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Angry Shivraj: आखिर शिवराज को इतना गुस्सा क्यों आता है? पांच पॉइंट में जानें उनकी सक्रियता का राज

Fri, 20 May 2022 06:19 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बदले-बदले नजर आ रहे हैं। सुबह-सुबह 6:30 बजे मीटिंग बुला रहे हैं। मीटिंग में कलेक्टरों को हड़का रहे हैं। बार-बार बुलडोजर की बात कर रहे हैं।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सक्रियता चर्चा में है। - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को सुबह 6:30 बजे सीधी और भिंड के अधिकारियों की बैठक ली। उनसे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। लगे हाथ चेतावनी भी दे डाली कि गड़बड़ी मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह पहला मौका नहीं है, जब शिवराज इतनी सुबह सक्रिय दिखे हैं। एक हफ्ते में यह तीसरा मौका था। 

इससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने 23 मार्च को अफसरों को चेताया था कि सरकार हमारे हिसाब से चलेगी, जिसे दिक्कत है बता दें। हमें बदलने में देर नहीं लगेगी। 15 मई को गुना में पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद तो सुबह-सुबह आपात बैठक बुला ली। डीजीपी से कहा कि 'एक बार फील्ड अधिकारियों से बात कर लें, जो फील्ड में कुछ करके दिखा सके, वहीं रहेगा।' इसके कुछ ही दिन बाद भू अधिकार पत्र के वितरण के कार्यक्रम में बुरहानपुर कलेक्टर का नाम लेकर कहा कि 'जब मैं बोल रहा हूं, तो तुम्हें बोलने का अधिकार नहीं है।' पिछले तीन कार्यकालों में मुख्यमंत्री ने भावुक नेता के तौर पर पहचान बनाई थी। बच्चों के मामा कहलाए। अब विधानसभा चुनावों से एक साल पहले उनके व्यवहार में बदलाव साफ दिख रहा है। 
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शिवराज को अब बुलडोजर मामा के रूप में प्रचारित किया जाने लगा है। - फोटो : फाइल फोटो
1. शिवराज पर यूपी के बाबा का इफेक्ट 
शिवराज सिंह चौहान के व्यवहार में आए बदलावों को यूपी से भी जोड़ा जा रहा है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से ज्यादा प्रभावित लग रहे हैं, जो हाल ही में लगातार दूसरी बार निर्णायक बहुमत के साथ जीतकर सत्ता में लौटे हैं। जानकारों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान को यह समझ आ गया है कि छवि बदलनी होगी। यूपी में जिस तरह अधिकारियों और अपराधियों में योगी का खौफ है, शिवराज भी वैसा ही खौफ चाहते हैं। योगी की बुलडोजर बाबा की छवि ने उन्हें सत्ता में लौटने में मदद की। शिवराज भी पीछे नहीं रहे। अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलवाकर मामा बुलडोजर कहलाना पसंद कर रहे हैं। 

2. नगरीय निकाय चुनाव है अहम 
जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस स्टाइल से जनता भी खुश है। शिवराज जो बैठकें ले रहे हैं, उसका असर पंचायत और नगरीय निकाय के चुनावों में दिख सकता है। इन चुनावों की घोषणा जल्द ही होने वाली है। इन चुनावों को विधानसभा चुनावों का सेमी फाइनल माना जा रहा है। प्रदेश की 16 नगरीय निकायों पर भाजपा का कब्जा है। एक भी सीट भाजपा के हाथ से छिटकी तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सवाल उठेगा। फिर भाजपा ने कर्नाटक, उत्तराखंड, गुजरात, त्रिपुरा जैसे राज्यों में मुख्यमंत्री बदले हैं। इसे देखते हुए शिवराज चुनावों से पहले अपनी कुर्सी पर पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। 
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बीते दिनों पानी के लगी लाइन देखकर शिवराज ने अपना काफिसा रुकवा लिया था। - फोटो : फाइल फोटो
3. ब्यूरोक्रेसी पर पकड़ साबित करना है 
पिछले दिनों दिल्ली में संघ और संगठन के समन्वय की बैठक हुई। इसमें संघ के पदाधिकारियों को शिकायत थी कि मध्य प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी है। इससे सीधे-सीधे शिवराज की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े हो गए। अब मुख्यमंत्री अफसरशाही पर कसावट कर यह संदेश देना चाहते हैं कि प्रदेश में सिर्फ एक ही नेता है और वह है शिवराज सिंह चौहान। 

4. बदली छवि पर कांग्रेस उठा रही है सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद को बेहतर इवेंट मैनेजर के तौर पर दिखाना चाहते हैं, इस वजह से सुबह-सुबह बैठकें बुला रहे हैं। अगर 12 बजे भी अफसरों से बात करते तो क्या बिगड़ जाता? वह जनता को संदेश देना चाहते हैं कि मैं सुबह 6 बजे से आपकी सेवा में लग जाता हूं। हालांकि, यह संदेश सिर्फ राजनीतिक है और इसका भाजपा को अगले चुनावों में कोई फायदा नहीं होने वाला।  
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भाजपा का दावा- जनता के सच्चे सेवक हैं शिवराज - फोटो : अमर उजाला
5. भाजपा का दावा- जनता के सच्चे सेवक हैं शिवराज
भाजपा प्रवक्ता नेहा बग्गा कहती हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हमेशा जनता की भलाई के बारे में सोचते हैं। सांसद थे तो पांव-पांव वाले भैया कहलाए। लोगों की समस्याएं सुलझाने के लिए हमेशा कोशिश करते रहे। मुख्यमंत्री बने तो लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाएं लागू की। अपराधियों को कुचलने के निर्देश दिए। केंद्र और राज्य की योजनाओं का लाभ जनता को समय पर मिले, यह सुनिश्चित किया। इसमें क्या गलत करते हैं? कांग्रेस का तो काम ही है आरोप लगाना। उनके नेता कमलनाथ तो सिर्फ पॉलिटिकल टूरिज्म के लिए भोपाल आते हैं।
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