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सिविल सेवा में जोरदार लखनउवा पंच: प्रशासनिक सेवाओं में सफल होने वाले इन होनहारों ने सुनाई अपनी सक्सेस स्टोरी

Wed, 24 May 2023 10:50 AM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ

सार

यूपीएससी की परीक्षा में इस बार लखनऊ के करीब 20 से ज्यादा होनहारों ने सफलता प्राप्त की है। उन्होंने टाइम मैनेजमेंट और हार न मानने की बात की और अपनी सक्सेस स्टोरी भी सुनाई।
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- फोटो : amar ujala
संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2022 का परिणाम मंगलवार को घोषित कर दिया गया। इसमें राजधानी के 20 से ज्यादा होनहारों ने शानदार पंच लगाया है। अनुभव ने 34वीं, रजत ने 37वीं, शुभम ने 41वीं, तो मनन अग्रवाल ने 46वीं व अनुजा त्रिवेदी ने 80वीं रैंक हासिल की है। अमर उजाला ने इन मेधावियों से बात करके उनकी सफलता की कहानी जानने का प्रयास किया। पेश है रिपोर्ट-

सफलता में आईएएस पत्नी ने निभाई बड़ी भूमिका
अनुभव सिंह, रैंक 34
सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद डीयू से पॉलिटिकल साइंस में बीए ऑनर्स और जामिया से परास्नातक किया। जेआरएफ के बाद मैंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। यह मेरा पांचवां प्रयास था। मेरा मानना है कि विषय पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए।
श्रेय : मेरी सफलता में मेरी मेहनत के साथ पिता रामदेव सिंह और मां स्व. अनीता सिंह के साथ ही पत्नी दीक्षा जैन का रोल बेहद अहम है। दीक्षा खुद भी 2019 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। इस समय सीडीओ फिरोजाबाद के पद पर तैनात हैं।

ऑनलाइन पढ़ाई करके हासिल की सफलता
शुभम कुमार, 41वीं रैंक
मैं इस समय एक्साइज विभाग में लक्षद्वीप में कार्यरत हूं। सिविल सेवा की तैयारी के लिए मैंने ऑनलाइन माध्यम का खूब सहारा लिया। लखनऊ में संस्कृत संस्थान की निशुल्क कोचिंग का मुझे काफी फायदा मिला। मेरे पिता सत्येंद्र कुमार किसान और मां सीमा देवी गृहिणी हैं। मेरा मानना है कि अगर हम समय प्रबंधन पर ध्यान दें, तो सफलता जरूर मिलती है।

 
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- फोटो : amar ujala
ज्यादा पढ़ने के पीछे न भागें, तैयारी के साथ परिवार को भी समय दें: मनन अग्रवाल
रैंक 46
ऐशबाग में रहने वाले मनन बताते हैं, यह मेरा तीसरा प्रयास था। तैयारी के दौरान भी मैंने अपनी हॉबीज और परिवार को समय दिया। क्योंकि यह यात्रा एक या दो महीने की नहीं है, सालों साल लगते हैं। पढ़ाई के पीछे ज्यादा भागने के बजाय नोट्स के रिवीजन पर जोर दें। मैंने ऑनलाइन क्लासेज के साथ ही सेल्फ स्टडी की। पिता मनमोहन अग्रवाल व्यवसायी हैं। मां सीमा अग्रवाल ने हमेशा मोटिवेट किया।
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गौरी प्रभात। - फोटो : amar ujala
ईमानदारी के साथ करें मेहनत: गौरी प्रभात
रैंक 47
मेरी पैदाइश कानपुर की है और पिता की पोस्टिंग लखनऊ में रही है। यह मेरा तीसरा प्रयास रहा। मैंने दिन का ज्यादा से ज्यादा समय पढ़ाई को दिया। मैंने खुद के नोट्स बनाए, उनमें कमियां खोजी और दूर किया। मेरा मानना है कि सबके जीवन में तनाव है, चुनौतियां हैं। पापा का हमेशा से ही मार्गदर्शन रहा है। तैयारी करने वालों से मैं कहना चाहती हूं कि वे खुद पर विश्वास करें और ईमानदारी से मेहनत करें।

