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नौजवानों! दूसरा मुंतशिर न बनो, खुद में कुछ अलग तलाशो, मैंने कभी मजरूह या साहिर बनने की कोशिश नहीं की

Sat, 27 Feb 2021 04:15 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मनोज मुंतशिर - फोटो : amar ujala
प्यासो रहो न दश्त में बारिश के मुंतजिर, मारो जमीं पर पांव कि पानी निकल पड़े...। लखनऊ के हुनरमंद युवाओं के लिए इकबाल साजिद की इन पंक्तियों के रूप में लगन और मेहनत का संदेश लेकर राजधानी लखनऊ पहुंचे जाने-माने गीतकार, पटकथा लेखक मनोज मुंतशिर। उन्होंने युवाओं से कहा, खुद की नई पहचान बनाएं। उन्होंने कहा कि हमें नए और पुराने को साथ लेकर चलना होगा। अपने काम की मार्केटिंग खुद करनी होगी।

गोमतीनगर के विकल्पखंड स्थित श्री राम ग्लोबल स्कूल में म्यूजिक रूम की शुरुआत करते हुए मीडिया से मुखातिब मनोज के व्यक्तित्व के कई रूप सामने आए। अमर उजाला से बातचीत में उनका फोकस लखनऊ की युवा प्रतिभाओं पर रहा।
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- फोटो : amar ujala
मैंने कभी मजरूह या साहिर बनने की कोशिश नहीं की
युवाओं से मैं कहना चाहता हूं कि मुंतशिर बनने की कोशिश न करें। मैंने कभी मजरूह या साहिर बनने की कोशिश नहीं की या किसी के जैसा बनना नहीं चाहा। वे लोग बहुत ही बड़े लोग हैं, मैं उनके जैसा बन भी नहीं सकता। दूसरे किसी की कॉपी क्यों बन कर रह जाना। हां, इतना जरूर सोचा कि कुछ तो बात मेरे अंदर भी रही होगी। कुछ तो इस मिट्टी ने मुझे भी दिया होगा और कुछ तो इसकी खुशबू मुझमें भी होगी, मेरी पहली तलाश यही थी। मैं कहूंगा कि खुद से पूछिए कि आपके पास ऐसा क्या है, जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलता। फिर उस पर मेहनत करें और दुनिया पर छा जाएं।
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- फोटो : amar ujala
युवाओं को आगे बढ़ाने वाला चाहिए
नया और पुराना जब तक एक साथ नहीं चलेगा, हम कमजोर ही रहेंगे। जब मैं दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त, जॉन एलिया, मजरूह सुल्तानपुरी, फिराक गोरखपुरी या फिर सुमित्रानंदन पंत की बात करता हूं तो मुझे लखनऊ की चाय की दुकान पर बैठे नौजवान भी नजर आते हैं, जिनमें बहुत कुछ करने की क्षमता है। दुख है तो इस बात का कि उनके सिर पर हाथ रख कर उन्हें आगे ले जाने वाला कोई नहीं। इसीलिए न्यू इंक पोएट्री शुरू की और नतीजा यह रहा कि नया हुनर सामने आ रहा है। बड़े-बड़े मंचों पर कविताएं लिख रहे हैं, कुछ तो फिल्मों में गीत लिख रहे हैं।

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- फोटो : amar ujala
अपने काम की मार्केटिंग खुद करें
आपने जो लिखा, जो काम किया, बात वहीं खत्म नहीं हुई। बल्कि बात वहां से शुरू होती है। कोई पैगंबर या अवतार नहीं आएगा आपके काम को बताने के लिए। अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग खुद ही करनी पड़ती है, मेहनत आपको करनी पड़ेगी। अपने हुनर को निखारने के साथ-साथ उसे दुनिया को दिखाने के लिए भी।

लखनऊ से जुड़ाव को यूं किया बयां
लखनऊ वह जमीन है जहां बचपन में मैंने घुटनों के बल चल कर खड़े होना सीखा है। यहां आकर मुझे अपनी मिट्टी से जुड़े रहने का अहसास होता है। यहां आकर मैं बचपन की और लौट आता हूं।
 
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- फोटो : SELF
राहुल गांधी के केरल में दिए बयान पर कहा-
मैं हिन्दुस्तान के बारे में एक बात कहना चाहूंगा कि ये काटे से नहीं कटता, बांटे से नहीं बंटता। नदी के पानी के सामने आरी कटारी क्या। बोलते रहें, पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण सब एक है। दस हजार साल में बड़े-बड़े आए और चले गए। मुझे किसी के चार बयानों से कोई फर्क नहीं पड़ता। हिन्दुस्तान को कोई बांट नहीं सकता, बस यह जानता हूं मैं।
 
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आगामी प्रजोक्ट के बारे में बोले-
आदि पुरुष लिख रहा हूं। बचपन में रामायण देखा करते थे, आज इसे लिखने के लिए कलम मेरे हाथ में हैं। 400 करोड़ रुपये के बजट की यह फिल्म है। प्रभाष राम और कृति सेनन सीता बनी हैं। इंतजार करें, विश्व पटल पर छाप छोड़ेगी यह फिल्म।
 
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यूपी में फिल्म सिटी को लेकर असमंजस किया दूर
एक सवाल के जवाब में मनोज मुंतशिर ने कहा कि ये न समझें कि काम नहीं हो रहा। यूपी में फिल्म सिटी की घोषणा पर बरात लेकर मैं ही आया था। फिल्म सिटी इस तरह से शुरू करने की कोशिश है कि एक बार काम शुरू हो जाए तो ठप न हो। थोड़ा इंतजार कीजिए।
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