मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंगलवार शाम को इंदौर पहुंचे। नृसिंह वाटिका में उन्होंने उन बच्चों से संवाद किया जिनके माता-पिता की कोरोना में मौत हो चुकी है। इसके बाद वे ठेला चलाकर आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए खिलौने एकत्र करने निकले।
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खिलौने एकत्र करने के लिए ठेला चलाकर निकले मुख्यमंत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
इंदौर गौरव दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंगलवार शाम को इंदौर पहुंचे। सबसे पहले वे एरोड्रम रोड स्थित नृसिंह वाटिका गए। यहां कोरोना में माता-पिता को खो चुके बच्चों से संवाद किया। सीएम ने बच्चों से कहा कि कभी खुद को अकेला मत समझना। तुम्हारा मामा हमेशा तुम्हारे साथ है। सीएम ने ठेला भी चलाया और आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए खिलौने जुटाए।
नृसिंह वाटिका में हुए कार्यक्रम में जिले के वे 525 बच्चे उपस्थित रहेंगे जिनके माता या पिता में से किसी एक की कोरोना से मौत हो चुकी है। इन बच्चों की जिम्मेदारी अलग-अलग समाज व संगठनों ने ली है। मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ अभिभावकों से भी बात की। बच्चों से संवाद के दौरान सीएम शिवराज ने कहा कि आप लोग प्रदेश और देश का भविष्य हो। कभी खुद को अकेला मत समझना। जितना पढ़ना चाहो, पढ़ो, मामा तुम्हारे साथ है। खूब मन लगाकर पढ़ो। मामा तुम्हारी सारी जरुरतें पूरी करेगा। इस मौके पर बच्चों ने अपनी बात सीएम के सामने रखी। कहा कि प्रशासन की तरफ से पूरा सहयोग मिल रहा है। सीएम ने कहा कि बच्चों को प्रदेश सरकार से मिलने वाली सहायता राशि और पीएम केयर फंड से मिलने वाली 2 और पांच हजार रुपए की मदद की राशि लगातार मिलती रहेगी।
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तनिष्का को आशीर्वाद देते मुख्यमंत्री
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सबसे कम उम्र में 12वीं पास करने वाली तनिष्का ने अपने अनुभव बताए। सांसद शंकर लालवानी ने तनिष्का के बारे में सीएम को बताया कि किस तरह 12 साल की उम्र में तनिष्का ने कॉलेज में एडमिशन ले लिया था। वह जज बनना चाहती है। तनिष्का ने कहा कि वह पिछले दस साल से शिवराज मामा से मिलना चाह रही थी। आज यह इच्छा पूरी हुई है। इसके बाद तनिष्का को मंच पर बुलाकर सीएम ने उसे दुलार कर आशीर्वाद दिया। उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। तनिष्का के पिता का कोरोना में निधन हो चुका है। वह मां के साथ रहती है। शिखा ठाकुर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि शिवराज सर आपने कलेक्टर सर को जो कहा था उस आदेश के अनुसार वे हमारी पूरी तरह मदद कर रहे हैं। खुशी कुशवाह ने कहा कि मैंने कोरोना में माता-पिता को खो दिया। समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या होगा लेकिन आपने जो पहल शुरू की है उसने बहुत मदद की। आपकी छोटी सी कोशिश से जीवन बदल या। मैंने 12वीं 85 प्रतिशत अंकों के साथ पास की है। जेईई की तैयारी कर रही हूं। बहुत खुशी है कि आज भी आप जैसे लोग हैं जो हम जैसों के लिए सोचते हैं।
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ठेला चलाकर खिलौने एकत्र करने निकले सीएम
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सीएम ने चलाया ठेला, एकत्र किए खिलौने
