बुद्धिजीवी महिलाएं बोलीं- लोगों को ‘बदलाव’ के प्रति सहज बनाना होगा
नवयुग डिग्री कॉलेज की प्रिंसिपल और मनोवैज्ञानिक डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव ने इस मौके पर कहा, आमतौर पर ‘उन पांच दिनों’ में भावनात्मक तौर पर कई बदलाव आते हैं। चिड़चिड़ापन, उद्विग्नता जैसे भाव आते-जाते हैं। चूंकि लोग इन बातों को समझते नहीं, जानते नहीं, इसलिए वह बच्चियों के इस व्यवहार को अशिष्टता या उद्दंडता करार देने लगते हैं। हमें लोगों को इस सोच के प्रति जागरूक करना होगा।
प्रसिद्ध पेपर ज्वैलरी डिजाइनर वर्षा श्रीवास्तव ने सवाल उठाया-लड़कियों में होने वाले इस प्राकृतिक बदलाव पर शर्म कैसी? विज्ञान फाउंडेशन की अर्चना पांडेय ने कहा कि जरूरी नहीं कि जो कल तक नहीं बताया गया बच्चियों को आज भी नहीं बताया जाए। यह हर लड़की और महिला की सेहत का मुद्दा है। केजीएमयू की पूर्व सीनियर नर्सिंग सुपरिटेंडेंट शशिबाला सिंह ने महिलाओं के माहवारी संबंधी सवालों का जवाब दिया।