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पांच की जिंदा जलकर मौत : बस में इमरजेंसी गेट पर थी सुकून से सोने वाली सीट, भाग नहीं सके यात्री, देखें रिपोर्ट

Fri, 16 May 2025 10:51 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Lucknow Bus Fire Accident: लखनऊ के किसान पथ पर एक बस में आग लगने से पांच यात्री जिंदा जल गए। मामले की जांच रिपोर्ट तैयार हो गई। जांच में पाया गया कि बस यात्रियों से ज्यादा तो कमियां ढो रही थी।
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- फोटो : amar ujala
Lucknow News: मोहनलालगंज में किसान पथ पर स्लीपर बस (यूपी 17 एटी 6372) में आग की घटना के बाद आरटीओ प्रवर्तन संदीप कुमार पंकज मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना की प्रारंभिक पड़ताल करते हुए उच्चाधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद परिवहन आयुक्त बीएन सिंह के निर्देश पर मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) विष्णु कुमार ने बस की तकनीकी जांच की। उन्होंने रिपोर्ट परिवहन आयुक्त को सौंपी है। सूत्र बताते हैं कि प्रारंभिक जांच में बस के कागजात तो दुरुस्त मिले, लेकिन तकनीकी स्तर पर बड़ी कमियां सामने आई हैं।

कमियां जो बनीं काल
- बस में अग्निशमन यंत्र के लिए एक भी यंत्र नहीं था। अंदर यात्री छोटे सिलिंडर लेकर यात्रा कर रहे थे जो की बड़ा जोखिम था।
- बस के इमरजेंसी गेट के रास्ते में यात्रियों के लिए सीटें लगा दी गई थीं। इसके चलते आग लगने पर गेट को खोला नहीं जा सका।
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- फोटो : amar ujala
- बस के अंदर कपड़े के पर्दे लगाए गए थे। ये पर्दे भी आग फैलने का बड़ा कारण बने जिससे आग तेजी से अंदर फैलती गई।
- खर्च बचाने के लिए बस के इंटीरियर में अग्निरोधी मेटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया गया था। सस्ते मेटेरियल ने तेजी से आग पकड़ी और बेकाबू हो गई।
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- फोटो : amar ujala
- बस के अंदर की गई वायरिंग में भी सस्ते मेटेरियल का इस्तेमाल किया गया था जो संभवत: शाॅर्ट सर्किट की बड़ी वजह था।
- बस की बॉडी का डाइमेंशन मानकों के अनुरूप नहीं था। अंदर आने-जाने का पैसेज काफी सकरा था जिससे यात्रियों को निकलने में दिक्कत हुई।
- बसों के पहियों में सेंसर नहीं थे जो कि महंगी बसों में इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे पहियों के तापमान पर ड्राइवर की नजर रहती है।

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- फोटो : amar ujala
इन 21 बिंदुओं पर हुई बस की जांच
एसी स्लीपर बस की जांच 21 बिंदुओं पर की गई। इसमें बस की लंबाई, चौड़ाई, प्रवेशद्वार की ऊंचाई व चौड़ाई, खिड़की का आकार, स्लीपर बर्थ की डिजाइन, ऊपरी व निचली बर्थ के बीच की दूरी, हेडरूम, गैंग वे, सीट विन्यास, सर्विस द्वार, अग्निशमन यंत्र, विंड स्क्रीन, इमरजेंसी गेट के बिंदुओं को जांचा गया है।
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- फोटो : amar ujala
पूरे थे परमिट, फिटनेस, प्रदूषण के कागज
बस बागपत में ट्रेवेल पॉइंट के नाम से पंजीकृत है। बागपत के सीनियर एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि बस का टैक्स 31 मई 2025 तक जमा है। पिछली बार गोरखपुर से बस की फिटनेस करवाई गई थी, जिसकी वैधता 7 अप्रैल, 2026 तक है। बस का इंश्योरेंस 13 जुलाई तक तथा प्रदूषण प्रमाणपत्र 22 मार्च 2026 तक वैध है। बस संचालन के लिए स्पेशल परमिट 10 से 16 मई तक के लिए लिया गया था। पिछले दो वर्ष में बस का चालान एक बार भी चालान नहीं हुआ है।
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- फोटो : amar ujala
रिपोर्ट के अनुसार 46, पुलिस ने बताए 70 यात्री
बस में सवार यात्रियों की संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। परिवहन विभाग के अफसरों के मुताबिक बस 52 सीटर थी। इसमें करीब 46 यात्री सवार थे। वहीं, घटनास्थल पर पहुंचे डीसीपी दक्षिण निपुण अग्रवाल का कहना है कि बस में 70 से अधिक यात्री थे।
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kisan path - फोटो : amar ujala
रास्ते में 16 आरटीओ किसी ने नहीं की जांच
16 आरटीओ पार कर गई एसी स्लीपर बस मोहनलालगंज में आग का गोला बनी बस में पांच मौतें हो गईं। खास बात यह है कि यह बस बिहार से दिल्ली के बीच 1300 किमी का सफर तय कर रही थी। इस रूट पर करीब 16 आरटीओ के क्षेत्र आते हैं। लेकिन बस में इमरजेंसी गेट बंद होने व अन्य खामियों की पड़ताल किसी ने नहीं की। बस के रास्ते में कुशीनगर, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती, अयोध्या, बाराबंकी, लखनऊ, उन्नाव, हरदोई, कन्नौज, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, नोएडा और गाजियाबाद के आरटीओ व एआरटीओ के क्षेत्र आए।
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