इंदौर शहर को सरकार महानगर बनाने की कवायद में जुटी है, लेकिन अभी तक इंदौर का मास्टर प्लान ही जारी नहीं हो सका। पिछले पांच वर्षों से नए मास्टर प्लान के बिना ही इंदौर फैल रहा है। इसके कारण शहरी सीमा से जुड़े इलाकों में बेतरतीब विकास हो रहा है। इंदौर का मास्टर प्लान मेट्रोपॉलिटन सिटी के चक्कर में ही अटका हुआ है।
अब तक प्रारूप ही प्रकाशित नहीं
अब माना जा रहा है कि मेट्रोपॉलिटन सिटी की अधिसूचना जारी होने के बाद मास्टर प्लान तैयार करने की शुरुआत हो सकती है। इसे लागू होने में दो से तीन साल का समय लग सकता है। खास बात यह है कि नया मास्टर प्लान वर्ष 2035 को ध्यान में रखकर बनाया जाना है, लेकिन इसे तैयार करने में ही नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने पांच साल लगा दिए। अभी तक इसका प्रारूप भी प्रकाशित नहीं हो पाया है।
तेजी से बढ़ रही अवैध बसाहट
सामाजिक संगठन इंदौर उत्थान के पदाधिकारियों ने इंदौर के लिए देश का सर्वश्रेष्ठ मास्टर प्लान बनाने की मांग उठाई है, लेकिन अभी तक नया मास्टर प्लान तैयार नहीं हो पाया। इंदौर में प्रदेश की दूसरी इन्वेस्टर्स समिट वर्ष 2008 में हुई थी। उसी दौरान मास्टर प्लान लागू किया गया था। इसकी मियाद पांच साल पहले ही समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार नया मास्टर प्लान लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक इसका कोई अता-पता नहीं है। इस बीच शहर की सीमा से लगे क्षेत्रों में अवैध बसाहट तेजी से बढ़ रही है। नए मास्टर प्लान के तहत शहर के 79 गांवों को शामिल करने की अधिसूचना जारी की गई है। इन क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की अनुमति भी फिलहाल नहीं मिल पा रही है।
ये भी पढ़ें-
Indore Metropolitan Area: पांच बार बदला गया इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी का प्रस्ताव, 140 KM दूर के शहर भी जोड़ दिए