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Vikramaditya Mahanatya: तीन दिन लाल किले पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की रही धूम, देखें अद्भुत तस्वीरें

Mon, 14 Apr 2025 09:45 PM IST
अरविंद कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

CM Mohan Yadav: मध्यप्रदेश शासन द्वारा लाल किले में आयोजित महानाट्य विक्रमादित्य का समापन हो गया। इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा, जब सुशासन की बात होती है, तब विक्रमादित्य का नाम लिया जाता है। इस नाटक को करने के लिए कलाकार ने बहुत मेहनत की है।
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सीएम मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

'अद्भुत-अकल्पनीय-रोमांचक..।' 250 कलाकार जब सम्राट विक्रमादित्य का जीवन जीवंत करने मंच पर उतरे तो पूरा कार्यक्रम स्थल आश्चर्य में डूब गया। तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माधवदास पार्क गूंज उठा। दर्शकों को यकीन ही नहीं हुआ कि डिजिटल मूवी और रील्स के इस युग में इस तरह का कोई कार्यक्रम भी हो सकता है। दर्शक टकटकी लगाए पूरे नाटक को देखते रहे। दर्शकों ने महानाट्य से प्रेम, दयाशीलता, वीरता, साहस, विनम्रता, संघर्ष, देशप्रेम की प्रेरणा ली। मौका था नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य महामंचन का। 14 अप्रैल को महानाट्य का तीसरा और अंतिम दिन था। इस मौके पर दर्शकों ने एक तरफ सम्राट विक्रमादित्य के जीवन से जुड़ी प्रदर्शियां देखीं, तो दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के व्यंजनों का भी आनंद लिया।

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मौजूद दर्शक - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश की राजधानी में लाल किले की प्राचीर पर निरंतर तीन दिन ऐतिहासिक महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन उस युग को जीवंत करने का प्रयास है, जो विश्व में भारत द्वारा सुशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थापित करने की पहल से अवगत करवाता है। फिल्मों के निर्माण और डिजिटल युग के बावजूद प्राचीन नाट्य परम्परा से परिचित करवाने वाले इस महानाट्य के अंश स्मरणीय रहेंगे। 


मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को नई दिल्ली में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के मंचन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के दौरान महानाट्य के कलाकारों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि, धर्म और आध्यात्म क्षेत्र की हस्तियां और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित रहे।

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नाट्य मंचन - फोटो : अमर उजाला

विरासत से विकास के मंत्र पर हो रहा है कार्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरासत के संरक्षण के साथ विकास की बात कर रहे हैं। वास्तव में यह अदभुत काल है। प्रधानमंत्री स्वयं को प्रथम सेवक मानते हैं। आज भारत की गरिमा विश्व में बढ़ रही है। एक समय था, जब सम्राट विक्रमादित्य ने सुशासन, न्याय, वीरता और दानशीलता के महत्व को स्थापित किया। उस युग को पुन: महानाट्य के माध्यम से प्रकट किया गया है। सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विभिन्न पक्षों को महानाट्य के माध्यम से सामने लाने का कार्य हुआ है।

नाट्य विधा प्राचीन विधा है, इसका आज भी महत्व
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नाट्य विधा एक प्राचीन विधा है। आज के डिजिटल युग को देखें तो इस विधा का महत्व तब भी बना हुआ है। फिल्मों के निर्माण के साथ अनेक माध्यमों से कला और संस्कृति के दर्शन होते हैं। लेकिन महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और शासन काल को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता है। यह महानाट्य हमारे इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ और गौरवशाली अतीत से परिचय करवाता है।

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नाट्य मंचन - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन के दौरान सभी उपस्थितों से वीर  विक्रमादित्य महाराज की जय-जयकार भी करवाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस महानाट्य के मंचन के लिए आवश्यक समन्वय करते हुए सहयोग प्रदान किया।

