इंदौर जल संकट : रहवासियों का दर्द
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नयापुरा से स्कूटर पर अपनी पोती और तीन खाली केन लेकर आए मोहम्मद जावेद कहते हैं कि उन्हें एक किलोमीटर दूर मल्हार आश्रम पानी की टंकी पर आना पड़ता है। सुबह-सुबह दो-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं, क्योंकि उनकी बस्ती में पीने का तो क्या, उपयोग करने का पानी भी साफ नहीं आता। कई बार अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन समस्या हल नहीं हुई। इस कारण उन्हें रोज दुकान पर जाने से पहले पानी भरने आना पड़ता है।
शाहबुद्दीन, जो ऑटो रिक्शा चलाते हैं, रोज चार किलोमीटर दूर गौरीनगर बस्ती से पानी भरने टंकी तक आते हैं। वे बताते हैं कि जहां वे रहते हैं, वहां सरकारी नलों पर बहुत भीड़ रहती है। इतना इंतजार नहीं कर सकते, इसलिए ऑटो में खाली केन लेकर रोज टंकी पर आते हैं। इसके बाद सवारियां छोड़ने का काम करते हैं।
जेल रोड से बाइक पर पानी लेने आए माणकचंद बताते हैं कि गर्मी इतनी ज्यादा है कि बोरिंग ने जवाब दे दिया है। नगर निगम के टैंकरों का भी कोई भरोसा नहीं रहता, कभी आते हैं, कभी नहीं। पानी तो रोज चाहिए, इसलिए रोज बाइक से पानी ढूंढने निकलना पड़ता है।
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