देवी अहिल्या बाई के जन्म दिवस 31 मई को इंदौर गौरव दिवस के साथ उनके जन्म शताब्दी समारोह का समापन भी होने जा रहा है। देवी अहिल्या परम शिवभक्त थीं। एक संयोग है कि नगर के एक और महाकाल दो दूसरी और ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग है। देवी अहिल्या और अन्य होल्कर राजाओं ने शहर को विकास और सोच के मामले में हमेशा समय से आगे रखा। उनकी इसी गौरवशाली परंपरा को इंदौर की हस्तियों ने भी आगे बढ़ाया। यह सिलसिला पिछले सैकड़ों वर्षों से आज तक जारी है। आज भी इंदौर में देश के कई प्रमुख संस्थान, नामचीन चिकित्सक, वैज्ञानिक, इंजीनियर, गायक, संगीतकार, व्यापारी, उद्योगपति, शिक्षक और राजनेता मौजूद हैं। उनकी देश में विशिष्ट छाप है।
सर सेठ हुकुमचंद
किसी समय इंदौर की पहचान रही सूती कपड़ा मिलों की स्थापना और उसमें सर सेठ हुकुमचंद के योगदान को कौन भूल सकता है। होल्कर रियासत के अंतिम राजा यशवंतराव होल्कर द्वितीय के साथ सभी होल्कर राजाओं का इंदौर नगर के विकास में अतुलनीय योगदान है। दरअसल, महाराजा यशवंत राव होल्कर ने नए और आधुनिक इंदौर की बुनियाद रखी थी। उनके जमाने में बना इंदौर का सात मंजिला अस्पताल आज भी प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है।
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विनोबा भावे शुरू किया था सफाई आंदोलन
इंदौर देश में लगातार सात बार स्वच्छता में पहले नंबर पर आया है, लेकिन शहर में सफाई आंदोलन की शुरुआत संत विनोबा भावे ने 1960 में की थी। तब वे नगर में एक माह रहे थे।
गांधीजी आए थे इंदौर
1935 में महात्मा गांधी ने इंदौर के हिंदी साहित्य सम्मलेन में हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने जाने की मांग पहली बार की थी। इंदौर के सूती वस्त्र उद्योग ने देश भर में अपनी पहचान बनाई थी। नगर के सुनियोजित विकास के लिए आज से 100 वर्ष से भी अधिक पहले होल्कर महाराजा ने प्रसिद्ध सिटी प्लानर पैट्रिक गिडीज को नगर में बुलवाया था। गिडीज ने इंदौर का पहला मास्टर प्लान रिपोर्ट 1918 में इंदौर दरबार में प्रस्तुत किया था।