बच्चों से संवाद के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गोद ली गई आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए खिलौने एकत्र करने शहर में ठेला चलाया। वे लोधीपुरा गली नंबर एक से सीतलामाता बाजार तक घूमे। शाम 6.30 बजे लोधीपुरा पहुंचे सीएम 800 मीटर दूर सीतला माता बाजार तक बच्चों के लिए खिलौने एकत्रित करने के लिए ठेला लेकर घूमे। इस दौरान सीएम ने माइक से कहा कि हार-फूल नहीं चाहिए, बच्चों के लिए खिलौने और जरुरत का सामान चाहिए। इधर शहर को भिक्षुक मुक्त बनाने के लिए मंगलवार को इंदौर में नो भिक्षा, केवल शिक्षा अभियान की शुरुआत की। सीएम ने देश के सबसे स्वच्छ और स्मार्ट शहर इंदौर को भिक्षुक मुक्त बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि अब इंदौर की सड़कों पर एक भी भिक्षुक नजर नहीं आएगा। सीएम ने कहा कि जन भागीदारी से शहर में भिक्षुकों के लिए दो आश्रय स्थल शिवधाम और अहिल्याधाम का निर्माण कराया जाएगा। इन आश्रय स्थलों में भिक्षुओं को पुर्नवास किया जाएगा। अहिल्या धाम में महिला और शिवधाम में पुरुष भिक्षुकों को रखा जाएगा।
सीएम के अभियान को अपार जनसमर्थन मिला। लोगों ने खिलौने सहित अन्य चीजें सीएम को सौंपी। भाजपा के अन्य नेता भी उनके साथ रहे। सीएम ने कहा कि सबी संकल्प ले लें कि आंगनवाड़ी के एक भी बच्चे को कुपोषित नहीं रहने देंगे। आंगनवाड़ी को हम शिक्षा का केंद्र बना रहे। इंदौर के लोग तय करें कि जन्मदिन पर बच्चों को दूध और फल खिलाएं। माता-पिता की पुण्यतिथि, विवाह वर्षगांठ पर बच्चों को खाना खिलाएं।
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संबोधित करते सीएम शिवराज।
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया कि सिर्फ कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चे ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के सभी अनाथ बच्चों की देखरेख का जिम्मा मध्य प्रदेश सरकार उठाएगी। कोविड के चलते अनाथ हुए बच्चों के अलावा भी जो अनाथ बच्चे हैं, उन्हें हम किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ सकते, इसलिए सरकार समाज के साथ मिलकर ऐसे बच्चों की शिक्षा, आश्रय और आहार की व्यवस्था, जीवन व्यापन की संपूर्ण व्यवस्था करेगी। इसकी बहुत जल्द एक योजना आपके सामने रखेंगे। जितना समाज का सहयोग मिलेगा वो ठीक है नहीं तो सरकार पूरी व्यवस्था को निश्चित तौर पर करेगी। अगर पिता कमाऊ हैं वो भी चला गया, घर में कोई नहीं है, इस मामले में बहुत गंभीरता से विचार करके बहुत संवेदनशील फैसला करेंगे। हम ऐसे बच्चों को नहीं छोड़ सकते जो मजबूर और परेशान हों, उस पर भी हम फैसला कर रहें हैं।
कहा कि यह कभी नहीं समझना कि हमारा कोई नहीं है, आपके साथ मामा है, पूरी सरकार है। हम बच्चों के अभिभावकों की कमी तो पूरी नहीं कर सकते, लेकिन इतना तो कर ही सकते हैं कि इनकी जिंदगी के कठिन मोड़ को आसान बना सके और बेहतर मार्ग के लिए इन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर सकें। कोविड का दौर बड़ा ही भयानक था। अपने अभिभावकों को खोने का दर्द मैं भी समझ सकता हूं। मैंने भी बचपन में अपनी मां को खोया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों की 5 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि लगातार जारी रहेगी। साथ ही नि:शुल्क अनाज भी दिया जाना जारी रहेगा। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि खूब पढ़ना, हिम्मत मत हारना, आगे बढ़ाना, सरकार हर कदम पर आपके साथ है, राह में कोई रोड़ा नहीं आने देंगे, सभी जरूरतें पूरी करेंगे ताकि टैलेंट को पंख लगते रहे।
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सीएम ने बच्चों के साथ खिंचवाए फोटो
