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Explainer: भाजपा के पास 10 वोट कम, कांग्रेस के पास 5 ज्यादा, ऐसे में किसे मिलेगी MP की तीसरी राज्यसभा सीट?

Mon, 08 Jun 2026 02:54 PM IST
Dinesh Sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा ने तीन और कांग्रेस ने एक उम्मीदवार उतारा है। चर्चा का केंद्र तीसरी सीट है। कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग होना या न होना ही तीसरी सीट का फैसला करेगा। इस एक्सप्लेनर को पढ़कर जान पाएंगे कि आंकड़े क्या कह रहे हैं-
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मप्र में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चार प्रत्याशी मैदान में हैं। - फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है। विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा की दो सीटों पर जीत तय थी, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही थी। हालांकि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। तीसरी सीट किसे मिलेगी, मीनाक्षी नटराजन या महेश केवट? इस पर सियासी गलियारो में चर्चा शुरू हो गई है। इसे लेकर आंकड़े क्या कहते हैं, वो हम आपको बताते हैं।  

राज्यसभा के चुनाव कब होने हैं? 
बीती 22 मई को चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव तारीखों का एलान किया। आयोग के एलान के बाद चुनाव की प्रक्रिया एक जून से शुरू हुई। आठ जून तक नामांकन किए जा सकते हैं। 10 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। वहीं, नाम वापसी 11 जून तक हो सकती है। अगर जरूरत पड़ी तो 18 जून को मतदान होगा। इसी दिन देर शाम तक नतीजे आ सकते हैं।      

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मप्र की राज्यसभा सीटों को लेकर गणित - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के अलावा और कहां मतदान होना है?
जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम शामिल हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में सबसे अधिक चार-चार सीटों पर चुनाव हो रहा है। वहीं, मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटों, झारखंड में दो सीटों और मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में एक-एक सीट के लिए चुनाव होना है। इन सभी राज्यसभा सीटों के मौजूदा सांसदों का कार्यकाल  21 जून से 19 जुलाई तक अलग-अलग तारीखों पर खत्म हो रहा है। 
 
किन बड़े चेहरों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है? 
राज्यसभा से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, दिग्विजय सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवोगौड़ा जैसे प्रमुख नेता सेवानिवृत्त होने वाले हैं। मध्य प्रदेश से जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं। इसी तरह राजस्थान से राजेंद्र गहलोत, नीरज डांगी और रवनीत सिंह की सीटें खाली होने जा रही हैं।  

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मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश में किस पार्टी ने किसे बनाया उम्मीदवार?
मध्यप्रदेश में तीन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इनके लिए भाजपा ने रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उतारा है। यानी, तीन सीट के लिए चार उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। अगर 11 जून तक ये सभी उम्मीदवार मैदान में डटे रहते हैं तो 18 जून को राज्य में मतदान होगा। 

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मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश का संख्या बल क्या कहता है? 
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। दतिया विधानसभा के विधायक का निर्वाचन शून्य घोषित हो चुका है, वहीं विजयपुर विधायक को कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव के मतदान के लिए अयोग्य बताया है। इस हिसाब से वर्तमान में 228 सदस्य मतदान के पात्र हैं। इस लिहाज से एक उम्मीदवार को जीतने के लिए पहली वरीयता के 58 वोटों की जरूरत पड़ेगी। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63  विधायक हैं। वहीं, एक विधायक भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश डोडियार हैं। अगर दोनों पक्षों से क्रॉस वोटिंग नहीं होती है तो भाजपा अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से जिता सकती है। वहीं, कांग्रेस भी अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को जिता सकती है। 

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मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार - फोटो : अमर उजाला
कैसे फंसेगा पेंच?
  • भाजपा
भाजपा को अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए 116 प्रथम वरीयता के वोट की जरूरत पडे़गी। इसके बाद भी भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे। यानी तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोट की जरूरत होगी। बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के रिश्ते पार्टी से ठीक नहीं हैं। वहीं, डोडियार का वोट अगर भाजपा उम्मीदवार को मिलता है और कांग्रेस के नौ विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं तो मामला पलट जाएगा।
  • कांग्रेस 
उधर, कांग्रेस में अभी 63 विधायक हैं क्योंकि विजयपुर के विधायक मतदान के लिए अयोग्य हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास 63 विधायक यानी अतिरिक्त पांच वोट हैं।  कांग्रेस के छह विधायकों ने अगर क्रॉस वोटिंग कर दी तो तीसरी सीट पर फैसला दूसरी वरीयता के वोटों से होगा। इस स्थिति में भी भाजपा के फायदे में रह सकती है। वहीं, दूसरी ओर अगर कांग्रेस भी सत्ता पक्ष के विधायकों में सेंध लगाने में कामयाब होती है लड़ाई और रोचक हो सकती है।  
 

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मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार - फोटो : अमर उजाला
विधायक को क्यों बताना होगा- किसे दिया वोट
राज्यसभा चुनाव आम चुनावों की तरह नहीं होते। इसमें जनता सीधे मतदान नहीं करती, बल्कि राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक वोट डालते हैं। राज्यसभा चुनाव में गुप्त मतदान की व्यवस्था नहीं होती। इसके लिए ओपन बैलेट सिस्टम लागू होता है। मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि इस प्रणाली के तहत मतदान करने वाले विधायक को मतपत्र पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने वरीयता अंकित करने के बाद अपना मतपत्र अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है। इसके बाद ही वह मतपेटी में मतपत्र डाल सकता है। यदि कोई विधायक अपने दल के अधिकृत एजेंट को वोट नहीं दिखाता है या किसी अन्य दल के एजेंट को दिखाता है, तो उसका वोट अमान्य घोषित किया जा सकता है। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में यह स्पष्ट हो जाता है कि विधायक ने किस उम्मीदवार को प्राथमिकता दी है।

6 साल का होता है राज्यसभा का कार्यकाल 
राज्यसभा संसद का उच्च सदन है और यह एक स्थायी सदन माना जाता है, जिसे भंग नहीं किया जा सकता। इसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है तथा हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। राज्यसभा सदस्य होने के लिए उम्मीदवार को योग्यता के लिए भारत का नागरिक होना चाहिए। 30 साल की उम्र पूरी कर चुका हो। किसी लाभ के पद पर न हो। पागल या दिवालिया न हो और संसद विधि द्वारा निर्धारित अर्हताएं धारण करे।
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