अभ्यास मंडल के 68वें स्थापना दिवस पर गूंजे विचार, 68 दीप प्रज्वलित कर मेधावी विद्यार्थियों को किया पुरस्कृत। वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने युवा, मीडिया और लोकतंत्र विषय पर विचार साझा किए।
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मेधावी छात्रों का सम्मान किया गया।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
शहर की प्रतिष्ठित वैचारिक संस्था अभ्यास मंडल का 68वां स्थापना दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। संस्था की 68 वर्षों की गौरवमयी यात्रा के प्रतीक स्वरूप 68 दीप प्रज्वलित किए गए। समारोह के मुख्य वक्ता देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी थे। उन्होंने "आज का युवा, मीडिया और लोकतंत्र" विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सजग युवा और निर्भीक मीडिया ही किसी भी जीवंत लोकतंत्र की वास्तविक रीढ़ होते हैं। जब युवा सही दिशा में सवाल पूछना शुरू करता है, तभी लोकतांत्रिक मूल्य और अधिक मजबूत होते हैं।
वायरल होना सच होने की गारंटी नहीं
अवस्थी ने कहा कि आज सूचनाओं की बाढ़ के दौर में युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही और गलत सूचना के बीच अंतर करने की है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि "रील नहीं, रीयल बनने पर विश्वास रखें। वायरल होना सच होने की गारंटी नहीं है।" सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर सूचना को सच मान लेने के बजाय अपने विवेक का प्रयोग करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के भी अब 'सोशल' होने पर सवाल उठने लगे हैं, इसलिए आवश्यक है कि युवा किसी सूचना को आगे बढ़ाने से पहले उसकी विश्वसनीयता पर विचार करें।
न्यूज और व्यूज के बीच अंतर करें
उन्होंने कहा कि न्यूज और व्यूज के बीच अंतर करना आज बेहद आवश्यक हो गया है। समाचार तथ्य देता है, जबकि विचार किसी व्यक्ति की दृष्टि हो सकता है। दोनों को एक मान लेना लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी केवल खबर पहुंचाने की नहीं, बल्कि समाज को सही सवालों से जोड़ने और लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने की भी है।
एआई इंसान की जगह नहीं ले सकता
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि तकनीक हमारे काम को आसान बना सकती है, लेकिन एआई इंसान के दिल और दिमाग की जगह कभी नहीं ले सकता। एआई पर पूरी तरह निर्भरता उचित नहीं है। मनुष्य की संवेदना, विवेक, अनुभव और निर्णय क्षमता ही समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तकनीक का उपयोग सहायक के रूप में होना चाहिए, विकल्प के रूप में नहीं।
लोकतंत्र की रक्षा आप मोबाइल से भी कर सकते हैं
अवस्थी ने लोकतंत्र की वर्तमान भूमिका को मोबाइल से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संसद में नहीं होती, बल्कि आपके मोबाइल से भी होती है। हम क्या देखते हैं, किस सूचना पर विश्वास करते हैं, क्या साझा करते हैं और किन मुद्दों पर सवाल उठाते हैं, यह सब लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक और विशेषकर युवा वर्ग को अपने डिजिटल व्यवहार के प्रति जिम्मेदार होना होगा।
कार्यक्रम में संस्था का परिचय देते हुए सचिव डॉ. मालासिंह ठाकुर ने अभ्यास मंडल की दीर्घकालीन यात्रा और उद्देश्यों को साझा किया। उन्होंने कहा कि अभ्यास मंडल पिछले 68 वर्षों से इंदौर की वैचारिक चेतना, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों को संजोए रखने वाला निष्पक्ष मंच रहा है। संस्था का निरंतर प्रयास रहा है कि समाज और देश के समसामयिक विषयों पर स्वस्थ विमर्श खड़ा हो तथा युवा पीढ़ी को सार्थक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।
मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया
इस अवसर पर विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन स्तर पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। स्मृति चिह्न प्रदान करने का दायित्व ओम नरेडा एवं मदन राणे ने निभाया। अतिथियों का स्वागत संस्था अध्यक्ष श्री रामेश्वर गुप्ता एवं डॉ. स्वप्निल व्यास ने किया। कार्यक्रम का संचालन मनीष भालेराव, कुणाल भंवर एवं ब्रजेन्द्र धाकड़ ने किया। आभार प्रदर्शन मयंक शर्मा ने किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान किया और इसके बाद एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। समारोह में शहर के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्धजनों, शिक्षाविदों तथा बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।