चंडीगढ़ में आईएएस की बेटी से छेड़छाड़ मामले के बाद महिलाओं को रात में घरों से न निकलने देने की सलाह देने वालों को लखनऊ की बेटियों ने करारा जवाब दिया। वो शनिवार को शहर के 1090 चौराहे पर इकट्ठा हुईं और 'मेरी सड़क' नाम के अनूठे कैंपेन में हिस्सा लेकर कहा, ये दिन भी मेरी, ये रात भी मेरी, ये शहर भी मेरा, ये देश भी मेरा, जितना हक तेरा, उतना हक मेरा...।
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कैंपेन में उन्होंने सवाल उठाए कि आखिर बार-बार और हर बार क्यों शिकार होती है लड़की? आरोपी तो बाद में गिरफ्तार होता है, पर उससे पहले ही समाज पीड़िता को कठघरे में खड़ा कर देता है...ऐसा क्यों?
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इस अनूठे कैंपेन का नेतृत्व गीता प्रभा सिंह ने किया। गीता सिंह ने इस कैंपेन के बारे में कहा कि चाहे वर्णिका कुंडु का मामला हो या फिर बलिया में इंटर की छात्रा के साथ जो कुछ हुआ हो या फिर इससे पहले की घटनाएं, हर बार या तो लड़की से सवाल होते हैं या फिर लड़की ही दोषी ठहरा दी जाती है। हमने ऑनलाइन मुहिम शुरू की और लोगों को जोड़ने की कोशिश की है।
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कैंपेन में सामाजिक कार्यकर्ताओं व अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं ने हिस्सा लिया।