इंदौर में जलसंकट पर बोले रहवासी
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दो से तीन हजार रुपये का खर्च बढ़ गया
रघुनंदन बाग में रहने वाले नानकराम ने कहा कि पानी के सरकारी टैंकर नहीं आ रहे हैं। हमारे क्षेत्र में कई जगह अभी तक नर्मदा लाइन पहुंची ही नहीं है। यहां के लोग पूरी तरह निजी टैंकरों पर या फिर नगर निगम की टंकियों पर निर्भर हैं। निगम की टंकियों पर सुबह 4 बजे से ही लोग कतारों में लग जाते हैं। मध्यम वर्गीय परिवार जो पहले बोरिंग पर निर्भर थे, अब महीने में दो से तीन हजार रुपए तक केवल टैंकरों पर खर्च करने को मजबूर हैं।
इसलिए प्यासा है इंदौर
इंदौर में योजनाबद्ध तरीके से काम की कमी भी इस जलसंकट का बड़ा कारण है।
शहर में वाटर रिचार्जिंग के नियम तो हैं, लेकिन धरातल पर उनका पालन नहीं के बराबर है।
बारिश का पानी जमीन में जाने के बजाय नालों में बह जाता है।
इंदौर के ऐतिहासिक तालाब (जैसे बिलावली, सिरपुर) सिमटते जा रहे हैं, जो कभी शहर के जल स्तर को बनाए रखते थे।
नर्मदा लाइन से आने वाले पानी का एक बड़ा हिस्सा (करीब 30-40%) लीकेज और अवैध कनेक्शनों के कारण बर्बाद हो जाता है।
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