दृष्टिहीनों के लिए स्मार्ट स्टिक, वायु प्रदूषण से बचाने वाला त्रिस्तरीय मास्क, ऑटोमेटिक फ्लेम कंट्रोलर, बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी नैपकिन। नन्हें वैज्ञानिकों ने ऐसे 50 मॉडलों से बड़ी-बड़ी समस्याओं का हल प्रस्तुत किया। मौका था भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में शुक्रवार को नवभारत निर्माण कार्यक्रम का। देशभर से आए 50 मॉडलों में भले ही सभी को पुरस्कार नहीं मिल पाया हो, पर नन्हें वैज्ञानिकों ने वरिष्ठ वैज्ञानिकों से वाहवाही जरूर लूटी। आइए जानें इनके इनोवेशन के बारे में।
विज्ञापन
2 of 7
science festival
- फोटो : amar ujala
सामने कुछ होने पर दृष्टिहीनों को अलर्ट करेगी छड़ी
एमिटी स्कूल साकेत, दिल्ली से आई जसकरन और सिद्धार्थ की जोड़ी ने दृष्टिहीनों के लिए स्मार्ट स्टिक बनाई है। इसकी खासियत यह है कि दृष्टिहीन व्यक्ति के सामने 50 सेमी के दायरे में कोई भी वस्तु होेने पर छड़ी न सिर्फ अलार्म देगी, बल्कि वाइब्रेट भी करेगी। इससे दृष्टिहीन सावधान हो जाएगा।
विज्ञापन
3 of 7
science festival
- फोटो : amar ujala
मक्के और गन्ने से मिलेगा प्लास्टिक का विकल्प
प्लास्टिक आज की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। ऐसे में एनआईएफएफटी रांची के हिमांशु शेखर और कृति गुप्ता की टीम ने इसका विकल्प दिया है। इसमें मक्के और गन्ने की सहायता से पॉली लैस्टिक एसिड तैयार किया जाएगा। यह पूरी तरह से रिसाइकिल होगा। वहीं, थ्रीडी प्रिंटिंग की सहायता से इससे विभिन्न वस्तुएं बनाई जा सकती हैं।
4 of 7
साइंस फेस्टिवल
- फोटो : amar ujala
...तो सड़कों पर नहीं भरेगा पानी
सेंट मार्टिन्स इंजीनियरिंग कॉलेज, हैदराबाद के विद्यार्थियों की टीम ने वाटर एब्जॉर्बिंग रोड का मॉडल पेश किया। इस रोड की खासियत यह है कि इसमें पानी नहीं भरता। इसका निर्माण ऐसे किया गया है कि पानी रोड के बीच से होते हुए नीचे चला जाता है। फिर इसका इस्तेमाल भूमि रिचार्ज में किया जा सकता है। सात्विका, राजेश्वरी, नागेश, विक्रम, साईं प्रसाद और अभिनव की टीम ने बताया कि यह रोड सामान्य के मुकाबले सस्ती भी है। साथ ही पानी न भरने से खराब भी कम होगी।
विज्ञापन
5 of 7
साइंस फेस्टिवल
- फोटो : amar ujala
150 रुपये की डिवाइस दूध गिरने से बचाएगी
वीआईटी, चेन्नई की छात्रा अभिरामी ने महज 150 रुपये में स्मार्ट डिवाइस तैयार की है। इसे गैस चूल्हे पर लगाया जाएगा। इसमें टाइम सेटर होगा। इसकी सहायता से चूल्हे पर कुछ भी चढ़ाकर समय तय कर दिया जाएगा। इससे गैस निर्धारित समय बाद खुद ही बंद हो जाएगी। इससे खाना नहीं जलेगा और उबलने से दूध भी नहीं गिरेगा। गैस की बचत भी होगी।
विज्ञापन
6 of 7
साइंस फेस्टिवल
- फोटो : amar ujala
पहाड़ों पर बारिश के पानी से जलेगी इमरजेंसी लाइट
एनआईटी हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश की जया और अर्चिता ने पहाड़ों पर इमरजेंसी लाइट का विकल्प दिया है। इसी तरह का मॉडल नागपुर के आशीष तिवारी, दीपक बावनकर और अंकुर गुप्ता की टीम ने बनाया है। इसमें घरों के पानी का इस्तेमाल इस तरह से किया जा सकता है कि उससे बिजली बन सके। इसे बैट्री में स्टोर भी कर सकते हैं। जया ने बताया कि छत का पानी जहां गिरता है वहां विशेष प्रकार की चादर लगाई जाएगी। इससे बिजली का उत्पादन होगा। एक सेकंड की बारिश में 30 वोल्ट की बिजली पैदा की जा सकती है।
डिवाइस स्मार्ट बनाएगी ट्रैफिक सिस्टम
एमिटी स्कूल, दिल्ली के विद्यार्थी सार्थक और अर्जित ने स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम पेश किया। इसमें जिस सड़क पर ज्यादा ट्रैफिक होगा उसमें ग्रीन सिग्नल ज्यादा देर रहेगा। कम ट्रैफिक वाली रोड पर इसकी अवधि कम होगी। यह डिवाइस सिग्नल की अवधि अपने आप तय करेगी। यह काम इमेज प्रोसेस और सीसीटीवी से मिली रिकॉर्डिंग की सहायता से होगा।