नाट्य मंचन
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समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य महामंचन का आयोजन एक अद्वितीय पहल है। इसमें हम आगे विश्व पटल पर ले जाएंगे। इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो दर्ज किए जाते हैं। लेकिन सम्राट विक्रमादित्य जैसे अलौकिक व्यक्तित्व से इतिहास मापा जाता है। सम्राट विक्रमादित्य ने समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम किया है। इसमें किसानों, व्यापारियों को सहयोग के अलावा सभी के लिए निशुल्क आवास व्यवस्था भी शामिल थी। उसी भाव को आगे बढ़ते हुए आज पीएम नरेंद्र मोदी पीएम आवास, आयुष्मान कार्ड और उज्जवला योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को संचालित किए जा रहे है।
कब शुरू हुआ आयोजन
लाल किले पर ये आयोजन 12 अप्रैल से शुरू हुआ था। तीन दिवसीय इस महामंचन के माध्यम से न केवल सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य और संस्कृति संरक्षण के कार्यों को प्रस्तुत किया गया, बल्कि यह आयोजन “सांस्कृतिक अभ्युदय से समृद्धि पथ पर अग्रसर मध्यप्रदेश” थीम पर केंद्रित रहा। आखिरी दिन 14 अप्रैल को भी महानाट्य शाम 6:30 बजे से लाल किले के माधवदास पार्क में मंचित किया गया। इस आयोजन के माध्यम से दर्शकों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों और स्थानीय व्यंजनों से भी रूबरू होने का अवसर मिला है।
तीन दिवसीय इस महा मंचन के माध्यम से न केवल सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य और संस्कृति संरक्षण के कार्यों को प्रस्तुत किया गया था। लाल किले पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के साथ साथ 'आर्ष भारत', 'मध्य प्रदेश पर्यटन' और 'एमपी फूड कोर्ट' जैसी प्रदर्शनियों को भी दर्शकों के लिए लगाया गया था। दिल्ली में हुए इस आयोजन के माध्यम से दर्शकों को मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों और स्थानीय व्यंजनों से भी रूबरू होने का अवसर मिला है।
यह आयोजन मध्यप्रदेश शासन द्वारा आयोजित “विक्रमोत्सव 2025” का हिस्सा है, जो प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास माना जा रहा है। इसमें 250 कलाकार सम्राट विक्रमादित्य की जीवन गाथा को जीवंत कर रहे हैं। इस महानाट्य के दृश्यों को सजीव बनाने के लिए पालकी, रथ, घोड़ों और एलईडी ग्राफिक्स के स्पेशल इफेक्ट का प्रयोग किया गया था।