राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर में एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के आरोपी सिपाही संदीप को जांच में क्लीनचिट देने संबंधी एसआईटी की रिपोर्ट को कोर्ट ने खारिज कर दी है। एडीजे संजय शंकर पांडेय की कोर्ट ने संदीप को विवेक की हत्या का आरोपी मानते हुए 22 मार्च तक आत्मसमर्पण के आदेश दिए हैं। एसआईटी ने अपनी जांच में सिपाही प्रशांत चौधरी को विवेक की हत्या और संदीप को सिर्फ मारपीट का आरोपी बनाया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर संदीप को जेल से रिहा किया गया था। विवेक की पत्नी कल्पना ने एसआईटी की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी, जिसकी सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया गया।
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prashant and his wife vivek tiwari murder
- फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने आदेश में कहा कि घटना की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान से पता चलता है कि संदीप और प्रशांत गुस्से में चिल्लाते हुए गलत दिशा से आए। संदीप ने विवेक की कार के बोनट पर डंडा मारा। इसके बाद इसी डंडे से कार में बैठी विवेक की पूर्व सहकर्मी को मारा। विवेचना में एकत्र सबूतों से पता चलता है कि संदीप ने विवेक की हत्या को आसान बनाने के लिए प्रशांत की सामान्य आशय से सहायता की। वहीं, संदीप के इस कृत्य के परिणाम में हुई विवेक की हत्या के वक्त वह घटनास्थल पर ही था, लिहाजा उसके खिलाफ हत्या का मामला चलाने का पर्याप्त आधार है।
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scene recreation of vivek tiwari murder case
- फोटो : amar ujala
कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एसएसपी के आदेश पर हत्याकांड की विवेचना महानगर थाने के प्रभारी निरीक्षक को सौंप दी गई। लेकिन जब यह स्पष्ट नहीं हुआ कि घटना गोमतीनगर थाना क्षेत्र की थी तो विवेचना अन्य थाने से क्यों कराई गई। कोर्ट ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि एसएसपी को रिपोर्ट दर्ज होते ही इस बात की जानकारी हो गई थी कि इस हत्याकांड में गोमतीनगर थाने के सिपाही ही शामिल हैं। कोर्ट ने पुलिस पर अंगुली उठाते हुए कहा कि आरोपियों के नाम व पहचान स्पष्ट होने पर भी हत्याकांड के कई घंटे बाद आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दोनों हत्याकांड के बाद पुलिस के साथ ही थे। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के बाद भी अज्ञात पुलिसकर्मी ही बताती रही।
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विवेक तिवारी मर्डर केस
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
विवेक तिवारी हत्याकांड में एडीजे संजय शंकर पांडेय की कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा है कि एसएसपी के आदेश पर हत्याकांड की विवेचना महानगर थाने के प्रभारी निरीक्षक को सौंप दी गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि घटना गोमतीनगर थानाक्षेत्र की थी तो विवेचना अन्य थाने से क्यों कराई गई। कोर्ट ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि एसएसपी को रिपोर्ट दर्ज होते ही इस बात की जानकारी हो गई थी कि इस हत्याकांड में गोमतीनगर थाने के सिपाही ही शामिल हैं। कोर्ट ने पुलिस पर अंगुली उठाते हुए कहा कि आरोपियों के नाम व पहचान स्पष्ट होने पर भी हत्याकांड के कई घंटे बाद आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दोनों हत्याकांड के बाद पुलिस के साथ ही थे। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के बाद भी अज्ञात पुलिसकर्मी ही बताती रही।
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विवेक तिवारी
- फोटो : amar ujala
प्रशांत चौधरी के खिलाफ सबूतों को माना पर्याप्त
कोर्ट ने जेल में बंद हत्याकांड के मुख्य आरोपी बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी के खिलाफ एकत्र सबूतों को पर्याप्त माना है। कोर्ट ने कहा विवेचक ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या के मामले में ही विवेचना की, लेकिन आखिरी पर्चे में केवल प्रशांत को ही हत्या का आरोप माना और संदीप को मारपीट का। विवेचक ने निष्कर्ष निकाला कि प्रशांत को कोई जीवन का भय नहीं था, वहीं एसएफएल की रिपोर्ट भी बताती है कि बाइक में एसयूवी से सीधे और तेज टक्कर नहीं मारी गई थी। प्रशांत ने जिस एंगल से गोली चलाई, उससे स्पष्ट है कि उसने विवेक को निशाना लेकर जानबूझकर गोली चलाई थी।
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विवेक तिवारी
- फोटो : amar ujala
यह था मामला
एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर (नार्थ) व न्यू हैदराबाद निवासी विवेक तिवारी व उनकी पूर्व सहकर्मी 28/29 सितंबर 2018 की रात डेढ़ बजे गोमतीनगर विस्तार में सरयू अपार्टमेंट के पास एसयूवी में बैठे थे। तभी बाइक सवार सिपाही प्रशांत चौधरी व संदीप कुमार वहां पहुंचे। सिपाहियों का कहना था कि विवेक को कार से उतरने के लिए कहा गया तो उसने बाइक में टक्कर मार दी। सिपाही प्रशांत ने पिस्टल तानकर चेतावनी दी तो उसे कुचलने का प्रयास किया। इस दौरान सिपाही ने गोली चला दी, जो कार की विंड स्क्रीन तोड़ती हुई विवेक की ठोड़ी में लगी।
विवेक वहां से कार लेकर भागे और कुछ दूर अंडरपास के खंभे से टकरा गए। सूचना पाकर आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां मौत हो गई। पूर्व सहकर्मी की तरफ से गोमतीनगर थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद सिपाही प्रशांत व संदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। दोनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। एसआईटी ने अपनी जांच में प्रशांत को हत्या और संदीप को मारपीट का आरोपी बनाया था। चार्जशीट दाखिल होते ही संदीप को जमानत मिल गई और वह जेल से बाहर आ गया था।