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योगी कैबिनेट विस्तार: जानिए उन चेहरों के बारे में जो चुनाव से एक साल पहले बनेंगे मंत्री, ये है भाजपा की रणनीति

सार

योगी कैबिनेट का आज विस्तार होने वाला है। यहां पढ़िये उन संभावित चेहरों के बारे में जो चुनाव के एक साल पहले मंत्री बनेंगे। भाजपा ने लगभग हर वर्ग को साधने की रणनीति पर काम किया है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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योगी कैबिनेट विस्तार - फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी
यूपी की योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लगने जा रहा है। आज होने वाले विस्तार में छह मंत्री शपथ ले सकते हैं। माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह विस्तार राजनीतिक संदेश देने वाला है।

भाजपा नेतृत्व इस विस्तार के जरिये पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक ओबीसी, दलित और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा है, उनमें भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, सपा से भाजपा में आए मनोज पांडेय, बसपा पृष्ठभूमि की पूजा पाल, अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर और दलित चेहरे के तौर पर फतेहपुर के खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान शामिल हैं।

आइए जानते हैं, उन चेहरों के बारे में जो मंत्रिमंडल में शामिल होने की रेस में सबसे आगे हैं। -
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योगी कैबिनेट विस्तार - फोटो : अमर उजाला

भूपेंद्र चौधरी: पश्चिम यूपी और जाट राजनीति का बड़ा चेहरा

भूपेंद्र सिंह चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद क्षेत्र से आते हैं। वह जाट समुदाय में भाजपा का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। वह प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं। साथ विधान परिषद सदस्य भी रह चुके हैं। योगी सरकार के पहले कार्यकाल में पंचायतीराज मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

लोकसभा चुनाव में पश्चिम यूपी में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद जाट समुदाय को दोबारा मजबूत संदेश देने की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट में वापसी को संतुलन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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योगी कैबिनेट विस्तार - फोटो : अमर उजाला

मनोज पांडेय: ब्राह्मण चेहरे के जरिये सपा में सेंध की रणनीति

मनोज पांडेय रायबरेली जिले की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं। वह सपा में बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में सक्रिय रहे हैं। अखिलेश यादव सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा से दूरी बनाई। भाजपा को खुलकर समर्थन दिया। इसके बाद से ही उनके मंत्री बनने की चर्चा तेज हो गई थी।

मनोज पांडेय को कैबिनेट में शामिल करना भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपना संदेश मजबूत करना चाहती है। रायबरेली और अमेठी जैसे परंपरागत गांधी परिवार के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी उनका असर माना जाता है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा मनोज पांडेय के जरिये सपा के पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में है।

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योगी कैबिनेट विस्तार - फोटो : अमर उजाला

पूजा पाल: पीडीए को साधने की कोशिश

पूजा पाल प्रयागराज की चर्चित नेता हैं। वह बसपा से राजनीति में उभरीं और बाद में सपा से भी जुड़ी रहीं। उनके पति राजू पाल की हत्या के बाद वह प्रदेश की राजनीति में बड़ा चेहरा बनकर उभरीं। राजू पाल हत्याकांड ने प्रयागराज की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया। उसी संघर्ष की पृष्ठभूमि से पूजा पाल ने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।

पूजा पाल को मंत्रिमंडल में जगह मिलना पिछड़ा वर्ग, खासकर पाल समाज को साधने की कोशिश माना जा रहा है। प्रयागराज और आसपास के इलाकों में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है। भाजपा लंबे समय से गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोट बैंक को अपने साथ जोड़े रखने की रणनीति पर काम कर रही है। पूजा पाल उसी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती हैं।
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योगी कैबिनेट विस्तार - फोटो : अमर उजाला

सुरेंद्र दिलेर: जाटव वोट बैंक पर भाजपा की नजर

सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ जिले की खैर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह मूल रूप से जाटव समाज से आते हैं। साथ ही राजनीतिक प्रष्ठभूमि वाले परिवार से आने वाले दलित नेता हैं। उनके दादा किशन लाल दिलेर हाथरस लोकसभा सीट से चार बार सांसद और छह बार विधायक रहे। उनके पिता स्व. रवीर सिंह दिलेर हाथरस सीट से बीजेपी के सांसद रहे। एक बार विधायक भी रहे। पश्चिमी यूपी में दलित राजनीति के लिहाज से उनका नाम काफी प्रभावशाली माना जाता है। भाजपा उन्हें लंबे समय से संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका देती रही है।

खैर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। सुरेंद्र दिलेर ने यहां भाजपा को मजबूत आधार दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। भाजपा उन्हें मंत्री बनाकर यह संदेश देगी, कि भाजपा सिर्फ गैर-जाटव दलितों ही नहीं, बल्कि जाटव समाज को भी महत्व देती है। 
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योगी कैबिनेट विस्तार - फोटो : अमर उजाला

कृष्णा पासवान: दलित प्रतिनिधित्व का दांव

कृष्णा पासवान का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में प्रमुखता से लिया जा रहा है। वह दलित समाज, विशेषकर पासवान समुदाय में प्रभाव रखने वाली नेता मानी जाती हैं। पूर्वांचल और मध्य यूपी में पासवान वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा उन्हें मंत्री बनाकर अहम जिम्मेदारी दे सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा 2027 से पहले हर उस सामाजिक समूह को प्रतिनिधित्व देना चाहती है, जहां विपक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। 
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योगी कैबिनेट विस्तार - फोटो : अमर उजाला

हंसराज विश्वकर्मा: पूर्वांचल में ओबीसी राजनीति का मजबूत चेहरा

हंसराज विश्वकर्मा वाराणसी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य हैं। वह भाजपा के प्रमुख ओबीसी नेताओं में गिने जाते हैं। विश्वकर्मा समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। खासकर पूर्वांचल के वाराणसी, चंदौली, भदोही और आसपास के जिलों में उनका प्रभाव देखा जाता है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने वाले हंसराज विश्वकर्मा को जमीनी नेता माना जाता है। 

भाजपा के गैर-यादव पिछड़ा वर्ग को अपने साथ मजबूती से जोड़ने की रणनीति का हिस्सा हंसराज विश्वकर्मा भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से आने के कारण उनका राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। उन्हें मंत्रिमंडल में जगह देकर भाजपा पूर्वांचल के ओबीसी वर्ग, विशेषकर विश्वकर्मा समुदाय को बड़ा राजनीतिक संदेश देगी। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि संगठन के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को महत्व दिया जा रहा है।
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