बरसात समाप्त हो गई है और जाड़े की शुरुआत हो गई है। मौसम के इस बदलाव में थोड़ी सी लापरवाही सेहत बिगाड़ सकती है। इस समय मौसमी बीमारियां घेरने लगती हैं। जरा सी सावधानी यानी दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार-विहार का पालन करते हुए इन सभी बीमारियों से हम बच सकते हैं।
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डॉ वंदना पाठक
- फोटो : अमर उजाला
आयुर्वेदिक चिकित्सक व पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. वंदना पाठक बताती हैं कि शरद ऋतु का आगमन हो चुका है। शरद ऋतु आश्विन और कार्तिक यानी सितंबर से नवंबर के बीच पड़ती है। इस मौसम में हमारे ऋषियों ने पित्त को काबू करने और भूख बढ़ाने वाली आहार विहार की व्यवस्था की है। भोजन में बढ़े पित्त को शांत करने वाले मधुर तिक्त, कषाय रस या स्वाद के साथ ही पचने में हल्की चीजोें को शामिल कर बहुत भूख लगने पर ही इनके सेवन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस मौसम में अम्ल (शराब, सिरका, अधिक खट्टा), लवण (अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ) और कटुरस (मिर्च और गरम मसाले) का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके इस्तेमाल से गले-छाती में जलन, खट्टी डकार, त्वचा रोग, खूनी बवासीर, नाक से खून आना, बाल झड़ना, बालों का पकना, पेशाब में जलन जैसी बीमारियां हमें घेर लेती हैं।
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शहद, दूध, केला खाना फायदेमंद
डॉ. वंदना ने कहा कि इस मौसम में मधुर तिक्त, कसाय रस का सेवन करना लाभकारी है। जैसे शहद, शक्कर, मिश्री, दूध, केला, नारियल, अखरोट, फालसा, शतावरी, घी, किशमिश, ईंख, मुलेठी का सेवन फायदेमंद है। तिक्त द्रव्यों का सेवन इस ऋतु में बढ़े पित्त को शांत कर दाह, ज्वर, मूर्छा और प्यास को शांत करता है। ये शरीर के टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है। करेला, चंदन, नीम, चिरैता, हल्दी, गिलोय, खस, वसा तिक्त रस युक्त द्रव्य हैं।
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पित्त विकारों से बचाएगा घी
डॉ. पाठक ने बताया कि इस मौसम में तिक्त घी का सेवन पित्त विकारों से बचाता है। यह गाय के घी और तिक्त औषधि जैसे नीम की छाल, गिलोय, अडूसा की जड़, परवल की पत्ती और छोटी कटेरी से बनाया जाता है। इसके साथ ही कषाय रस का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह पित्त का शमन करता है। फोड़े-फुंसी से बचाव कर हमारी त्वचा को स्वस्थ और निर्मल भी बनाता है। कषाय रस हरड़, बहेड़ा, शहद, कच्ची खजूर, कमल ककड़ी, आंवला में होता है।
दिन में न सोएं, शवासन से मिटाएं थकान
शरद ऋतु में रात में ओस से बचना चाहिए। वसा, चर्बी, तेल, तीनों पित्तवर्धक हैं। इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए। कटु, अम्ल, लवण रसों यानी स्वाद का सेवन नहीं करना चाहिए। कटु मतलब मिर्च, गर्म मसाला व अम्ल पदार्थ जैसे-सिरका, मट्ठा, शराब से बचना चाहिए। दिन में सोना बंद करना चाहिए, हालांकि वृद्ध, बालक, गर्भिणी के लिए ये नियम नहीं हैं। शवासन में थोड़ी देर थकावट मिटा सकते हैं।
घर में रखें त्रिफला और आंवला से बनी चीजें
तिक्त घृत, सूखा पेठा, पेठे का मुरब्बा, आंवला चूर्ण, आंवला का मुरब्बा, आंवला कैंडी घर में जरूर रखें। इस ऋतु में त्रिफला यानी हरड़, बहेड़ा आंवला का संभाग चूर्ण तीन ग्राम की मात्रा से गर्म पानी के साथ रात में सेवन करने से सुबह पेट साफ हो जाता है। पेठे और आंवला का मुरब्बा रुचिकर सुस्वादु और बलवर्धक है।
इन्हें अपनाएं, मिलेगा आराम
- शरद ऋतु में अपने आसपास सुंदर खुशबूदार पुष्प लगाएं। - साफ हल्के रंग के और सूती कपड़े पहनें। - रात में प्रथम प्रहर की चंद्रमा की किरणों का सेवन लाभकारी।