फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kuno National Park: कूनो पार्क में चीतों ने छह दिन में किया दूसरा शिकार, जानिए यह प्रोजेक्ट के लिए कितना अहम

Fri, 11 Nov 2022 05:20 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर

सार

नामीबिया से आई चीते भारत के माहौल में ढल रहे हैं। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में जिन दो नर चीतों को क्वारंटाइन बाड़े से बड़े बाड़े में छोड़ा गया था, उन्होंने छह दिन में दूसरा शिकार किया है। 
 
विज्ञापन
1 of 3
इन दो नर चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ा गया है। - फोटो : अमर उजाला
कूनो नेशनल पार्क में जिन दो नर चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ा गया था, उन्होंने छह दिन में दूसरी बार हिरण मारा है। वन अधिकारी और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े तमाम अधिकारी इससे बेहद खुश है। उनका कहना है कि यह बताता है कि दोनों चीते कूनो नेशनल पार्क में अपनी जिंदगी बिताने के लिए तैयार हो रहे हैं। 

नामीबिया से आठ चीतों को करीब दो महीने पहले प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत लाया गया है। इनमें पांच मादा और तीन नर चीते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन आठ चीतों को अपने जन्मदिन यानी 17 सितंबर को भारत में उनके क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा था। इन्हें एक महीना इन छोटे बाड़ों में रखने के बाद बड़े बाड़ों में छोड़ा जाना था, जहां चार हजार से अधिक चीतल एवं अन्य जानवर हैं। पांच नवंबर को आठ में से दो नर चीतों, जो आपस में भाई हैं, को बड़े बाड़े में छोड़ा गया था। शुरुआती प्रयासों में नाकाम रहने के बाद उन्होंने छह नवंबर को पहला शिकार किया और अब नौ नवंबर को दूसरा शिकार करने की बात सामने आई है। दोनों ही बार फ्रेडी और एल्टन ने चीतल का शिकार किया है। 

विज्ञापन

2 of 3
cheetah - फोटो : iStock
चीतों का यह शिकार महत्वपूर्ण क्यों है?
यह आठ चीते आठ हजार किमी की यात्रा कर नामीबिया से भारत लाए गए हैं। कूनो उनके लिए नया है। दरअसल, दुनिया में पहली बार किसी बड़े जानवर को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में बसाने की कोशिश हो रही है। इस वजह से प्रोजेक्ट चीता का महत्व न सिर्फ कूनो, मध्यप्रदेश और भारत के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए है। 
नामीबिया से आते ही उन्हें अलग-थलग कर दिया गया था। बैठे-बिठाये भैंसे का मांस खिलाया जा रहा था। जब फ्रेडी और एल्टन ने पहला और अब दूसरा शिकार किया तो यह संदेश भी दे दिया कि वह पूरी तरह फिट हैं और जंगल में खुद-ब-खुद जी सकते हैं। 

अब कूनो में आगे क्या होगा? 
फ्रेडी और एल्टन के दूसरे शिकार को लेकर वन अधिकारी उत्साहित हैं। उनका मानना है कि इन दोनों चीते अब जंगल में सामान्य हो रहे हैं। इस वजह से एक हफ्ते के भीतर तीसरे नर चीते ओबान को भी छोड़ दिया जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
चीता - फोटो : सोशल मीडिया
आखिर बड़े बाड़ों में क्या व्यवस्था है?
  • जो बड़ा बाड़ा है, उसमें नौ आपस में जुड़े कम्पार्टमेंट हैं। यह पूरा इलाका पांच वर्ग किमी में फैला है। अलग-अलग कम्पार्टमेंट बनाने की वजह यह है कि आवश्यकता के अनुसार उन्हें अलग किया जा सकता है। हर बाड़े में कम से कम 40 शिकार जानवर होने चाहिए। इसे सुनिश्चित करने की कोशिश में वन अधिकारी लगे हैं। 
  • अन्य पांच मादा चीतों के नाम साशा, सियासा, सावन्ना, तबलिसी और आशा हैं। आशा का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा है। उसके बारे में कहा जा रह है कि वह प्रेगनेंट है। हालांकि, इसे लेकर संशय है और कुछ ही दिनों में स्थिति साफ होने की उम्मीद की जा रही है। आशा को छोड़कर अन्य मादा चीतों को भी जल्द ही बड़े बाड़ों में छोड़ा जा सकता है। नर चीतों की उम्र 4.5 से 5.5 वर्ष है। वहीं, मादा चीतों की उम्र दो से पांच वर्ष है। 
  • जब यह चीते बड़े बाड़े में अभ्यस्त हो जाएंगे, तब उन्हें 748 वर्ग किमी के कूनो नेशनल पार्क में भेजा जाएगा। बड़े बाड़ों में पर्याप्त शिकार तो है, लेकिन अन्य शिकारी जानवर नहीं है। दरअसल, कूनो के जंगल में बड़ी संख्या में तेंदुएं हैं, जिन्हें इन नौ बड़े बाड़ों से बाहर किया गया है।  
  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें