ए अल्लाह, हम गुनाहगार हैं, खतावार हैं, तेरे हुक्म से गाफिल हैं, तेरी राह से भटके हुए हैं, तेरे नाफरमान हैं... लेकिन जो हैं, जैसे हैं तेरे बंदे हैं, तेरी किताब के कायल हैं, तेरे पैगंबर की सीरत को मानने वाले हैं....! ए अल्लाह हम सभी पर रहम फरमा दे....!
पिछले तीन दिनों से ईंटखेड़ी में चल रहे 77वें आलमी तबलीगी इज्तिमा का समापन सोमवार सुबह इन दुआओं के साथ हुआ। मौलाना सआद साहब कांधालवी साहब ने यह दुआ कराई। दुआ ए खास के दौरान मौलाना सआद साहब ने पहले अरबी में दुआ की। इसके बाद मौजूद मजमे को जोड़ते हुए उर्दू में भी दुआओं का निजाम चला।
आयोजन स्थल से लेकर तीन किमी तक सड़क खेत और घरों में बैठे लोगों ने आमीन कहा। दुआ ए खास में शिरकत के लिए बड़ी तादाद में लोगों ने रात से ही इज्तिमागाह पहुंचना शुरू कर दिया था। कुछ लोगों ने अल सुबह इज्तिमागाह का रुख किया। सुबह से दुआ के लिए दौड़ ने शहर की अधिकांश सड़कों को वाहनों से भर दिया। हर शख्स इस मजमा ए खास में शामिल होने के लिए उतावला दिखाई दे रहा था। जिस दौरान मौलाना सआद साहब दुआ कर रहे थे, सारा मजमा पिन ड्रॉप साइलेंट की मुद्रा में दिखाई दे रहा था। दूर दूर तक सिर्फ मौलाना सआद की आवाज गूंज रही थी और बीच बीच में लोगों की आमीन की आवाज़ें इसमें शामिल हो रही थीं।
बढ़ाना पड़ा दुआ का वक्त
आलमी तबलीगी इज्तिमा के आखिरी दिन सोमवार को सुबह 9.30 बजे दुआ ए खास होने का ऐलान किया गया था। इस लिहाज से लोगों का इज्तिमागाह पहुंचने का सिलसिला भी अल सुबह से शुरू हो गया था। लेकिन काजी कैंप से लेकर नबी बाग तक जारी मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए लगाए गए बैरिकेड्स यातायात व्यवस्था की बाधा बन गए। तमाम इंतजाम के बाद भी करोंद चौराहा, इस्लामपुरा जोड़, मुबारकपुर ओवरब्रिज पर कई जगह जाम के हालात बन गए। इसको देखते हुए दुआ के तय समय में इजाफा किया गया। मौलाना सआद साहब ने अपना बयान पूरा करने के बाद दोपहर करीब 12.22 बजे दुआ ए खास की शुरुआत की। मजमे में मौजूद करीब 12 लाख से भी ज्यादा लोगों दुआ के साथ आमीन की सदाएं गुंजायमान की। खामोशी के दुआ ए खास और आमीन का सिलसिला करीब 22 मिनट तक जारी रहा। दोपहर करीब 12.44 बजे दुआ पूरी होने के बाद भोपाल मरकज के इकबाल हफीज ने जमातियों को वापसी का शेड्यूल समझाया।
शुरू हुआ रवानगी का सिलसिला
दुआ के बाद लोगों की रवानगी का सिलसिला शुरू हो गया। यहां से कुछ लोग अपने घरों को लौटे तो कुछ दीन सीखने के मकसद से चार माह और चालीस दिन की जमातों में निकले। 29 नवंबर को हुई शुरूआत के बाद सोमवार को इस मजहबी समागम का समापन हुआ। जिसमें करीब 12 लाख लोगों ने शिरकत की।