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एशियाड में स्वर्ण जीतने वाली विनेश फोगाट का 'दूसरा घर' है लखनऊ, इसके बारे में कही ये बड़ी बात

Tue, 21 Aug 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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विनेश फोगाट
एशियन गेम्स में कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतकर महिला पहलवान विनेश फोगाट ने इतिहास रच दिया है। लखनऊ के साई सेंटर में सीखे दांव-पेंच को जर्काता में आजमाकर एशियाई खेलों में जीतने वाली वह भारत की पहली महिला पहलवान बन गई हैं। इस जीत के पीछे उनके जज्बे और जुनून की अलग ही कहानी है। आगे की स्लाइड में पढ़ें...
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vinesh phogat - फोटो : amar ujala
बात रियो ओलंपिक 2016 की है। विनेश फोगाट पदक की ओर बढ़ रहीं थीं कि अचानक बाउट के दौरान पैर में प्रेक्चर हो गया और पूरे देश की उम्मीदें टूट गईं। उनके भविष्य को लेकर अटकलें तल लगाई जाने लगी थीं, पर विनेश ने कुश्ती के प्रति अपने जुनून और हौसले से पूरी तस्वीर ही बदल दी। लखनऊ के साई रीजनल सेंटर में कुश्ती के दांव-पेंच सीखकर उन्होंने धमाकेदार वापसी की। अप्रैल में कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतकर नई शुरुआत की।
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vinesh phogat
सोमवार को जर्काता में बाउट के पहले उनके पैर में काफी दर्द था, इसके बावजूद स्वर्ण जीतकर विनेश ने साबित कर दिया कि पदक के पीले रंग से उनका कितना गहरी नाता है। हरियाणा की विनेश लखनऊ को अपना दूसरा घर बताती हैं। कहती हैं यहां के कैंप उनके लिए हमेशा भाग्यशाली रहे हैं।

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पहलवान विनेश फोगाट
उन्होंने कहा कि सेंटर में सब जूनियर एवं जूनियर महिला पहलवानों के कैंप भी लगते रहते हैं, इससे सभी वर्गों की खिलाड़ियों को फायदा मिलता है। खासतौर पर जूनियर और सब जूनियर खिलाड़ियों को अपने सीनियरों के बीच रहकर सीखने से खासा लाभ होता है।
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पहलवान विनेश फोगाट
साई सेंटर में मना विनेश के स्वर्ण का जश्न
एशियाड में सोमवार को महिला कुश्ती के मुकाबले होने के कारण सुबह से ही साई सेंटर में अभ्यास कर रही जूनियर महिला पहलवान टीवी से चिपकी हुई थीं। दोपहर बाद जैसे ही उन्हें पता चला कि विनेश ने फाइनल में जगह बना ली है तो सभी खुशी से झूमने लगीं। शाम पांच बजे फाइनल रिजल्ट भी आ गया और विनेश एशियाई खेलों में महिला कुश्ती में स्वर्ण जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गई। कुछ ही पलों में यह खबर पूरे सेंटर में फैल गई और खिलाड़ी मल्टीपरपज हॉल में जुटने लगे। हर तरफ विनेश के धमाकेदार प्रदर्शन की ही चर्चा थी। सेंटर के तमाम छोटे- बड़े पदाधिकारी भी खिलाड़ियों की खुशी में शरीक होने के लिए हॉल के सामने पहुंच गए। मिठाई मंगाकर सभी को बांटी गई। खिलाड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
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विनेश
सबको भाई लखनऊ की ट्रेनिंग
भारतीय कुश्ती संघ और लखनऊ साई सेंटर के बीच तकरीबन तीन वर्षों से नेशनल रेसलिंग कैंप का अनुबंध जारी है। शुरुआत सीनियर महिला कुश्ती कैंप से हुई थी, फिर यह जूनियर और फिर सब जूनियर तक पहुंच गई। सेंटर में राष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए बना 100 बेड वाला हॉस्टल हमेशा महिला पहलवानों से पटा रहता है। यही कारण है कि यहां कुश्ती के अलावा अन्य खेलों के शिविर बमुश्किल लग पाते हैं। साई की कार्यकारी निदेशक रचना गोविल बताती हैं कि बहुत खुशी होती है जब हमारे यहां ट्रेनिंग करके बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतते हैं। कुश्ती की बात करें तो हमेशा ही यहां कोई न कोई नेशनल कैंप लगा रहता है। यहां जब से कुश्ती के कैंप लगने शुरू हुए हैं, खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निरंतर सुधार आया है।
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