राजधानी के लोग भी आज दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी बनेंगे और देख सकेंगे सुपर मून, ब्लू मून और चंद्रग्रहण एक साथ, वो भी 174 साल बाद। हालांकि 152 साल पहले ब्लू मून और चंद्रग्रहण एक साथ देखे गए थे।
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lunar eclipse 2018
इससे पहले 31 मई 1844 को ये तीनों एक साथ दिखे थे। इंदिरागांधी नक्षत्रशाला और रीजनल साइंस सिटी इस दुर्लभ खगोलीय घटना का नजारा राजधाविासियों को दिखाएंगे।
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इंदिरागांधी नक्षत्रशाला के वैज्ञानिक अधिकारी सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि सुपर मून के साथ चंद्रग्रहण होना एक सामान्य घटना है। इससे पहले ये दोनों एक साथ सितंबर 2015 में दिखे थे, पर ब्लूमून के साथ ऐसा होना दुर्लभ संयोग बनाता है।
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हालांकि खराब मौसम इसमें विलेन बन सकता है। कोहरा बढ़ने पर खगोलीय घटना को नंगी आंखों के अलावा टेलीस्कॉप से भी देखना मुश्किल होगा।
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तो खून के रंग में होगा सुपर मून
वैज्ञानिकों का कहना है कि बुधवार को लखनऊ में दिखने वाला सुपर मून खून के रंग में होगा। इसलिए इसे सुपर ब्लड मून कहा जाता है। सुपर ब्लड मून सूर्यास्त के समय होता है। इस समय चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। सुपर मून में चंद्रमा अपने आकार से 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखाई देता है। वहीं सूर्यास्त की वजह से यह तांबे के रंग का होता है। हवा में मौजूद कणों की वजह से लाल रंग ही पृथ्वी तक पहुंचता है। ऐसे में पृथ्वी से यह सुपर मून लाल रंग का ही दिखता है।
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यहां से देख सकेंगे
इंदिरागांधी नक्षत्रशाला की ओर से हुसैनाबाद में क्लॉक टॉवर पार्क में पांच टेलीस्कॉप लगाए जाएंगे। आकाश दर्शन कार्यक्रम शाम 5.30 बजे से रात 9.00 बजे तक रहेगा। यह पूरी तरह निशुल्क है। वहीं रीजनल साइंस सिटी, अलीगंज के प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर डॉ. राज मेहरोत्रा ने बताया कि शाम को छह बजे से रात आठ बजे तक टेलीस्कॉप से खगोलीय घटना साइंस सिटी परिसर में दिखाई जाएगी।
जानिए इसे भी
एक महीने में जब दो बार पूर्णिमा पड़े तो दूसरी पूर्णिमा को नीले रंग में दिखने वाले चंद्रमा को ब्लू मून कहते हैं। ब्लू मून प्रत्येक ढाई साल में एक बार होता है। 2018 में ऐसा हो रहा है। 31 जनवरी के बाद 31 मार्च को ब्लू मून होगा। साल में दो ब्लू मून होना दुर्लभ घटना है। ऐसी घटनाएं शताब्दी में सिर्फ तीन से पांच बार ही होती हैं। 1999 में यह खगोलीय घटना पिछली बार हुई थी।