विशिष्ट अतिथियों का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माना आभार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिल्ली में महानाट्य के मंचन के लिए आज पधारे राज्यसभा के उप सभापति हरवंश सिंह, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर, स्वामी अचलानंद जी, मध्यप्रदेश के मंत्रीगण सर्वश्री राकेश सिंह, प्रद्युम्न सिंह तोमर, नरेंद शिवाजी पटेल, दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद की उपस्थित के लिए आभार माना और संस्कृति मंत्रालय एवं विक्रमादित्य शोध पीठ के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। राज्यसभा के उप सभापति हरवंश सिंह, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

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कार्यक्रम में मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला

उप-सभापति, राज्यसभा हरिवंश सिंह ने कहा कि सबसे पहले मैं मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस इतिहास के प्रेरक प्रसंगों को पुनः भारत के सामने लाने के लिए बधाई देना चाहता हूं। इतिहास में इतिहासकारों की मान्यता है कि अतीत को जितना पीछे देख सकें, उतना देखें। उसके प्रेरक प्रसंगों से भविष्य गढ़ने की ताकत-ऊर्जा मिलती है। इसलिए इस अनोखे आयोजन के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सम्राट विक्रमादित्य से वर्षों से भावनात्मक लगाव है। यह दौर भारत के पुनर्जागरण का अद्भुत दौर है।

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हमें ये बताने की जरूरत नहीं कि सम्राट विक्रमादित्य ने कैसे आक्रांताओं को पराजित किया। किस रूप में हमारे यहां विक्रम संवत की शुरुआत हुई। यह महज नया वर्ष नहीं था, बल्कि भारत की गरिमा को, भारत के साहस को, भारत की चेतना को जाग्रत करने का पल था। हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि यही समय है, सही समय है। यह विश्व में भारत का समय है। साल 2014 के बाद जिस तरह से भारत के पुनर्जागरण का दौर चल रहा है, उसे दुनिया पहचान रही है। आज विदेशी राजदूत इस बात पर पुस्तक लिख रहे हैं कि पश्चिम भारत से क्या सीखे। भारत लोकतंत्र की जननी रहा है। जाने-माने इतिहासकार ने लिखा है कि भारत का हजार बरसों का इतिहास दुनिया का इतिहास रहा है। हमारे अतीत को नेपथ्य में डाला गया। विदेशियों तक ने कहा कि भारत अपने अतीत पर गर्व क्यों नहीं करता। इसलिए इस तरह के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बधाई।

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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : अमर उजाला

लौट रहा है सम्राट विक्रमादित्य का युग : सीएम डॉ. मोहन यादव
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लाल किले की प्राचीर पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन अद्भुत है। आज महानाट्य का अंतिम दिन है। मैं मध्यप्रदेश सरकार की ओर से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को बधाई देना चाहूंगा। वे कार्यक्रम की स्वागताध्यक्ष भी हैं और यहां की आयोजक भी हैं। वे हमें लगातार प्रेरणा भी दे रही हैं। लाल किले की प्राचीर तले जो महानाट्य का मंचन हो रहा है यह एक तरह से सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनः प्रकटीकरण है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरासत के विकास की बात कर रहे हैं। उनके कार्यकाल को सुशासन के रूप में जाना जाता है। ठीक वैसे ही, जब न्यायप्रियता की बात होती है, वीरता की बात होती है, विनम्रता की बात होती है, दानशीलता की बात होती है, तब-तब हमको सदैव हमें सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का दौर याद आता है।

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नाट्य मंचन - फोटो : अमर उजाला

भारत में युगों-युगों से है लोकतंत्र
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि कलाकारों सम्राट विक्रमादित्य के महानाट्य के माध्यम से उनके जीवन के विविध पक्षों को, उनके युग को जीवंत कर दिया। सच्चे अर्थों में 5 हजार साल के इतिहास में हमारे पास ऐसे कई प्रमाण मिलते हैं, जिनसे पता चलता है कि हमारे देश में लोकतंत्र युगों-युगों से है। महाभारत काल में भगवान कृष्ण ने भी लोकराज्य की स्थापना की। उसी तरह 2 हजार साल पहले सम्राट विक्रमादित्य का शासनकाल था। उन्होंने भी अपने आप को राजा, सम्राट कहलवाना पसंद नहीं किया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं को प्रधान सेवक कहलवाते हैं। ये हमारे शासकों की महान उदारता दर्शाता है। 

