अनुप्रिया पटेल के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होते ही अपना दल में चल रहा ‘तेरा दल-मेरा दल’ का झगड़ा फिर सुर्खियों में आ गया है। मां कृष्णा पटेल ने अनुप्रिया के अपना दल में न होने की बात कहते हुए भाजपा के फैसले का विरोध किया है।
वह कहती हैं कि अनुप्रिया को मंत्री बनाने का मतलब अपना दल को भागीदारी देना नहीं है। भाजपा ने गठबंधन धर्म तोड़ा है। उधर, अनुप्रिया का कहना है कि वह दल की निर्वाचित अध्यक्ष हैं। जो विवाद है, वह कोर्ट में लंबित है।
इसलिए कोर्ट के फैसले के बाद ही उनके अलावा किसी को अपना दल का अध्यक्ष कहने का अधिकार होगा। फिलहाल, भाजपा कृष्णा पटेल के विरोध को बहुत तवज्जो देने के मूड में नहीं है।
दरअसल, कृष्णा पटेल भले ही अनुप्रिया को मंत्री बनाने का विरोध कर रही हों लेकिन भाजपा अच्छी तरह जानती है कि अनुप्रिया के जरिये वह उनके पिता स्व. सोनेलाल पटेल की कुर्मियों में पकड़ व पैठ का जितना लाभ ले सकती है, उतना किसी दूसरे से नहीं।
पटेल कुर्मियों के बड़े नेता थे। तभी कानपुर का होने के बावजूद उन्हें पूर्वांचल के कुर्मियों के बीच भी काफी महत्व मिला। अनुप्रिया के बारे में कृष्णा पटेल या कोई और कुछ भी कहे, भाजपा अपना फैसला बदलने वाली नहीं।
...इसलिए भाजपा ने अनुप्रिया को ही चुना
अपना दल के दूसरे सांसद हरिवंश सिंह क्षत्रिय हैं लेकिन दल के आधार वोट कुर्मियों के बीच उनकी अनुप्रिया जितनी स्वीकृति नहीं है। इसलिए भाजपा अगर हरिवंश को मंत्री बना भी देती तो उसे कोई लाभ नहीं था। इसीलिए उसने अनुप्रिया को मंत्रिमंडल में लिया।
उसे पता है कि पिता के निधन के बाद राजनीति में उतरी अनुप्रिया जितनी पहचान कुर्मियों के बीच किसी की नहीं है। इसीलिए यह जानते हुए भी कि अनुप्रिया को मंत्री बनाने से कृष्णा पटेल और अनुप्रिया विरोधी गुट भाजपा के विरोध में उतर सकता है, उसने अनुप्रिया को मंत्री बनाया।
2014 में हुआ था गठबंधन
अपना दल का भाजपा से पिछले लोकसभा चुनाव में गठबंधन हुआ था। चुनाव बाद परिवार में कलह शुरू हो गई। अनुप्रिया की मां और अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया।
खींचतान को इसी से समझा जा सकता है कि दोनों तरफ से गुरुवार को लखनऊ में बैठक बुलाई गई है। दोनों एक-दूसरे की बैठक को असंवैधानिक बता रहे हैं। दल के असली अध्यक्ष का मामला कोर्ट में है। 20 जुलाई को फैसला आने की उम्मीद है।
कृष्णा पटेल के वार
कृष्णा पटेल, तस्वीर में सबसे दायें।
- फोटो : amar ujala
-अनुप्रिया के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। वह अपना दल में नहीं हैं।
-पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते भाजपा से गठबंधन हमने किया था। इसलिए हमसे बात होनी चाहिए थी।
-हमारे हस्ताक्षर से अनुप्रिया को अपना दल का उम्मीदवार घोषित किया गया था। इसलिए कोई एक सांसद दल के बारे में कैसे फैसला कर सकता है।
-वाराणसी में राष्ट्रीय कार्यसमिति में हमें विधिवत अध्यक्ष चुना गया था। अनुप्रिया को अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया सिर्फ कागजी है।
अनुप्रिया का पलटवार
-मैं विधिवत निर्वाचित अध्यक्ष हूं। कोई दूसरा कैसे मुझे बाहर कर सकता है। पार्टी संविधान के मुताबिक जो राष्ट्रीय अध्यक्ष होगा वही फैसला करेगा।
-पार्टी में उपाध्यक्ष पद ही नहीं है। पर, कुछ लोगों के उकसावे पर मां कृष्णा पटेल ने पल्लवी पटेल को संविधान के विरुद्ध उपाध्यक्ष बनाकर विवाद खड़ा किया।
-जिस बैठक में मुझे अध्यक्ष चुना गया। उसकी विधिवत प्रक्रिया और सभी अभिलेख चुनाव आयोग को भेजे गए।
-मां कृष्णा पटेल जिस चुनाव की बात कह रही हैं वह फर्जी है। कुछ लोग विवाद खड़ा करके पिता का मिशन बर्बाद करना चाहते हैं। मैं ऐसा नहीं होने दूंगी।