देवास से कांग्रेस ने महापौर प्रत्याशी घोषित कर दिया है। ब्राह्मण वोटरों को देखते हुए कांग्रेस ने विनोदनी रमेश व्यास को उम्मीदवार बनाया है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा की इस नाम में अहम भूमिका बताई जा रही है। दूसरे नेताओं के चेहरे उतर गए हैं।
नगर निगम चुनाव की हलचल के बीच कांग्रेस ने गुरुवार को सूची जारी कर दी। देवास से विनोदनी रमेश व्यास को कांग्रेस ने महापौर प्रत्याशी बनाया है। अचानक आए इस नाम ने सबकी नींद उड़ा दी। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता हैरान हो गए और कुछ तो सदमें भी चले गए। इस नाम की घोषणा होने के साथ ही पैराशूट नेता श्वेता प्रवेश अग्रवाल, कविता मनोज राजानी, कविता प्रदीप चौधरी, रेखा वर्मा समेत तमाम दावेदारों की अटकलों पर विराम लग गया। हालांकि कांग्रेस ने जो सूची जारी की उसमें नाम कविता रमेश व्यास लिखा गया, जबकि सही नाम विनोदनी रमेश व्यास है।
बता दें कि महापौर प्रत्याशी की घोषणा कांग्रेस के लिए सिरदर्द बनी हुई थी। शुरुआत से ही कविता मनोज राजानी, कविता प्रदीप चौधरी और रेखा वर्मा ये तीन नाम ही प्रबल दावेदार माने गए। इनमें से मनोज राजानी त्रिकोणीय मुकाबले में पिछली बार महापौर चुनाव हार चुके हैं। रेखा वर्मा महापौर तो रहीं मगर विधानसभा में 50 हजार मतों से हारीं। प्रदीप चौधरी खुद को विधानसभा चुनाव के लिए प्रोजेक्ट कर रहे हैं। इन नामों के अलावा दूसरे भी कुछ नाम हैं मगर उनकी दावेदारी महज औपचारिकता ही है। इन सबके चलते सीधे कमलनाथ के मार्फत श्वेता प्रवेश अग्रवाल का नाम आया। प्रवेश अग्रवाल नर्मदे युवा सेना संगठन चलाते हैं और इसी साल फरवरी में कांग्रेस ज्वाइन की है। आर्थिक रूप से संपन्न प्रवेश की कमलनाथ से नजदीकियों ने ही उनकी पत्नी के नाम की दावेदारी को मजबूत बनाया और बुधवार तक तो खबर आई कि श्वेता का नाम लगभग तय हो गया है मगर जब विरोध हुआ तो नाम होल्ड कर लिया। इसी बीच गुरुवार रात को कांग्रेस ने सूची जारी कर दी और विनोदनी रमेश व्यास को कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके साथ ही सारे दावेदार निराश हो गए।
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प्रदीप चौधरी और मनोज राजानी
- फोटो : सोशल मीडिया
राजानी-चौधरी के साथ श्वेता भी दौड़ से बाहर
गुरुवार को भोपाल में कमलनाथ ने बैठक ली। इसमें महापौर प्रत्याशियों को लेकर चर्चा की गई। देवास का नाम होल्ड कर दिया गया। चर्चा चली कि कविता मनोज राजानी का और दूसरा कविता प्रदीप चौधरी का नाम हुआ। कहा गया कि श्वेता का नाम कटता है तो दोनों कविता में से एक के नाम पर विचार किया जाएगा। यह कहा गया कि शहर कांग्रेस अध्य़क्ष मनोज राजानी चुनाव लड़ना तो चाहते हैं लेकिन वे इंतजार कर रहे हैं भाजपा प्रत्याशी का। चर्चा है कि यदि भाजपा की ओर से कमजोर उम्मीदवार आया तो राजानी चुनाव लड़ेंगे। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि यदि इस बार प्रदीप चौधरी को मौका मिलता है तो विधानसभा चुनाव के लिए राजानी अपना दावा पेश कर सकते हैं। दूसरी तरफ प्रदीप चौधरी खुद को विधानसभा चुनाव के लिए प्रोजेक्ट कर रहे हैं और पूछे जाने पर कहा कि अगर सामान्य सीट पर सामान्य उम्मीदवार ही होना चाहिए। हालांकि दबीजुबान यह कहने से भी नहीं चूके कि पार्टी का आदेश हुआ तो चुनाव लड़ेंगे। इन सबके बीच ब्राह्मण प्रत्याशी को लेकर भी चर्चा होने लगी है क्योंकि देवास में ब्राह्मण वोटर अहम भूमिका निभाते हैं। कयास लगाए गए कि कांग्रेस ब्राह्मण को टिकट दे सकती है और हुआ भी यही। आखिरकार ब्राह्मण समाज से विनोदनी व्यास पर भरोसा जताया।
पूर्व मंत्री की भूमिका रही अहम
कांग्रेस ने विनोदनी रमेश व्यास का टिकट ब्राह्मण वोटरों को देखकर किया है। देवास में ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह रही थी कि पिछली बार भाजपा से सुभाष शर्मा त्रिकोणीय मुकाबले में जीतकर महापौर बने थे। इसके चलते कांग्रेस ने भी इस बार ब्राह्णण कार्ड खेला। सूत्रों का कहना है कि इस टिकट में पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा का रोल अहम रहा। उन्होंने किसी को भनक भी नहीं लगने दी और व्यास को टिकट दिलवा दिया।
प्रवेश की राजनीतिक इंट्री पर लगा अंकुश
इधर प्रवेश अग्रवाल की राजनीतिक इंट्री पर भी इस खबर के साथ विराम लग गया। अपनी पत्नी श्वेता के लिए प्रवेश की तैयारी पूरी थी और कमलनाथ के मार्फत देवास में राजनीतिक जमीन तलाश रहे थे, मगर अब उनकी इंट्री पर अंकुश लग गया है। अब प्रवेश अग्रवाल की राजनीतिक स्टेप क्या होगी इसको लेकर भी चर्चा हो रही है क्योंकि कहा जा रहा था कि यदि प्रवेश अग्रवाल देवास की राजनीति में स्थापित हो गए तो सबसे ज्यादा असर पड़ेगा शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी पर। ऐसा इसलिए क्योंकि राजानी पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा समर्थक हैं और वर्मा कमलनाथ के करीबी। ऐसे में कमलनाथ कोटे से डायरेक्ट इंट्री लेने वाले प्रवेश के देवास की राजनीति में आने पर उनका कद बढ़ जाएगा और वर्मा का झुकाव भी प्रवेश की ओर रहेगा। दूसरी वजह यह भी है कि देवास कांग्रेस की राजनीति सज्जन वर्मा के इर्द-गिर्द ही घूमती है और फैसलों में राजानी का दखल अधिक रहता है। प्रवेश अग्रवाल की पैराशूट इंट्री से इस पर भी असर पड़ेगा। राजानी विरोधी नेता प्रवेश के साथ जा सकते हैं जिससे भी नए समीकरण बनेंगे। हालांकि अब जो टिकट तय हुआ है उससे भी राजानी का कद कम हुआ है और चर्चा होने लगी है कि सज्जन वर्मा ने यह कैसी राजनीतिक चाल चली है।