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Rajyasabha Election: कपिल सिब्बल के सहारे आखिर क्या है अखिलेश यादव का प्लान? 2024 पर नजर तो है ही लेकिन और...

Thu, 26 May 2022 12:27 AM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
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कपिल सिब्बल ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। - फोटो : amar ujala
सपा मुखिया अखिलेश यादव का देश के प्रमुख वकील और कांग्रेस के असंतुष्ट नेता कपिल सिब्बल को समर्थन देकर राज्यसभा भेजने का फैसला देखने में जितना सामान्य है उतना है नहीं। घटनाक्रम पर नजर डालें और परिस्थितियों व समीकरणों का विश्लेषण करें तो इसकी वजह सिर्फ पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की नाराजगी दूर करने तक ही सीमित नहीं है। असल में बड़ी वजह 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय राजनीति में सपा के प्रभावी पैरोकार की जरूरत पूरी करने की नजर आ रही है। इसका संकेत अखिलेश एवं सिब्बल की बातों से मिला भी है।

दरअसल, मुलायम सिंह यादव की बढ़ती उम्र व स्वास्थ्य तथा खुद की यूपी में सक्रिय मौजूदगी की मजबूरी के चलते अखिलेश के लिए दिल्ली की सियासत में अपने लिए किसी ऐसे प्रभावी पैरोकार की जरूरत थी, जिसका न सिर्फ दिल्ली के महत्वपूर्ण स्थानों पर बैठना हो बल्कि सक्रिय और दूसरे राज्यों के प्रमुख दलों के नेताओं से भी संपर्क व संवाद हो। इसके लिए अखिलेश के लिए इस समय सिब्बल से उपयुक्त कोई दूसरा नहीं हो सकता था। कारण, एक तो कपिल सिब्बल कांग्रेस के उन प्रमुख असंतुष्टों के नेताओं में रहे हैं जो बीते डेढ़-दो साल से नेहरू परिवार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में वह 2024 के मद्देनजर न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि यूपी में भी कुछ प्रमुख कांग्रेसी चेहरों को सपा में लाने या उनके एवं अखिलेश के बीच कोई नया गठजोड़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं ।
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- फोटो : amar ujala
आजम के अलावा भी हैं वजहें
अखिलेश ने सिब्बल को सपा के समर्थन से राज्यसभा भेजने का फैसला कर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के तेवरों को भी ठंडा करने की कोशिश की है। पर, इसके अलावा भी कुछ कारण हैं। सिब्बल वह शख्स हैं जो राज्यसभा में तो मोदी सरकार को घेरते ही रहे हैं, उससे ज्यादा उनकी सक्रियता केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी में दिखी है। जाहिर है कि यूपी के सियासी समीकरणों एवं सपा की राजनीतिक जरूरतों के लिहाज से सिब्बल का यह अंदाज फिट बैठता हैं। इससे सपा न सिर्फ यूपी बल्कि देश के अन्य स्थानों पर भी सिब्बल के सहारे मुस्लिमों को संदेश देने की कोशिश तो कर ही सकती है। सफलता और असफलता अपनी जगह है। साफ है कि सपा जल्द 2024 के मद्देनजर राष्ट्रीय स्तर पर किसी नए मोर्चे का तानाबाना बुनने की कोशिश जरूर करेगी।
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नामांकन के समय कपिल सिब्बल के साथ उनकी पत्नी भी मौजूद थीं। - फोटो : amar ujala
इनसे भी मिल रहा संकेत
अखिलेश और कपिल सिब्बल की बातों से बुधवार को संदेश मिल गया। सिब्बल ने कहा, ‘2024 को लेकर एक साथ आ रहे हैं । केंद्र की कमियों को उजागर करेंगे। मैं समझता हूं जब एक निर्दलीय कोई बात कहेगा तो लोगों को लगेगा कि ये किसी पार्टी से जुड़ा नहीं है । विपक्ष में रहकर हम एक गठबंधन बनाना चाहते हैं जो मोदी सरकार का विरोध करें। हम चाहते हैं कि 2024 में एक ऐसा माहौल बने कि सब लोग मिलकर मोदी सरकार की खामियां जनता तक पहुंचाएं। हम इसका प्रयास करेंगे ।’

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कपिल सिब्बल ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। - फोटो : amar ujala
उधर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा, ‘आज देश किस रास्ते पर है। महंगाई रुक नहीं रही। कानून-व्यवस्था ध्वस्त है। सीमाएं असुरक्षित हैं। चीन लगातार हमारी सीमाओं में अंदर आ रहा है। सिब्बल जी इन सब सवालों पर अपने और समाजवादी विचारों को राज्यसभा में रखेंगे।’ अखिलेश का प्रयास कितना सफल होगा या नहीं, यह तो आगे पता चलेगा।
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- फोटो : amar ujala
दिख रहे राजनीतिक निहितार्थ
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल कहते हैं कि अखिलेश को पता है कि आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री रह चुकने के बावजूद भी उनका अभी ऐसा कद नहीं है जो दिल्ली में खुद को केंद्र में रखकर भाजपा के खिलाफ किसी मोर्चे का गठन कर सके। इसीलिए उन्होंने सिब्बल के सहारे अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने की कोशिश की है। ताज्जुब नहीं कि लोकसभा चुनाव से पहले हाल ही में होने वाले राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनाव के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोधी मोर्चे की संभावनाओं पर काम शुरू होता दिखने लगे। यह अलग बात है कि मोदी और भाजपा विरोधी नेताओं की महत्वाकांक्षा इन्हें कितना आगे ले जाती है।
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