केंद्र से तीन महीने सेवा विस्तार पाए यूपी के पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में सुधार को लेकर अपनी प्राथमिकताएं गिनाई। उन्होंने कहा कि 'लकवाग्रस्त' परंपरागत पुलिसिंग को दुरुस्त करना अब उनकी प्राथमिकता होगी।
उन्होंने गांवों में लगभग खत्म हो चुकी चौकीदारी व्यवस्था को फिर से दुरुस्त करने को कहा। हर गांव में चौकीदार होगा और रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। चौकीदारी व्यवस्था चौक-चौबंद बनाने के लिए अलग से कानून बनाने पर विचार होगा।
सेवा विस्तार मिलने के बाद अब सुलखान सिंह 31 दिसंबर तक डीजीपी बने रहेंगे। विदाई समारोह के बाद सेवा विस्तार पाने वाले एके जैन के बाद वे दूसरे डीजीपी हैं। प्रदेश के सबसे वरिष्ठ और 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी सुलखान को 21 अप्रैल को डीजीपी बनाया गया था। राज्य सरकार ने केंद्र से सुलखान को छह माह का सेवा विस्तार देने की सिफारिश की थी। हालांकि उन्हें तीन माह का ही सेवा विस्तार मिला।
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डीजीपी ने ‘अमर उजाला’ से कहा कि ‘ट्रेडिशनल पुलिसिंग’ से कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने में मदद मिलेगी और अपराधियों की त्वरित जानकारी भी पुलिस तक पहुंचेगी। इसके अलावा कोर्ट में मुकदमों की प्रभावी पैरवी, अभियोजन की तेज कार्रवाई, अपराधियों को सूचीबद्ध करना, थानों का नियमित निरीक्षण व अपराधियों की निगरानी और पुलिस की गश्त बढ़ाने की व्यवस्था को फिर प्रभावी कर व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। डीजीपी ने कहा कि पुलिस प्रणाली को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दिल्ली व मुंबई की तर्ज पर यूपी में भी कमिश्नर प्रणाली लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
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पुलिस कर्मियों की वेतन विसंगति दूर करेंगे
डीजीपी ने कहा कि पुलिस कर्मियों के मनोबल को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि उनकी समस्याओं का निस्तारण किया जाए। सबसे पहले उनकी वेतन विसंगतियों को दूर करना जरूरी है। आईपीएस से लेकर कांस्टेबल संवर्ग तक के कैडर के पुनर्गठन पर भी काम करना है, क्योंकि पर्याप्त संख्या के बिना पुलिसिंग मजबूत करना संभव नहीं है। इसलिए विभाग के सभी संवर्गों के कैडर का पुनर्गठन कराना भी उनकी प्राथमिकता में है।
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यूपी के पास सबसे उत्कृष्ट पुलिस फोर्स : सुलखान
सेवा विस्तार की अटकलों के बीच शुक्रवार सुबह पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह को पुलिस लाइन में विदाई दी गई। इस दौरान डीजीपी ने रैतिक परेड की सलामी ली। उन्होंने कहा कि इस समय यूपी के पास सबसे उत्कृष्ट पुलिस फोर्स है। यूपी पुलिस ने अपनी कार्यशैली, दक्षता और निष्पक्षता से मानदंड स्थापित करते हुए प्रदेश और विभाग का मान बढ़ाया है। इसे बनाए रखने की जरूरत है। पुलिस के सामने तमाम चुनौतियां भी आईं, लेकिन निडरता से उनका मुकाबला किया। 1990 से 93 के दौरान प्रदेश सिख आतंकवाद की समस्या से जूझ रहा था, उस समय यूपी पुलिस जो कर्तव्यपरायणता दिखाई थी, उसकी प्रशंसा पंजाब पुलिस और अन्य संगठनों ने भी की थी।
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डीजीपी सुलखान सिंह को 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होना था। राज्य सरकार ने उनके सेवा विस्तार के लिए कई दिन पहले ही केंद्र को पत्र भेज दिया था। वैसे तो सेवा विस्तार तय माना जा रहा था, लेकिन गुरुवार शाम तक केंद्र से कोई पत्र नहीं आया तो पुलिस विभाग की तरफ से परंपरा के अनुसार शुक्रवार सुबह उनके सम्मान में विदाई समारोह और रैतिक परेड का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुलखान सिंह ने कहा कि उन्हें यूपी पुलिस फोर्स का मुखिया बनने का मौका मिला, यह उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने अपने 37 साल के सफर के संस्मरण साझा करते हुए कहा कि अपने मातहतों के सहयोग से ही यहां तक पहुंच सके हैं। इस मौके पर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा जिलों से आए पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारी मौजूद थे।
1984 की घटना को याद कर भावुक हुए
1984 की एक घटना को याद कर सुलखान भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि 1984 में पहली बार डकैतों के साथ उनकी मुठभेड़ हुई थी। ऐन मौके पर उनकी स्टेनगन की मैगजीन निकलकर बाहर गिर गई और वह बदमाशों के निशाने पर आ गए थे, लेकिन साथी पुलिसकर्मी ने उनका कवच बनकर डकैतों का डटकर मुकाबला किया। उस दिन अगर साथी पुलिसकर्मियों ने हिम्मत नहीं दिखाई होती तो वह आज यहां खड़े नहीं होते।