प्रयागराज के सोरांव के यूसुफपुर गांव में रविवार को दिल दहला देने वाली वारदात हुई। यहां घर के भीतर सो रहे विजयशंकर तिवारी, उनके बेटे-बहू व दो मासूम पौत्रों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सुबह घटना की जानकारी से सनसनी फैल गई। आईजी, एसएसपी समेत तमाम अफसर पहुंच गए। आक्रोशित परिजनों ने आठ घंटे तक शव नहीं उठाने दिए।
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murder in prayagraj
- फोटो : अमर उजाला
देर शाम मृतका के भाई ने संपत्ति विवाद में हत्या का आरोप लगाते हुए बहन के चचिया ससुर समेत सात लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई, जिनमें गांव का प्रधान भी शामिल है। पुलिस प्रधान समेत चार को हिरासत में लेकर पूछताछ में जुटी है। कोखराज-वाराणसी हाईवे के किनारे स्थित यूसुफपुर गांव में रहने वाले विजयशंकर (55) छह भाइयों में सबसे बड़े थे। आसपड़ोस में ही उनके अन्य भाई भी परिवार समेत रहते हैं।
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विजयशंकर के परिवार में दो बेटों में सोमदत्त उर्फ सोनू (32) बड़ा था। परिवार में पत्नी कामिनी उर्फ सोनी (28) व दो बेटे कान्हा (6) और कुंज (3) थे। रोज की तरह शनिवार रात भी सभी घर के भीतर सो रहे थे। सोनू ऑटो चलाकर परिवार का पालन पोषण करता था। ऐसे में वह रोज सुबह ही उठ जाता था। रविवार को बहुत देर तक परिवार का कोई सदस्य घर के बाहर नहीं निकला।
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ऐसे में नौ बजे के करीब पड़ोस में रहने वाली विजयशंकर की भाभी मुन्नी देवी उन्हें जगाने पहुंची। उनके मुताबिक, भीतर से बंद नहीं होने के कारण धक्का देते ही दरवाजा खुल गया। इसके बाद कमरे का नजारा देखते ही वह चीखने लगीं। वहां सोनू व उसका बड़ा बेटा कान्हा खून से लथपथ मृत पड़े थे। घर पहुंचने के बाद उन्होंने जानकारी दी तो परिवार के अन्य लोग आ गए। सूचना पर सोरांव पुलिस भी पहुंच गई।
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पुलिसकर्मी घर के भीतर गए तो दूसरे कमरे में कामिनी व छोटे बेटे कुंज की रक्तरंजित लाश मिली। सबसे पीछे स्थित कमरे में विजयशंकर भी मृत पड़े मिले। सभी को बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया था। मौके पर खून से सने सिल-बट्टे, ईंट, छेनी व कुल्हाड़ी का धूरा मिला। जिससे माना गया कि इन्हीं चीजों से वारकर पूरे परिवार को मौत की नींद सुला दिया गया।
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आईजी केपी सिंह, एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज कई थानों की फोर्स लेकर पहुंच गए। सूचना दी गई तो मृतका का भाई कार्तिकेय उर्फ शानू व मायके के अन्य लोग आ गए। पुलिस ने मर्चरी भेजने के लिए शव कब्जे में लेने की कोशिश की तो परिवारवालों ने विरोध कर दिया। उनका कहना था कि मृतक के सूरत में रहने वाले भाई मोनू व मृतका के पिता के आने तक शव नहीं उठने दिए जाएंगे।
अफसर मानमनौव्वल में लगे रहे। बड़ी मशक्कत करने पर आठ घंटे बाद परिजन माने और तब जाकर शाम पांच बजे के करीब शव मर्चरी भेजे जा सके। इससे पहले मौके पर डीएम भानुचंद्र गोस्वामी के साथ ही अन्य प्रशासनिक अफसर व सांसद केशरी देवी भी पहुंचीं।