फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चे खुद खोलते हैं इस स्कूल का ताला, प्रधानाध्यापक बजाता है विद्यालय का घंटा

Thu, 18 Jul 2019 06:29 PM IST
Amulya Rastogi काविश अजीज लेनिन, अमर उजाला लखनऊ
विज्ञापन
1 of 5
तकवा प्राइमरी विद्यालय - फोटो : amar ujala
शिक्षा नाम सुनते ही बहुत सी चीजें ख्याल में आती हैं, जैसे स्कूल, यूनिफॉर्म, क्लास, किताबें, वगैरह वगैरह। कहते हैं, शिक्षा अच्छी हो तो भविष्य भी अच्छा बनता है। इस कड़ी में हम लखनऊ के तकवा प्राइमरी विद्यालय पहुंचे। यहां कक्षाएं तो एक से पांच तक लगती हैं लेकिन पढ़ाने वाला शिक्षक सिर्फ एक है।
विज्ञापन

2 of 5
तकवा प्राइमरी विद्यालय - फोटो : amar ujala
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने कई अभियान चलाए, कई नीतियां लागूं कीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कितना काम हुआ है। इसका पता आपको इस प्राइमरी स्कूल को देखकर मिल जाएगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस स्कूल का ताला नन्हे बच्चे खुद खोलते हैं। स्कूल की इस व्यवस्था को जानने की जिज्ञासा बढ़ी तो हम सीधे प्रधानाध्यापक के पास पहुंच गए। 
विज्ञापन

3 of 5
तकवा प्राइमरी विद्यालय - फोटो : amar ujala
इस स्कूल के प्रधानाध्यापक सर्वजीत लाल सेन है। उनके पास जाकर बात की तो एक और खुलासा हुआ। पता चला कि स्कूल में कक्षा एक से पांच तक लगती हैं लेकिन पढ़ाने वाले प्रधानाध्यापक अकेले हैं। स्कूल सुबह 8 बजे खुल जाता है और एक बजे छुट्टी होती है। इस दौरान प्रधानाध्यापक स्कूल में पढ़ाई से लेकर सफाई तक का काम खुद मैनेज करते हैं।

4 of 5
तकवा प्राइमरी विद्यालय - फोटो : amar ujala
जब हमने बच्चों से बात की तो उन्होंने बताया की स्कूल का ताला हम ही खोलते हैं क्योंकि यहां कोई कर्मचारी नहीं है। स्कूल का घंटा कभी प्रधानाध्यापक बजाते हैं, तो कभी बच्चे। यहां तक कि बिजली का बिल और सफाई के लिए सर्वजीत लाल सेन अपनी जेब से पैसे खर्च करते हैं। कभी कभी कुछ स्कूलों से ट्रेनीज आ जाते हैं जिससे सर्वजीत जी को आसानी हो जाती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
तकवा प्राइमरी विद्यालय - फोटो : amar ujala
अब सोचने की बात ये है कि राजधानी लखनऊ के विद्यालय का ये हाल है, तो ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का क्या हाल होगा। अगर शिक्षा व्यवस्था ऐसी रही तो बच्चों के भविष्य का अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें