विश्व बैंक की टीम इंदौर पहुंची। कलेक्टर मनीष सिंह से चर्चा की और बायो सीएनजी प्लांट से उत्पन्न की जा रही गैस एवं उससे संचालित की जा रही सिटी बस के बारे में जानकारी ली। टीम ने इसका अध्ययन कर दुनिया के 1000 से ज्यादा शहरों में स्थापित करना चाहते हैं।
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कलेक्टर मनीष सिंह से चर्चा करते विश्व बैंक टीम के सदस्य
- फोटो : सोशल मीडिया
वर्ल्ड बैंक टीम इंदौर पहुंची और इंदौर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और स्वच्छता में लगातार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के संबंध में कलेक्टर मनीष सिंह के साथ चर्चा की। कलेक्टर ने टीम को बताया कि जनप्रतिनिधियों, मीडिया, प्रशासन और नागरिकों के सहयोग से इंदौर ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में एक नया अध्याय लिखा है।
वर्ल्ड बैंक की टीम ने बायो सीएनजी प्लांट से उत्पन्न की जा रही गैस एवं उससे संचालित की जा रही सिटी बस के बारे में जानकारी ली। टीम द्वारा इस टेक्नोलॉजी को देश के अन्य शहरों में बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार को सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसी के चलते वर्ल्ड बैंक की टीम ने इंदौर का दौरा किया और विस्तृत अध्ययन किया कि किस तरह इंदौर ने उत्तम गुणवत्ता के वेस्ट सेग्रीगेशन की सहायता से बायो सीएनजी प्लांट स्थापित कर हाई कैलोरीफिक वैल्यू की गैस का उत्पादन किया। विश्व बैंक की टीम ने इंदौर के स्वच्छता मॉडल को समझा। उन्होंने शहर में हो रहे काम की तारीफ की। सदस्य बोले, हम ग्रीन एनर्जी आधारित लोक परिवहन मॉडल के विकल्पों का अध्ययन कर रहे हैं। इंदौर ने बायो वेस्ट से सीएनजी बनाकर सफल मॉडल तैयार किया है। इसका अध्ययन कर दुनिया के 1000 से ज्यादा शहरों में स्थापित करना चाहते हैं। इसके लिए विश्व बैंक भारत और अन्य देश की सरकारों को आर्थिक सहयोग देने को तैयार है। प्रतिनिधिमंडल में तीन सदस्य वाशिंगटन डीसी, एक सिंगापुर और तीन दिल्ली के संस्थानों से हैं। यह दल भारत सरकार के निर्देश अनुसार मॉडल का अध्ययन कर रहा है।
विश्व बैंक की टीम ने बायो सीएनजी प्लांट की जानकारी ली और प्रक्रिया समझी
- फोटो : सोशल मीडिया
बायो सीएनजी गैस निर्माण एवं सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट की प्रक्रिया देखी
वर्ल्ड बैंक की टीम ने 3-आर मॉडल के बाद बायो सीएनजी प्लांट विश्व बैंक को देख कहा कि इंदौर की कचरा सेग्रीगेशन प्रक्रिया वाशिंगटन डीसी से भी बेहतर है। कलेक्टर ने वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधिमंडल को कहा बायो सीएनजी प्लांट हमारे स्वच्छता मॉडल से ग्रीन एनर्जी जनरेट करने का राज है। कचरे से बायो सीएनजी बनाना है तो गीला-सूखा कचरा अलग कर 99.9 प्रतिशत सेग्रीगेशन करना होगा। वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, गीले कचरे से बायो सीएनजी गैस निर्माण एवं सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट की प्रक्रिया देखी। प्रतिनिधिमंडल ने निगमायुक्त प्रतिभा पाल से स्वच्छ भारत मिशन कार्यालय नेहरू पार्क में मुलाकात की। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एवं अन्य कार्यों की जानकारी प्राप्त की। ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थित बायो सीएनजी प्लांट का निरीक्षण किया। उन्हें गीले कचरे से कंपोस्ट खाद के साथ सीएनजी गैस बनाने की प्रक्रिया समझी।
वर्ल्ड बैंक के सवालों के जवाब में कलेक्टर ने बताया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नीति के तहत 2017 में शुरुआत की। सबसे पहले शहर से कचरा पेटियां हटाईं। घर-घर से कचरा उठाने और इसे अलग करने की शुरुआत की। शुरुआती चुनौतियों को जनप्रतिनिधियों व जनता के सहयोग ने आसान बनाया। हमने सबसे पहला काम डस्टबिन हटाने का किया। यह लीटरबिन हैं, इससे लोगों की आदत बदली। व्यावसायिक, आवासीय और मेडिकल वेस्ट को अलग-अलग का योजनाबध्द तरीके से कलेक्शन किया। नियम तोड़ने वालों पर स्पॉट फाइन किया। बायो सीएनजी का आइडिया चोइथराम मंडी से निकलने वाले बायो बेस्ट के डिस्पोजल से मिला। बायो वेस्ट की गुणवत्ता में सुधार के लिए गीले और सूखे कचरे को सेग्रीगेट करने की योजना तैयार की। बायो सीएनजी के लिए कचरे का सेग्रीगेशन करना और मेंटेन रखना महत्वपूर्ण है।