फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रावण ने पहले मां सीता को दिया लालच और फिर दिखाया असली रूप, भावपूर्ण मंचन से आनंदित हुए दर्शक, तस्वीरें

Sun, 18 Oct 2020 03:13 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
विज्ञापन
1 of 9
- फोटो : amar ujala
अयोध्या के सरयू तट स्थित लक्ष्मण किला परिसर में नौ दिवसीय रामलीला का आगाज हो गया है। पहले दिन फिल्मी सितारों ने शिव-पार्वती समेत कई अन्य प्रसंगों का मंचन किया।

अहंकारी रावण मां सीता को रिझाने के लिए अशोक वाटिका में पहुंचा लेकिन खुद को कामयाब होता न देख उन पर हमला करने के लिए आगे बढ़ा। रावण ने सीता के सामने अपने बल और वीरता का परिचय दिया लेकिन सीता के मुंह से भगवान श्रीराम की वीरता का वर्णन सुनकर अपमानित हो गया और फिर सीता को धमकी देने लगा।
विज्ञापन

2 of 9
- फोटो : amar ujala
मां सीता पर उसकी बातों का कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने रावण से कहा कि अगर तू मुक्ति चाहता है तो श्रीराम के चरण पकड़ ले... तेरे सारे पाप धुल जाएंगे। इतना सुनते ही रावण तिलमिला गया और मां सीता पर हमला करने के लिए आगे बढ़ गया।
विज्ञापन

3 of 9
- फोटो : amar ujala
रामलीला में रावण का किरदार अभिनेता शहबाज खान निभा रहे हैं। उन्होंने अपने अभिनय और संवाद अदायगी से अपनी भूमिका में जान फूंक दी।

4 of 9
- फोटो : amar ujala
रामलीला के एक दृश्य में रावण के रूप में अभिनेता शहबाज खान।
विज्ञापन

5 of 9
- फोटो : amar ujala
अशोक वाटिका का एक दृश्य।
विज्ञापन

6 of 9
- फोटो : amar ujala
रामलीला के पहले दिन फिल्मी सितारों ने शिव-पार्वती समेत कई अन्य प्रसंगों का मंचन किया। कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती एक दूसरे से वार्ता कर रहे होते हैं। कैलाश पर्वत की तरह सजा मंच भव्यता का पर्याय लग रहा था। पार्वती जी शिवजी से कहती हैं आपकी महिमा तीनों लोको में प्रसिद्ध है। यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं और मुझे सच्ची दासी मानते हैं तो हे प्रभु! श्री रघुनाथ जी की नाना प्रकार की कथा कहकर मेरा अज्ञान दूर कीजिए।

 
विज्ञापन

7 of 9
- फोटो : amar ujala
पार्वती जी के आग्रह पर शिव मुदित होते हैं और कहते हैं तुम्हारे समान उपकारी कोई नहीं है। तुम राम जी का प्रसंग पूछकर सब लोको को पवित्र कर देने वाली गंगा के समान रामकथा का हेतु बनी हो। इस तरह शिव पार्वती संवाद के साथ मंच पर धीरे-धीरे रामकथा की भाव भूमि तैयार होनी शुरू हुई। वे माता पार्वती को रामजन्म का हेतु बताते हुए कहते हैं कि जब जब होई धरम कै हानि। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी।। तब तब प्रभु धरि विविध शरीरा। हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा...।

हे पार्वती जब-जब धर्म की हानि होती है और नीच, अभिमानी असुर बढ़ जाते हैं तब कृपानिधि श्री हरि अनेक प्रकार का शरीर धारण कर भक्तों की पीड़ा हरते हैं।

8 of 9
नारद मुनि के रूप में असरानी। - फोटो : amar ujala
एक अन्य दृश्य में नारद प्रकट होते हैं। नारद की भूमिका में बॉलीवुड के प्रख्यात हास्य कलाकार असरानी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ते हैं। नारद मनोहारी पर्वतीय क्षेत्र में आनंदित होते हैं और कुछ ही देर में उनकी समाधि लग जाती है।
विज्ञापन

9 of 9
- फोटो : amar ujala
मंच पर अगला दृश्य इंद्र और कामदेव के संवाद के रूप में प्रस्तुत होता है। इंद्र कामदेव से देवर्षि नारद की समाधि भंग करने का अनुरोध करते हैं। इससे पूर्व गणेश वंदना के साथ नौ दिवसीय वर्चुअल रामलीला की प्रस्तुति का प्रारंभ हुआ। करीब 25 मिनट तक चली गणेश वंदना में संगीत, तकनीक और कलाकारों के कौशल का नजारा दिखा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें