सांकेतिक तस्वीर।
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कांग्रेस द्वारा घोषित किए गए प्रत्याशियों में कई पुराने पार्षदों को मौका मिला है। इस बार वार्ड बदलने से कई प्रत्याशियों के समीकरण भी बदले हैं। कुछ प्रत्याशी ऐसे हैं जो पहले पुराने वार्ड में पार्षद रह चुके हैं। इधर भाजपा की बात करें तो लंबी खींचतान के बाद प्रत्याशी तय हुए। आरक्षण के तहत वार्ड बदले जाने से इस बार कुछ चेहरों को मौका मिला है, तो कुछ पुराने पार्षदों का टिकट कट गया। इसके अलावा दो से ज्यादा बार पार्षद रहने, गुटबाजी सहित कई कारण भी रहे। नए समीकरणों में पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ रही कुछ महिलाएं भी हैं। जिन दावेदारों को टिकट नहीं मिले हैं, उनमें अब काफी नाराजगी है। संभव है कि इसका असर महापौर के चुनाव प्रचार पर भी पड़ सकता है।