फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gopal Mandir Janmashtami: दुनिया का सबसे भव्य शृंगार, 100 करोड़ के गहनों से ऐसे सजे राधा-गोपाल; देखें तस्वीरें

Sat, 16 Aug 2025 05:32 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

Radha Krishna Shringar: स्वतंत्रता के बाद से यह आभूषण बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखे जाते थे, लेकिन 2007 से हर जन्माष्टमी पर इन्हें पुनः धारण कराया जाता है। इस अवसर पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाती है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भक्तों के अनुसार, यह दुनिया का सबसे भव्य और अद्वितीय शृंगार है।
विज्ञापन
1 of 6
गोपाल मंदिर में राधा कृष्ण का 100 करोड़ का शृंगार। - फोटो : अमर उजाला
Gopal Mandir Janmashtami: पूरे देश में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। देशभर के मंदिरों और राधा कृष्ण की प्रतिमाओं को विशेष शृंगार से सजाया गया है। वहीं ग्वालियर के 100 वर्ष से अधिक पुराने गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व बेहद खास होता है...रियासत कालीन मंदिर में राधाकृष्ण प्रतिमाओं को लगभग 100 करोड़ रुपये के हीरे-जवाहरात जड़े जेवरातों से सजाया जाता है। सिंधिया रियासत के समय के इन सोने के गहनों में हीरा, नीलम, पन्ना, माणिक और पुखराज जैसे बेशकीमती रत्न जड़े हैं। भगवान श्रीकृष्णा और राधा रानी का दुनिया में सबसे महंगा शृंगार माना जाता है।


 
विज्ञापन

2 of 6
शृंगार की जांच करते सुरक्षा अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
हीरे, मोती, पन्ना जैसे बेशकीमती रत्नों से सुसज्जित भगवान के मुकुट और अन्य आभूषण
गोपालजी मंदिर में श्री राधा रानी और कृष्णा जी की प्रतिमाओं को रत्नजड़ित आभूषणों से सुसज्जित किया गया है, जिनकी कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। हीरे, मोती, पन्ना जैसे बेशकीमती रत्नों से सुसज्जित भगवान के मुकुट और अन्य आभूषण हैं। देश की स्वतंत्रता से पहले तक भगवान इन जेवरातों से शृंगारित रहते थे, लेकिन देश आजाद होने के बाद से जेवरात बैंक के लॉकर में कैद पड़े थे जो 2007 में नगर निगम की देखरेख में आए और तब से लेकर हर जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को बेशकीमती जेवरात पहनाए जाते हैं।
 
विज्ञापन

3 of 6
शृंगार के बाद भगवान की आरती करते पुजारी। - फोटो : अमर उजाला
राधा-कृष्ण के इस स्वरूप का साल भर होता है इंतजार
ग्वालियर का गोपाल मंदिर की स्थापना 1921 में ग्वालियर रियासत के तत्कालीन शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने की थी। उन्होंने भगवान की पूजा के लिए चांदी के बर्तन और पहनाने के लिए रत्न जड़ित सोने के आभूषण बनवाए थे। इनमें राधा-कृष्ण के 55 पन्ना जड़ित सात लड़ी का हार, सोने की बांसुरी जिस पर हीरे और मालिक लगे हैं, सोने की नथ, जंजीर और चांदी के पूजा के बर्तन हैं। हर साल जन्माष्टमी पर इन जेवरातों से राधा-कृष्ण का शृंगार किया जाता है। इस स्वरूप को देखने के लिए भक्त सालभर का इंतजार करते हैं। 
 

4 of 6
कड़ी सुरक्षा में खोला गया भगवान के आभूषणों का पिटारा। - फोटो : अमर उजाला
श्री राधा-कृष्ण जी पर यह है खास ज्वेलरी...
  • राधा: पुखराज, माणिक, पन्ना रत्न लगा बेशकीमती मुकुट है यह तीन किलो का है।
  • श्रीकृष्ण: सोनी की तोड़े मुकुट है।
  • राधाकृष्ण: सफेद मोती वाला पंचमढ़ी हार, साथ लड़ी हार जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने लगे हैं।
  • ज्वेलरी: दोनों के पास झुमके सोने की नथ, कंठी चूड़ियां कड़े इत्यादि है।
  • सोने चांदी के बर्तन: राधा श्री कृष्ण के भजन के लिए सोने चांदी के बर्तन है। 
  • पूजा सामग्री: इत्र दान, पिचकारी चलनी, धूपदान, सांकड़ी, छात्र, मुकुट कुंभकर्णी, निरंजनी आदि सोने चांदी की है।
  • कीमत: रत्नजड़ित इन सभी आभूषणों की कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक है।
विज्ञापन

5 of 6
कड़ी सुरक्षा में भक्तों ने किए राधा-गोपाल के दर्शन। - फोटो : अमर उजाला
सुरक्षा में तैनात भारी पुलिस बल
जन्माष्टमी के दिन सुरक्षा व्यवस्था के बीच इन जेवरातों को बैंक के लॉकर निकालकर राधा और गोपाल जी का शृंगार किया जाता है। शृंगार के बाद सबसे पहले ग्वालियर के नगर निगम कमिश्नर सहित तमाम अधिकारियों ने गहनों से लदे राधा कृष्ण की पूजा अर्चना की गई। वहीं, बेशकीमती गहनों और भक्तों की सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल भी मंदिर में तैनात है। मंदिर के अंदर और बाहर की सुक्षा के लिए करीब 200 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। वर्दीधारियों के साथ ही सादा वर्दी में सुरक्षा अमला तैनात है। सीएसपी स्तर के अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें- घर में है भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ जी का मंदिर; यह 100 साल से भी अधिक पुराना; कहानी क्या
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
दिव्य स्वरूप का दर्शन करने कतार में लगे भक्त। - फोटो : अमर उजाला
शृंगार देखने जुटी भक्तों की भीड़
साल में एक बार जन्माष्टमी के मौके पर बेशकीमती शृंगार किया जाता है। इसे देखने के लिए हर व्यक्ति को इंतजार होता है। यही वजह है कि जन्माष्टमी के दिन सुबह 6:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की लाइन लगाना शुरू हो जाती है। शृंगार को देखने के लिए श्रीकृष्ण और श्री राधा रानी को हजारों और लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं। दर्शन करने आए श्रद्धालुओं का कहना है कि दुनिया में कहीं ऐसा शृंगार कभी नहीं होता है, जो एक बार कृष्ण जी और राधा जी को देख लेता है उसको मोहित हो जाता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें