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MP: आजीविका मिशन में अवैध नियुक्ति, सुषमा रानी की MBA डिग्री-अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी, EOW ने दर्ज की FIR

Tue, 01 Apr 2025 07:19 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने राज्य आजीविका मिशन में अवैध नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की है। यह मामला 2015 से 2018 के बीच की गई नियुक्तियों से जुड़ा है, जिसमें नियमों को दरकिनार कर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और मानदेय में अवैध रूप से वृद्धि की गई।
 
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पूर्व सीएम इकबाल सिंह बैस के साथ ललित मोहन बेलवाल और सुषमा रानी शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
राज्य आजीविका मिशन में भर्ती के लिए बिना अनुमोदित मानव संसाधन मार्गदर्शिका के आधार पर संविदा आधार पर पद भरे गए। इन नियुक्तियों में निर्धारित योग्यता, अनुभव और चयन प्रक्रिया के लिए मापदंड मिशन कार्यालय स्तर पर भी बनाए गए। जबकि मापदंडों को बनाने के बाद शासन से अनुमोदित करना आवश्यक होता है। इसमें कई अयोग्य और अर्हता पूरी नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति दी गई। जांच में सामने आया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल ने नियमों को दरकिनार करते हुए एक गैर-अनुमोदित "HR Manual" का उपयोग किया।

 
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सुषमा रानी शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
पूर्व सीईओ बेलवाल ने सुषमा रानी शुक्ला को नियमों का उल्लंघन कर राज्य परियोजना प्रबंधक (सामुदायिक संस्थागत विकास) के पद पर नियुक्त किया, जबकि उनके पास इस पद के लिए आवश्यक 15 वर्षों का प्रबंधकीय अनुभव नहीं था। मात्र चार महीने के भीतर उनका मानदेय अवैध रूप से 70,000 प्रति माह कर दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि बेलवाल ने मिशन की मानव संसाधन नीति को एचआर मैन्युअल के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि मैन्युअल राज्य आजीविका फोरम द्वारा अनुमोदन प्राप्त नहीं था। मार्च 2015 में राज्य आजीविका फोरम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में केवल मानव संसाधन नीति को मंजूरी दी गई थी, एचआर मैन्यूअल का कोई उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद नस्ती में नोटशीट की पृष्ठ क्रमांक 5 में कुटरचित रूप से एचआर मैन्यूअल जोड़ा गया। गलत नियुक्तियों के साथ ही संविधा कर्मचारियों के मानदेय में अवैध तरीके से 40% की वृद्धि की गई। 

 
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ललित मोहन बेलवाल - फोटो : अमर उजाला
अनुभव प्रमाण पत्र जाली, डिग्री फर्जी 
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि सुषमा रानी शुक्ला ने अपने चयन के लिए जाली प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRD), हैदराबाद का एक फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र संलग्न किया था, जिसमें उनकी उत्कृष्टता का वर्णन था। जांच में यह प्रमाण पत्र कूटरचित पाया गया। इसके अलावा, उनकी एमबीए की डिग्री भी फर्जी पाई गई। सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से प्राप्त उनकी डिग्री में कई विसंगतियां मिली। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार, तृतीय और चतुर्थ सेमेस्टर दोनों की मार्कशीट पर एक ही तारीख 25 अक्टूबर 2010 अंकित थी। जबकि यूनिवर्सिटी ने जानकारी दी कि तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा जनवरी/ फरवरी और चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा जुलाई 2010 में आयोजित हुई थी। 
 
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ललित मोहन बेलवाल और सुषमा रानी शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
सुषमा रानी के चयन के लिए हर स्तर पर मनमानी  
EOW की जांच में यह भी सामने आया कि शुक्ला के चयन के लिए  सायकोमेट्रिक परीक्षा में भी कई अनियमिताएं मिली है। मूल्यांकन पत्र पर मूल्यांकनकर्ता के हस्ताक्षर नहीं थी। अभ्यर्थियों को जो अंक दिए गए, उसमें  शुक्ला को मनमाने तरीके से सर्वोच्च अंक दिए गए। इसके अलावा, साक्षात्कार पैनल का गठन भी पक्षपातपूर्ण ढंग से बेलवाल ने सवयं किया, जिसमें बाहरी विशेषज्ञों का चयन मनमाने तरीके से किया गया। 

अन्य अवैध नियुक्तियों की भी हो रही जांच 
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने ललित मोहन बेलवाल, विकास अवस्थी और सुषमा रानी शुक्ला के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचना और भ्रष्टाचार के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (सी) के तहत एफआईआर दर्ज की है। EOW ने अपनी जांच जारी रखते हुए संकेत दिया है कि आगे और भी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इस घोटाले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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