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नाट्य मंचन - फोटो : अमर उजाला
सीएम डॉ. यादव ने सुनाई ये कहानी
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि इस महानाट्य में कलाकारों ने अद्भुत संकल्पना प्रदर्शित की है। इस महानाट्य के मंचन से कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रमाण पेश किए। जब सम्राट विक्रमादित्य अपनी पत्नी के भाइयों को बंदी बनाकर लाते हैं, तब उनकी पत्नी कहती है मेरे भाइयों का अपराध क्षमा कर दो, लेकिन उस वक्त भी सम्राट विक्रमादित्य ने न्यायप्रियता नहीं छोड़ी। वे पत्नी से कहते हैं कि मेरे देश पहले देश है, इसलिए अपराधी को क्षमा नहीं कर सकते। उसी वक्त वे न्याय करते हैं। वे अपराधियों को दंडित करते हैं। वीरता, दानशीलता, चोरों का जीवन बदलना, उनकी बत्तीय पुतलियों की घटना, बेताल पच्चीसी की घटना, उनकी सभी कहानियां प्रेरणादायक हैं।
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नाट्य मंचन - फोटो : अमर उजाला

समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य महामंचन का आयोजन एक अद्वितीय पहल है। इसमें हम आगे विश्व पटल पर ले जाएंगे। इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो दर्ज किए जाते हैं। लेकिन सम्राट विक्रमादित्य जैसे अलौकिक व्यक्तित्व से इतिहास मापा जाता है। सम्राट विक्रमादित्य ने समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम किया है। इसमें किसानों, व्यापारियों को सहयोग के अलावा सभी के लिए निशुल्क आवास व्यवस्था भी शामिल थी। उसी भाव को आगे बढ़ते हुए आज पीएम नरेंद्र मोदी पीएम आवास, आयुष्मान कार्ड और उज्जवला योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को संचालित किए जा रहे है। 

कब शुरू हुआ आयोजन
लाल किले पर ये आयोजन 12 अप्रैल से शुरू हुआ था। तीन दिवसीय इस महामंचन के माध्यम से न केवल सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य और संस्कृति संरक्षण के कार्यों को प्रस्तुत किया गया, बल्कि यह आयोजन “सांस्कृतिक अभ्युदय से समृद्धि पथ पर अग्रसर मध्यप्रदेश” थीम पर केंद्रित रहा। आखिरी दिन 14 अप्रैल को भी महानाट्य शाम 6:30 बजे से लाल किले के माधवदास पार्क में मंचित किया गया। इस आयोजन के माध्यम से दर्शकों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों और स्थानीय व्यंजनों से भी रूबरू होने का अवसर मिला है।

तीन दिवसीय इस महा मंचन के माध्यम से न केवल सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य और संस्कृति संरक्षण के कार्यों को प्रस्तुत किया गया था। लाल किले पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के साथ साथ  'आर्ष भारत', 'मध्य प्रदेश पर्यटन' और 'एमपी फूड कोर्ट' जैसी प्रदर्शनियों को भी दर्शकों के लिए लगाया गया था। दिल्ली में हुए इस आयोजन के माध्यम से दर्शकों को मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों और स्थानीय व्यंजनों से भी रूबरू होने का अवसर मिला है।

यह आयोजन मध्यप्रदेश शासन द्वारा आयोजित “विक्रमोत्सव 2025” का हिस्सा है, जो प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास माना जा रहा है। इसमें 250 कलाकार सम्राट विक्रमादित्य की जीवन गाथा को जीवंत कर रहे हैं। इस महानाट्य के दृश्यों को सजीव बनाने के लिए पालकी, रथ, घोड़ों और एलईडी ग्राफिक्स के स्पेशल इफेक्ट का प्रयोग किया गया था। 

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