अपने परिवार के साथ ओज्सवी गुप्ता।
- फोटो : अमर उजाला
14 सितंबर को परिवार से हुई थी आखरी बात
ओजस्वी के पिता नरेश गुप्ता बेटी के लापता होने की खबर मिलने के बाद से त्रिची में हैं। वे बेटी पुलिस के साथ मिलकर बेटी को तलाशने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बेटी से रोजाना सुबह शाम बात होती थी। 14 सितंबर की रात आखिरी बार उससे बात हुई थी, लेकिन उसने कोई समस्या नहीं बताई थी। उसने कहा था कि वह अच्छी है, मुझे क्लास रिप्रेजेंटेटिव बना दिया है। इस कारण दिन में पढ़ाई नहीं तो पाती है, रात को मुझे पढ़ना है। 15 सितंबर को बेटी को कॉल किया तो उसने रिसीव नहीं किया, हमने सोचा क्लास चली गई होगी। लेकिन, रात को एनआईटी से कॉल आया कि आपकी बेटी लापता है। उसका कुछ पता नहीं चल रहा है, आपको इसके बारे में जानकारी है। तो पिता ने कहा कि मेरी उससे सुबह से बात नहीं हुई है। इसके बाद थाने में ओजस्वी के लापता होने का केस दर्ज कराया गया।
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आखिरी बार सीसीटीवी में हुई कैद।
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आखिरी रात क्या हुआ था?
ओजस्वी के साथ हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों का कहना है कि वह रात तीन बजे तक हमारे साथ पढ़ रही थी। इसके बाद सब सो गए, सुबह करीब सात बजे उठे तो वह कमरे में नहीं थी। हमने सोचा कहीं बाहर गई होगी, लेकिन सुबह आठ बजे तक वापस नहीं आई। काफी देर तक उसका इंतजार करते रहे, इस बीच उसके कमरे में रखा बैग चेक किया तो उसमें चार पेट का लेटर मिला है। इसमें उसने मानसिक तनाव में होने और सीआर (क्लास रिप्रेजेंटेटिव) बनने के बाद से टॉर्चर करने जैसी कई बातें लिखी हैं।
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अब पढ़िए ओजस्वी का नोट?