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अपने परिजनों के साथ अनुजा त्रिवेदी। - फोटो : amar ujala
अपने नोट्स खुद बनाएं, बार-बार दोहराएं: अनुजा त्रिवेदी
रैंक : 80
यह मेरा तीसरा प्रयास था। खुद के नोट्स बनाएं और बार-बार उन्हें दोहराएं। बिना मेहनत और लगन के कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। तैयारी के दौरान बीच-बीच में तनाव होता है, बाधाएं आती हैं, लेकिन उन्हें दरकिनार कर पढ़ाई पर फोकस करने से ही सफलता मिलती है। पिता अभिराम त्रिवेदी प्रशासनिक पद पर रहे हैं। माता गृहिणी हैं।
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आदित्य श्रीवास्तव। - फोटो : amar ujala
अपनी कमजोरियों को पहचानें और दूर करें: आदित्य श्रीवास्तव
रैंक : 236
आईआईएम रोड निवासी आदित्य बताते हैं कि यह उनका दूसरा प्रयास था। वह बताते हैं, मैंने बहुत मेहनत के बजाय स्मार्ट स्टडी करने पर फोकस किया। मैंने पुराने पेपरों को सॉल्व कर खुद का विश्लेषण किया कि मैं कहां गलती कर रहा हूं। पिता अजय श्रीवास्तव सीएजी के पद पर हैं। मां आभा त्रिवेदी गृहिणी हैं।
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अमित गुप्ता। - फोटो : amar ujala
एसडीएम के बाद अब सिविल सेवा: अमित गुप्ता
246 रैंक
मैंने अपनी पढ़ाई लखनऊ में रहकर सीएमएस से की है। इसके बाद मैंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था। इस समय मैं महाराजगंज में एसडीएम पद पर कार्यरत हूं। मैं मूल रूप से बहराइच का रहने वाला हूं। मेरे पिता राकेश कुमार की जनरल मर्चेंट की दुकान है। जूनियर्स को सलाह है कि वे रटने के बजाय विषय को समझने का प्रयास करना चाहिए।
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रजत सिंह। - फोटो : amar ujala
दिन, महीना, साल के हिसाब से लक्ष्य बनाएं: रजत सिंह
रैंक 379,
गोमतीनगर के विवेकखंड में रहने वाले रजत सिंह बताते हैं कि यह उनका दूसरा प्रयास था। वह कहते हैं, मैंने दिन, महीना, साल के हिसाब से टारगेट तय किए। दिन में कितनी पढ़ाई करनी है और कब टेस्ट प्रैक्टिस करना है, इन सबका हिसाब रखता। मेरा बैकग्राउंड इंजीनियरिंग का रहा है। केमिस्ट्री मेरा ऑप्शनल विषय रहा। पिता राकेश कुमार सिंह कन्नौज में डीएफओ है, मां गृहिणी हैं।

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सिद्धार्थ सिंह - फोटो : amar ujala
हेड कॉन्स्टेबल का बेटा बना आईपीएस: सिद्धार्थ सिंह
रैंक : 432
मैंने 2021 में नेशनल पीजी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी। सफलता पहले ही प्रयास में मिल जाएगी, इसका अनुमान कम था। पिता देवेंद्र सिंह हेड कॉन्स्टेबल के तौर पर फूलपुर में तैनात हैं। मां अर्चना सिंह गृहिणी हैं। मेरा मानना है कि बिना घबराए सकारात्मक ऊर्जा के साथ पढ़ें, सफलता जरूर मिलेगी।

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रोहित कर्दम अपने परिजनों के साथ। - फोटो : amar ujala
अखबारों से बनाए नोट्स तैयारी में मददगार रहे: रोहित कर्दम
रैंक : 517
जानकीपुरम में रहने वाले रोहित बताते हैं कि यह मेरा तीसरा प्रयास था। मेरा मानना है कि कोई कोचिंग या कोई संस्था ऐसी नहीं, जो आपको यूपीएससी की परीक्षा पास करवा दे। अखबार से बनाए गए नोट्स और मॉक टेस्ट मददगार रहे। मैं एक साल गुजरात में सीएसआर पद पर तैनात रह चुका हूं। पिता हरिलाल कर्दम रिडायर्ड डीएसपी हैं, मां गृहिणी हैं।
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अनुश्री सचान (बायें से दूसरे नंबर पर) - फोटो : amar ujala
मन लगाकर पढ़ें और सपनों पर फोकस करें: अनुश्री सचान
रैंक : 633
त्रिवेणीनगर में रहने वाली अनुश्री बताती हैं कि यह उनका दूसरा प्रयास था। वह कहती हैं, कोविड के दौरान मैंने तैयारी शुरू की थी। पिता सुशील कुमार सचान इंजीनियर हैं, माता शर्मिला सचान हाउस वाइफ हैं। मेरा मानना है कि मन लगाकर पढ़ाई करें और आपके सपने के बीच कोई भी आए उसे साइड में कर दें।
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