पूजा हत्याकांड में साजिशों की कई परतें हैं, कई चेहरे हैं। सबकुछ फिल्मी पटकथा जैसा। कंचनपुर मटियारी निवासी अभिषेक और अयोध्या की पूजा की शादी का रजिस्ट्रेशन होने के 47वें दिन ही पूजा को मौत के घाट उतार दिया गया। पुलिस ने जो दस्तावेज जुटाए हैं, उससे साफ है कि कब क्या करना है, यह सब कुछ स्क्रिप्टेड था। जो-जो तय किया गया था, वह सब हासिल होते ही पूजा की जिंदगी की कहानी का 'द एंड' लिख दिया गया।
पूजा की हत्या की साजिशों के तार बेहद महीन बुने गए थे। पुलिस के मुताबिक पूजा के नाम पर एक्सीडेंटल बीमा 23 नवंबर 2022 को कराया गया। शादी का रजिस्ट्रेशन 2 जनवरी 2023 को हुआ। 17 फरवरी 2023 को कार से कुचलवा कर उसकी हत्या कर दी गई।
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शादी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट
- फोटो : अमर उजाला
बीमा कराने की तारीख से लेकर 17 फरवरी के बीच में पूजा के नाम पर चार कारें, दो दोपहिया वाहन, दस लाख का मुद्रा लोन और 50 लाख का एक्सीडेंटल बीमा करा दिया गया। दुर्घटना बीमा के लिए 13,358 रुपये का वन टाइम पेमेंट किया गया था। पुलिस ने जो दस्तावेज जुटाए हैं, उससे पता चलता है कि पूजा के पति अभिषेक ने कई जाली दस्तावेज बनवाए थे। उन दस्तावेज का इस्तेमाल शादी का रजिस्ट्रेशन कराने में किया गया।
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मृतक पूजा यादव का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
साजिश का आखिरी अध्याय
पूजा यादव के शव का पोस्टमार्टम घटना के दिन ही हो गया था। किसी को शक न हो, इसके लिए शातिरों ने इसकी भी साजिश रच रखी थी। मौत के तीन महीने बाद 20 मई 2023 को एफआईआर दर्ज कराई गई। यह सब इसलिए ताकि तमाम सुबूत खत्म हो जाएं।
सारे सुबूत खत्म हो जाएं, इसलिए पूजा की मौत के तीन महीने बाद दर्ज कराया मुकदमा
अज्ञात पर दर्ज कराया था केस
हादसे की रिपोर्ट दर्ज कराने में भी खेल किया गया। पहले अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। फिर अचानक से कार का ड्राइवर बन दीपक वर्मा पहुंचा। दावा किया गया कि कार वही चला रहा था। उसी से हादसा हुआ। जबकि प्रतापगढ़ निवासी अभिषेक शुक्ला ने कार से पूजा को टक्कर मारी थी। अभिषेक एक बाइक शोरूम में काम करता है। वहीं पर उसकी मुलाकात इस पूरी पटकथा के मास्टरमाइंड कुलदीप से हुई थी। कुलदीप रियल एस्टेट कारोबारी है। उसी ने पूजा के पति अभिषेक के साथ मिलकर साजिशें रचीं।
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आरोपी कुलदीप सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पति की जगह कुलदीप का चेहरा और हस्ताक्षर का इस्तेमाल पुलिस के मुताबिक, पूजा के बैंक खातों का इस्तेमाल कुलदीप ही कर रहा था। उसी ने बीमा कराया था। कागजी कार्रवाई भी वही पूरा कर रहा था। हस्ताक्षर भी खुद ही कर रहा था। पूजा के पति अभिषेक का सिर्फ नाम इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकतर कारें कुलदीप ने अपने पास ही रखी हुई थीं। कार चोरी भी हुई और बाराबंकी में बरामद हुई। अभी भी कार रिलीज नहीं हो सकी है। पूजा के नाम पर जो मुद्रा लोन लिया था उससे एक सैलून भी खोला था। इसे भी कुलदीप ही चला रहा था।
आरोपियों की तलाश में दबिश
मामले में पूजा का पति अभिषेक, ससुर राम मिलन व अभिषेक शुक्ला भागे हुए हैं। पुलिस लखनऊ और बाराबंकी में कई जगहों पर दबिश दी। कोई हाथ नहीं आया। डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह का कहना है कि चार टीमें इनकी तलाश में जुटी हैं। पूजा के माता पिता या अन्य परिवार किसी भी सदस्य के बारे में पुलिस को जानकारी नहीं हो सकी है।