International Literacy Day: एमपी के सुखद आंकड़े, पुरुष साक्षरता में इंदौर तो महिला साक्षरता में भोपाल है अव्वल International Literacy Day: Pleasant figures of MP, Indore in male literacy and Bhopal in female literacy
विज्ञापन
1 of 4
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई तरह के जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
हर साल 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। जिसकी शुरुआत यूनेस्को द्वारा 1966 में की गई थी। इसका उद्देश्य था कि किसी भी देश में कोई भी व्यक्ति निरक्षर न रहे। आमजन को साक्षर करने के इस अभियान को हमारे देश में भी चलाया जा रहा है जो बहुत हद तक लोगों को शिक्षित करने में सफल हुआ है। जीवन को समझना है, तो हमें साक्षरता का महत्व भी समझना होगा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों, विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संगठनों द्वारा शिक्षा को लेकर अनेक अभियान चलाए जा रहे हैं। समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए साक्षर होना बेहद आवश्यक है।
मध्य प्रदेश शिक्षा तक सभी की पहुंच आसान बनाकर साक्षर बनाने के क्षेत्र में लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। अगर हम आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश की साक्षरता दर वर्ष 2001 में 64.11 प्रतिशत थी जो वर्ष 2011 में बढ़कर 70.63 प्रतिशत हो गई। 10 सालों में करीब 6 प्रतिशत की वद्धि दर्ज हुई। मूलभूत सुविधाओं के लिए जद्दोजहद करते ग्रामीण परिवेश में बच्चों का दाखिला स्कूल में कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई तरह के जागरूकता कार्यक्रम चला कर शिक्षा के महत्व को लोगों को समझाया। जिसका नतीज यह निकला कि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के दाखिलों का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया है। वर्ष 2011 में, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के लिए दाखिले का अनुपात 98.88 प्रतिशत और उच्च प्राथमिक सस्तर (कक्षा 6 से 8) के लिए सकल दाखिला अनुपात 99.27 प्रतिशत रहा है। सरकार और लोगों की जागरूकता का सुखद परिणाम ये भी रहा कि स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने वालों में भी कमी आई है। प्रदेश में ड्रॉपआउट प्राथमिक स्तर पर 1.16 प्रतिशत तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर 7.4 प्रतिशत हो गई है।
विज्ञापन
2 of 4
प्रदेश में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए चल रहे पढ़ना-लिखना अभियान और नवभारत साक्षरता कार्यक्रम चल रहे हैं
- फोटो : सोशल मीडिया
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में साक्षरता दर में और इजाफा करने के उद्देश्य् से "नवभारत साक्षरता कार्यक्रम" संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए चल रहे "पढ़ना-लिखना अभियान" और "नवभारत साक्षरता कार्यक्रम" प्रदेश में शिक्षा की तस्वीर बदलने का काम करेंगे। प्रदेश के सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को जो औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाए और औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने की उम्र पार कर चुके हैं, उनकी निरक्षरता उन्मूलन के लिए संचालित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम निरक्षरों को बुनियादी एवं कार्यात्मक साक्षरता प्रदान करने में सफल हुए हैं। निरक्षरों को साक्षर करने में "अक्षर साथी" अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मध्यप्रदेश में महिलाओं को शिक्षित बनाने के लिए सरकार द्वारा हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने एडॉप्ट आंगनवाड़ी अभियानों और बेटियों को पढ़ाने के संकल्पों ने समाज की सोच को बदलने का काम किया है। बालिकाओं के लिए लाड़ली लक्ष्मी, नि:शुल्क साइकिल वितरण, सामान्य निर्धन वर्ग के परिवारों की बालिकाओं के लिए छात्रवृत्ति, बालिका शिक्षा के लिए केंद्र सरकार के सुकन्या समृद्धि योजना, बालिका छात्रावास, बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना जैसे कार्यक्रमों ने बालिकाओं को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने का काम किया है। 2011 में हुई जनगणना के आंकड़ों को देखें, तो प्रदेश को महिला साक्षरता में ज्यादा सफलता मिली है। 2001 की तुलना में 2011 की जनगणना में महिला साक्षरता में 9.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जो यह प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है।
विज्ञापन
3 of 4
मध्यप्रदेश के मंडला जिले को देश के पहले कार्यात्मक रूप से साक्षर जिले के रूप में घोषित किया गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
पुरुष साक्षरता में इंदौर 89.2 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर, जबलपुर 89.1 के साथ दूसरे, भोपाल 87.4 के साथ तीसरे, भिंड 87.2 के साथ चौथे और बालाघाट 87.1 के साथ पांचवें स्थान पर है। इसी तरह महिला साक्षरता में भोपाल 76.6 प्रतिशत के साथ पहले, जबलपुर 75.3 प्रतिशत के साथ दूसरे और इंदौर 74.9 के साथ तीसरे , बालाघाट 69.7 के साथ चौथे और 68.3 प्रतिशत के साथ ग्वालियर पांचवें स्थान पर बना है। प्रदेश के जिन जिलों में साक्षरता दर कम पाई गई है वहां पर शासन स्तर साक्षरता को दुरुस्त करने की दिशा में प्रयास जारी है।
मंडला जिला बना देश का पहला कार्यात्मक रूप से साक्षर जिला
मध्यप्रदेश के मंडला जिले को देश के पहले कार्यात्मक रूप से साक्षर जिले के रूप में घोषित किया गया है। मंडला जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के संकल्पों और प्रयासों और राज्य सरकार के निर्देशन में दो साल में आदिवासी मंडला जिले को देश के पहले आदिवासी साक्षर जिले का गौरव हासिल हुआ है। 2011 की जनजनगणना में मंडला जिले में साक्षरता 68 प्रतिशत थी। इसे देखते हुए वर्ष 2020 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर निरक्षरता से आजादी अभियान की प्रदेश में शुरुआत हुई, जिसमें महिला एव बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, आंगनवाड़ी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया और गांव की शिक्षित महिलाओं को अभियान में जोड़ा गया, इसके बाद अभियान में लोग जुड़ते गए और इस अभियान से सभी को साक्षर करने में मदद मिली। विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच आदिवासी इलाके में बसे मंडला जिले में यातायात, संचार और आवागमन सुलभ नहीं था। इसे देखते हुए स्कूलों में बच्चों के सहयोग से पठन पाठन शुरु हुआ। अब मंडला जिला के ग्रामीणों को बुनियादी अक्षर का ज्ञान है।
निरक्षरों को नई शिक्षा नीति के तहत वर्ष 2030 तक साक्षर किया जाएगा।
- फोटो : सोशल मीडिया
इन दिनों साक्षरता के साथ देश की तीसरी और नई शिक्षा नीति 2020 की चर्चा है। केन्द्र सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति जारी की और मध्यप्रदेश ने 26 अगस्त 2021 को इसे राज्य में लागू करने की घोषणा की। मध्यप्रदेश नई शिक्षा नीति लागू करने वाला कर्नाटक के बाद दूसरा राज्य है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में मार्गदर्शन और सुक्षाव देने के लिए राज्य स्तर पर टॉस्क फोर्स का गठन किया है। नई शिक्षा नीति के हर पहलू के क्रियान्वयन में योजना बनाकर रणनीतियां विकसित की गई हैं। इसमें 13 समिति बनाई गई हैं। इसके साथ ही मंडला की सफलता के बाद अब मध्यप्रदेश में एक बार फिर साक्षरता अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए शिवराज सरकार नवभारत साक्षरता कार्यक्रम संचालित करेगी। निरक्षरों को नई शिक्षा नीति के तहत वर्ष 2030 तक साक्षर किया जाएगा।