खरगोन में AIMIM की हिंदू उम्मीदवार ने जीत हासिल की।
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पहले जानते हैं ओवैसी को मध्यप्रदेश में क्या मिला?
यूं तो ओवैसी की पार्टी को पार्षदी की सात सीटें मिली हैं। तीन खरगोन में, दो जबलपुर में और एक-एक खंडवा और बुरहानपुर में। इसके साथ ही खंडवा और बुरहानपुर में पार्टी के मेयर कैंडिडेट तीसरे स्थान पर रहे। इन दोनों ही जगहों पर भाजपा की जीत को कहीं न कहीं AIMIM ने प्रभावित किया है।
- बुरहानपुर में भले ही भाजपा की माधुरी पटेल ने कांग्रेस की शहनाज बानो को 542 वोट से हराया है, उनकी जीत का श्रेय त्रिकोणीय मुकाबले को दिया जा रहा है। AIMIM की शाइस्ता सोहैल हाशमी ने 10 हजार से अधिक वोट हासिल किए, जिसने भाजपा की जीत की राह साफ की। बुरहानपुर में AIMIM ने 14 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक पर जीत हासिल की। पार्टी के रफीक अहमद ने कड़े मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवार शहजाद नूर को वार्ड 2 में 156 वोट से हराया।
- खंडवा में भी AIMIM के मेयर कैंडिडेट ने भाजपा उम्मीदवार को जीत में मदद की। AIMIM की कैंडिडेट कनीज-बी ने 9601 वोट हासिल किए। छोटे नगर निगम में यह आंकड़ा महत्वपूर्ण हो जाता है। खंडवा में AIMIM ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक पर जीत हासिल की। पार्टी की शकीरा बिलाल ने वार्ड 14 में कांग्रेस की नूरजहां बेगम को 285 वोट से हराया। इतना ही नहीं, कम से कम सात वार्ड में AIMIM के कैंडिडेट की मौजूदगी की वजह से हार-जीत को प्रभावित किया।
- जबलपुर में AIMIM ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा और दो पर जीत हासिल की। पार्टी शमा परवीन ने वार्ड 49 से कांग्रेस की उम्मीदवार साइमा वसीम को 1,527 वोट से हराया। इसी तरह वार्ड 51 में समरीन ने कांग्रेस की शबनम फिरदौस को 209 वोट से हराया। दो वार्ड में पार्टी दूसरे स्थान पर रही। वार्ड 75 में पार्टी के मोहम्मद आरिफ को कांग्रेस के सामने हार का सामना करना पड़ा, पर उनकी हार 300 से भी कम वोटों की थी।
- खरगोन में हाल ही में सांप्रदायिक तनाव हुआ था। वहां पार्टी ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पार्षदी की तीन सीट हासिल की है। AIMIM की अरुणा बाई ने खरगोन नगर परिषद के वार्ड 2 में जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा की सुनीता देवी को 31 वोट से हराया। अरुणा बाई अनुसूचित जाति से आती हैं और डॉ. बाबासाहब अम्बेडर के बारे में ओवैसी के विचारों से प्रभावित होकर ही उन्होंने पार्टी ज्वाइन की थी। वार्ड 15 से शकील खान और वार्ड 27 से शबनम भी जीते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है ओवैसी की मौजूदगी?
- महाराष्ट्र में AIMIM की सफलता की बात करें तो आधार बना था दलित-मुस्लिम कॉम्बिनेशन। खरगोन में AIMIM की दलित हिंदू उम्मीदवार की जीत से आप इसे समझ सकते हैं। अगर इसे बुनियाद समझा जाए तो मध्य प्रदेश की कुल आबादी में 6.6% मुस्लिम और 15.6% अनुसूचित जाति की आबादी शामिल है। इसे ही ओवैसी टारगेट कर रहे हैं।
- ओवैसी ने खुद पहली बार मध्यप्रदेश के नगरीय निकाय चुनावों में सक्रियता दिखाई और खंडवा, भोपाल, इंदौर और जबलपुर में सभाओं को संबोधित किया। उन्हें सुनने बड़ी भीड़ भी उमड़ी थी। लगा था कि वे इंदौर-भोपाल जैसे बड़े शहरों के मुस्लिम इलाकों में करिश्मा दिखा सकते हैं। वहां भले ही रैलियां नतीजों में तब्दील न हो सकी हो, मौजूदगी का असर तो दिखा ही है।