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इस दौरान मुख्यमंत्री जी ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया। सांसद श्री शंकर ललवानी ने कोविड काल के दौरान और उनके बाद के समय में संवेदनशीलता के साथ बच्चों के हित के लिए योजनाएं बनाने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता का आभार जताया। उन्होंने बताया कि इंदौर के 418 बच्चों की फीस बतौर जमा कराई गई है। इंदौर के सामाजिक संगठन को हमेशा उसे सामाजिक सरोकार समझा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि विजयश्री इंडस्ट्री ने जहां 11 बालिकाओं को गोद लिया है, वहीं जिला प्रशासन के अधिकारी पालक सहपालक नियुक्त होकर इन बच्चों की देखरेख में अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। सांसद ने कलेक्टर मनीष सिंह की भी प्रशंसा की। जिन्होंने ऐसे बच्चों के नाम उनके पालकों की ढाई करोड़ रुपये की संपत्ति का नामांतरण करवा दिया।
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बच्चे ने ली सीएम के साथ सेल्फी
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बता दें कि कोरोना महामारी से अपने माता-पिता दोनों को खोने वाले बच्चों को प्रदाय सहायता के तहत मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा योजना में मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा योजना अंतर्गत इंदौर जिले में कुल 55 सी बालक, बालिकाओं को योजना का लाभ दिया है। इसी प्रकार योजना गाइडलाइन अनुसार प्रदाय सहायता योजना अंतर्गत कुल 53 बालक, बालिकाओं को प्रतिमाह 5 हजार रुपये की पेंशन प्रदाय की जा रही है। योजना अन्तर्गत कुल 53 बालक,बालिकाओं को प्रतिमाह निःशुल्क राशन प्रदाय किया जा रहा है। सभी पात्र 53 बालक,बालिकाओं में से 48 बालक, बालिकाएं जो शिक्षा एवं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं उनकी शिक्षा शुल्क माफ की गई है। इसी प्रकार प्रधानमंत्री केयर फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत योजना गाईड लाईन अनुसार प्रदाय सहायता अन्तर्गत पात्र प्रत्येक बालक, बालिकाओं हेतु 10 लाख रुपये का कॉरपस फण्ड बनाया गया है जो बालक,बालिकाओं की 23 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक विभिन्न स्तरों पर बालक, बालिकाओं की आवश्यकतानुसार उन्हें प्रदान किया जाएगा। योजना अन्तर्गत पात्र 29 बालक,बालिकाओं का 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कराया जाएगा। सभी पात्र 29 बालक बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा प्रदाय की जाएगी। चाइल्ड प्रोटेक्शन योजना अन्तर्गत प्रत्येक पात्र बालक/बालिकाओं के बैंक खाते में 4 हजार रुपये प्रतिमाह के मान से राशि प्रदाय की जा रही है। अनुग्रह राशि योजना अंतर्गत माता-पिता दोनों को खोने वाले 28 बालक, बालिकाओं के 18 परिवार को 50 हजार रुपए रुपये ex-gratia राशि प्रदाय की गई।
सीएम ने भिक्षुक मुक्त इंदौर का दिलाया संकल्प
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इसके अलावा योजना गाइडलाइन के अतिरिक्त जिला स्तर से किए गए प्रयास के तहत पात्र 11 बालिकाओं को विजयश्री इंडस्ट्री द्वारा गोद लिया गया हैं, जो बालिकाओं की विवाह तक सम्पूर्ण जिम्मेदारी ली गई है। योजना अन्तर्गत पात्र 15 बालक / बालिकाओं के माता-पिता की लगभग 2 करोड 40 लाख 86 हजार की चल-अचल सम्पतियों को बालक / बालिकाओं के नाम नामांतरण किया गया है। जिला स्तर से सभी पात्र बालक/बालिकाओं हेतु पालक एवं सहायक पालक अधिकारी नियुक्त किये गये जो नियमित तौर पर बच्चों से भेंट कर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। अपने माता-पिता में से किसी एक को खोने वाले बच्चों को प्रदाय सहायता हेतु निजी स्पोंसरशिप योजना के तहत सांसद द्वारा कोविड-19 वैश्विक महामारी से अपने माता-पिता में से किसी एक को खोने वाले 224 बच्चों की एक वर्ष हेतु शिक्षा निःशुल्क कराई गई है। दानदाता स्वयंसेवी, समाजसेवी, सामाजिक, व्यापारिक, औद्योगिक संगठनों एवं आमजनों के सहयोग से ऐसे बच्चों की 2 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि प्रदान कराई जा रही है।