जिस लखनऊ मेल और पुष्पक एक्सप्रेस में इस सीजन में 400 से 500 तक वेटिंग पहुंच जाती थी, उनकी आज सीटें तक नहीं भर रही हैं। आलम यह है कि लॉकडाउन के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हुए महीना भर होने को है, लेकिन एक भी दिन ट्रेन फुल होकर नहीं चली। वहीं, आम दिनों पर इनकी एक सीट के कई दावेदार होते थे। इससे जून में इन ट्रेनों की वेटिंग 400 से 500 तक पहुंच जाती थी। कोरोना को लेकर अब भी लोगों में खौफ है। इसके चलते वे यात्रा करने से बच रहे हैं, जिससे लखनऊ मेल, पुष्पक जैसी प्रमुख ट्रेनें बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। हालांकि, अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द दोनों ट्रेनों के दिन बहुरेंगे।
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भारतीय रेल
- फोटो : Shutterstock
... इसलिए कतरा रहे हैं यात्री
लखनऊ-कानपुर दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि कोरोना को लेकर यात्रियों में अब भी खौफ है। इससे वे सफर से कतरा रहे हैं। इसके अतिरिक्त ट्रेनों में जनरल कोच भी नहीं लग रहे। इस कारण भी यात्रियों की संख्या कम है। वहीं, किसी बोगी में लिनन और पर्दे भी नहीं हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
दलाली पर लगा अंकुश
कोरोना की वजह से ट्रेनों के संचालन में भले ही रेलवे को राजस्व का घाटा हो रहा हो, पर इससे दलालों पर अंकुश लग गया है। लखनऊ मेल और पुष्पक जैसी ट्रेनों की एक सीट के एवज में दलाल औसतन डेढ़ से दो हजार रुपये वसूलते थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
इतने यात्रियों ने किया सफर
तारीख लखनऊ मेल पुष्पक
21 जून 574 806
20 जून 560 664
19 जून 355 622
18 जून 446 629
17 जून 369 570
16 जून 380 558
15 जून 466 476
14 जून 459 434
13 जून 507 596
दोनों ट्रेनों में 1300-1300 सीटें।
180 सीटों वाले विमान में 25 यात्री
चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से घरेलू विमानों का संचालन 25 मई से शुरू हो चुका है। हालांकि, करीब महीने भर बाद भी एयरलाइंसों को यात्री नहीं मिल रहे हैं। 180 की क्षमता वाले विमानों में 25 यात्री सफर कर रहे हैं। लिहाजा कंपनियों को आए दिन उड़ान निरस्त करनी पड़ रही हैं। अमौसी से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद आदि के लिए विमानों की सेवा मिल रही है। दिल्ली को छोड़कर अन्य रूटों पर यात्रियों की संख्या कम है।