सपा मुखिया अखिलेश यादव का देश के प्रमुख वकील और कांग्रेस के असंतुष्ट नेता कपिल सिब्बल को समर्थन देकर राज्यसभा भेजने का फैसला देखने में जितना सामान्य है उतना है नहीं। घटनाक्रम पर नजर डालें और परिस्थितियों व समीकरणों का विश्लेषण करें तो इसकी वजह सिर्फ पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की नाराजगी दूर करने तक ही सीमित नहीं है। असल में बड़ी वजह 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय राजनीति में सपा के प्रभावी पैरोकार की जरूरत पूरी करने की नजर आ रही है। इसका संकेत अखिलेश एवं सिब्बल की बातों से मिला भी है।
दरअसल, मुलायम सिंह यादव की बढ़ती उम्र व स्वास्थ्य तथा खुद की यूपी में सक्रिय मौजूदगी की मजबूरी के चलते अखिलेश के लिए दिल्ली की सियासत में अपने लिए किसी ऐसे प्रभावी पैरोकार की जरूरत थी, जिसका न सिर्फ दिल्ली के महत्वपूर्ण स्थानों पर बैठना हो बल्कि सक्रिय और दूसरे राज्यों के प्रमुख दलों के नेताओं से भी संपर्क व संवाद हो। इसके लिए अखिलेश के लिए इस समय सिब्बल से उपयुक्त कोई दूसरा नहीं हो सकता था। कारण, एक तो कपिल सिब्बल कांग्रेस के उन प्रमुख असंतुष्टों के नेताओं में रहे हैं जो बीते डेढ़-दो साल से नेहरू परिवार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में वह 2024 के मद्देनजर न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि यूपी में भी कुछ प्रमुख कांग्रेसी चेहरों को सपा में लाने या उनके एवं अखिलेश के बीच कोई नया गठजोड़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं ।