन चौरसिया हैं। वे ग्रामोफोन पर बजने वाले रिकॉर्ड के संग्रहकर्ता हैं। सुमन चौरसिया के संग्रह में 28 हजार रिकॉर्ड में 536 गायकों के करीब 90 हजार गीतों का संग्रह है। सुमन चौरसिया को रिकॉर्ड की जानकारी मिलती है, वे उसे प्राप्त करने चले जाते हैं। उन्होंने अपने संग्रहालय का नाम लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफोन संग्रहालय रखा है। दुर्लभ गीतों का सुमन चौरसिया ने संग्रह किया, जो उनका संगीत के प्रति जुनून दर्शाता है।

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इंदौर सिंगल स्क्रीन सिनेमा संग्रहालय विनोद जोशी - फोटो : अमर उजाला
जोशी को सिनेमा से जुड़ा शौक
ऐसे ही एक शख्स हैं विनोद जोशी, जो तीन दशक से भी अधिक समय से खजूरी बाजार में पुरानी सामग्री के साथ पुस्तकों को खरीदते थे। उन्हें सिनेमा का शौक था। उन्होंने नगर में सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से जुड़ी सामग्री एकत्र करना आरंभ किया। उनके संग्रह में नगर के सिनेमाघरों के फोटो, फिल्मों के पोस्टर, प्रोजेक्टर और उनसे जुडी हर सामग्री उपलब्ध है। हर्षवर्धन लाड जो पेशे से इंजीनियर हैं, उन्होंने पाकिस्तान और जिन्ना से जुड़ी सामग्री संग्रह कर रखी है। साथ ही उन्हें फिल्मों की जानकारी की बुकलेट का संग्रह कर रखा है।
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जफर के पास यह खजाना
इंदौर के जफर अंसारी ने होल्कर रियासत और अन्य रियासतों से जुडी महत्वपूर्ण सामग्री और पुस्तकों का संग्रह कर रखा है। प्रदेश में उनका निजी संग्रहालय सबसे समृद्ध सामग्री का खजाना है। जफर अंसारी भविष्य में इस सामग्री एक संग्रहालय बनाने की योजना रखते हैं। उमेश नीमा जो बैंक से सेवानिवृत हुए हैं, उनके संग्रह में सिक्के, पुस्तकें और डाक टिकट का अच्छा संग्रह है।
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गांधार जनपद का 2600 वर्ष पुराना छड़ी नुमा सिक्का। - फोटो : अमर उजाला
प्राचीन सिक्कों का संग्रह
खरगोन निवासी मिलिंद महाजन ज्वेलरी के व्यापार के साथ प्राचीन सिक्कों के संग्रह करने लगे हैं। उनकी रुचि सिक्कों में अधिक है। इनके संग्रह में काफी पुराने सिक्के हैं। बुरहानपुर निवासी डॉक्टर माने प्राचीन बर्तनों के संग्रह में रुचि रखते हैं। उनके पास प्राचीन घर में उपयोग के बर्तन और अन्य सामग्री का संग्रह है। अनिल भल्ला के पास देश विदेश की 650 से अधिक घड़ियां हैं। राजेश शर्मा के पास चार सौ से अधिक टाइप रायटर संग्रह में हैं। इसी तरह नगर में माचिस की डिब्बियां, गणेशजी के चित्र और अन्य सामग्री के संग्रह भी मिलते हैं। जाहिर है विरासत को सहेजना और उसे सुरक्षित रखना, सरकारी नहीं बल्कि मानवीय प्रबल इच्छा पर निर्भर करता है, जो लोग आज भी कर रहे हैं।
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