सीएम मोहन यादव रविवार को इंदौर में थे। सीएम बोले कि समाज का भोलापन, बांकपन विशेषता है और कमजोरी भी है। दुश्मन इस भोलेपन का फायदा उठाता है और लैंड जेहाद, धर्मांतरण को बढ़ावा देता है।
विज्ञापन
1 of 3
इंदौर में सीएम मोहन यादव ने भिलाला समाज को संबोधित किया
- फोटो : सोशल मीडिया
इंदौर में आयोजित भिलाला समाज के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि भिलाला समाज हर चुनौती का सामना करता है और आनंद और निर्भीकता के साथ रहता है। समाज की परिश्रमी संस्कृति मायने रखती है। कुरीतियों के खिलाफ समाज अभियान चला रहा है।समाज का भोलापन, बांकपन विशेषता है और कमजोरी भी है। दुश्मन इस भोलेपन का फायदा उठाता है और लैंड जेहाद, धर्मांतरण को बढ़ावा देता है। समाज इससे बचे। उन्होंने कहा कि समाज का समय बदल रहा है, लेकिन संस्कार भी कायम रहना चाहिए। आगे बढ़े लेकिन जड़ों से जुड़े रहे।
विज्ञापन
2 of 3
कार्यक्रम में सीएम को सुनने पहुंचे लोग
- फोटो : सोशल मीडिया
इंदौर मनमाड़ लाइन जिंदगी बदलने का गेटपास
मुख्यमंत्री ने कहा इंदौर- मनमाड़ लाइन जिंदगी को बदलने के गेट पास है। भविष्य में दिल्ली मुंबई के रास्ते बदल जाएंगे। नए ट्रेन रुट विकास के नए रास्ते खोल रहा है। इससे आदिवासी अंचल को फायदा होगा।
इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी समाज ने नृत्य पेश किया।
- फोटो : सोशल मीडिया
आदिवासी समाज की संस्कृति सहेज रही सरकार
भिलाला समाज के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा को सरकार भी सहेज रही है। हमारा समाज शस्त्र पूजन को महत्व देता है। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्री जनप्रतिनिधियों को शस्त्र पूजन करने को कहा। समाज के महापुरुषों को सरकार ने पहचान दी है। मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि समाज में कई कुरीतियां भी हैं। समाज में नशे का सेवन हो रहा है। हम समाज में नशा मुक्ति अभियान चलाएंगे, ताकि हमारा समाज समृद्ध बने। कार्यक्रम में सांसद अनिता चौहान, गजेंद्र पटेल, रंजना बघेल,विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला सहित अन्य नेता मौजूद थे। लोक गायक आनंदी लाल भावेल ने कई गीत भी सुनाए।
कांग्रेस समय के साथ चलना नहींं चाहती
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर यात्रा के दौरान पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन चलाना सीखे, समझे, नए खून को मौका दे। मैंने तो कार्यकारिणी देखी। सत्रह उपाध्यक्ष और पचास महासचिव बना दिए। ऐसा कभी नहीं होता। महासचिव कम होते हैं और उपाध्यक्ष ज्यादा। कांग्रेस समय के साथ चलना नहीं चाहती। कांग्रेस के काम करने का ढंग के कारण ही वह पतन की तरफ जा रही है। यह उनके संगठन की अंदरूनी राजनीति है, लेकिन राजनीति में समझदारी चाहिए, जो कांग्रेस में नजर नहीं आती। हम तो विपक्ष को भी दमदार देखना चाहते हैं। मैं तो चाहता हूं कि कांग्रेस अपनी इस कार्यकारिणी को भंग करे और अच्छे लोगों को मौका दे।