भारत माता दुर्गा देवालय के बंद कपाट।
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छह माह में एक बार खुलता है माता का दरबार
माता रानी का यह दरबार साल में दो बार खुलता है। चैत्र एवं क्वार के नवरात्र में ही इस दरबार के दर्शन हो पाते हैं। जब 1851 में माता की प्रतिमा की स्थापना की गई तो मां की प्रतिमा को दशहरे के अवसर पर शहर में भ्रमण के लिए निकाला जाता था, लेकिन साल 1944 में दमोह के द्वारका प्रसाद श्रीवास्तव ने गौ हत्या का विरोध करके आंदोलन चलाया था। तब दशहरा चल समारोह के बीच में अंग्रेजों ने जुलूस पर रोक लगा दी। उसके बाद करीब 22 दिन तक मातारानी की यह प्रतिमा पुराना थाने में रखी रही थी। वहीं, प्रतिमा का लगातार पूजन किया गया। इसी दौरान पुजारी ने मां से प्रार्थना की और कहा कि मां अब यह प्रतिबंध हटवा दो अब कभी भी आपकी प्रतिमा को मंदिर से बाहर नहीं निकाला जाएगा। तब ब्रिटिश अफसरों ने रोके गए जुलूस को आगे बढ़ने का फरमान सुना दिया। मां के चमत्कार के बाद माता की इस प्रतिमा को तब से मंदिर में स्थापित कर दिया गया और आज तक यह प्रतिमा यहीं पर विराजमान है।