लखनऊ में कृष्णानगर के दामोदरनगर में मंगलवार रात अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की पीटकर हत्या के आरोपी उपेंद्र तिवारी उर्फ मोनू और विनायक ठाकुर उर्फ विनायक बच्चन सिंह को पुलिस ने बृहस्पतिवार दोपहर जेल भेज दिया। हत्याकांड में नामजद धीरज कुमार, मुस्तफा और शुभम यादव समेत अन्य लोगों का पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी है।
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह से बात कर पूरे हालात की जानकारी ली। रक्षा मंत्री ने मृतक अधिवक्ता के परिवार को सुरक्षा और शस्त्र लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए। वहीं, लखनऊ महानगर भाजपा के महामंत्री पुष्कर शुक्ला ने बताया कि बृहस्पतिवार को महानगर अध्यक्ष मुकेश शर्मा और राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। नीरज सिंह ने दिवंगत शिशिर त्रिपाठी के परिवार को दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाने का आग्रह किया।
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शिशिर त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
मामले पर एएसपी पूर्वी सुरेश चंद्र रावत का कहना है कि क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की सात टीमें आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। पूछताछ के लिए कुछ संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया है। एएसपी ने बताया कि हत्याकांड से संबंधित एक-एक साक्ष्य बारीकी से संकलित किया जा रहा है।
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आरोपी मोनू व विनायक
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घटनास्थल से बरामद एक ईंट और ब्लेड को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वारदात का प्रत्यक्षदर्शी भी पुलिस को मिल गया है। इसके अलावा घटनास्थल के पास स्थित एक मकान में सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी मिली है, जिसमें शिशिर से मारपीट करने वाले नजर आ रहे हैं। फिलहाल दो आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। जल्द दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। अन्य नामजद व अज्ञात आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
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स्नेहनगर वीआईपी रोड निवासी शिशिर त्रिपाठी को मंगलवार शाम घर पर आए चार परिचित अपने साथ ले गए थे। रात करीब 12 बजे उसके लहूलुहान हालत में दामोदरनगर में पड़ा होने की सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। परिवारीजन मौके पर पहुंचे और शिशिर को अस्पताल ले गए जहां उसने दम तोड़ दिया। शिशिर के बड़े भाई शरद ने दामोदरनगर निवासी उपेंद्र तिवारी उर्फ मोनू, विनायक ठाकुर, धीरज कुमार, मुस्तफा और शुभम यादव समेत अज्ञात लोगों पर हत्या का केस दर्ज कराया था। बुधवार को हत्याकांड के विरोध में वकीलों ने मॉर्च्युरी और कलेक्ट्रेट तक ढाई घंटे हंगामा व प्रदर्शन किया था। मोनू और विनायक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
अधिवक्ता की हत्या के बाद मौजूद वकील
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वहीं, अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की हत्या क्यों हुई? यह दूसरे दिन भी साफ नहीं हो सका। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मोनू तिवारी ने हाल ही में प्रॉपर्टी का काम शुरू किया था। उसकी गांजे के कारोबार और लेन-देन को लेकर शिशिर से पहले से ही तनातनी चल रही थी। प्रॉपर्टी के काम को लेकर भी दोनों के बीच में कुछ विवाद हुआ था। इसके अलावा इलाके में वर्चस्व को लेकर भी वह अधिवक्ता पर हावी होने की कोशिश कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि मोनू को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।