जोश मलिहाबादी अलग अंदाज की शख्सियत थे। जवाहर लाल नेहरू भी उनके काफी प्रशंसक थे। आर्थिक कठिनाई से परेशान जोश सीधे पहुंचे नेहरू के पास पहुंचे और मदद मांगी। नेहरू ने कहा, सूचना मंत्रालय में सचिव अज़ीम हुसैन से मिल लें। अजीम हुसैन को आजकल पत्रिका के लिए संपादक की जरूरत है।
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जोश मलिहाबादी
- फोटो : डेमो
अजीम ने जोश को नौकरी के इंटरव्यू के लिए बुलाया। वहां बहुत सारे लोग इंटरव्यू देने आए थें। पर, जोश सीधे कमरे में घुसे। देखा कि अजीम हुसैन और अजमल खां के अलावा पांच और लोग इंटरव्यू लेने बैठे हैं। समाजवादी दीपक मिश्र जोश की आत्मकथा का हवाला देते हुए बताते हैं, 'जोश ने खुद को सहज करने के लिए जेब से पानदान निकाला।
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जोश मलिहाबादी
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यह देख वहां बैठे मदरासी जैसे दिखने वाले एक सज्जन नाराज हो उठे और अंग्रेजी में बोले, 'आप यहां पान नहीं खा सकते। जोश भी कम नहीं थे। तुरंत बोले, 'हम अब एक आज़ाद मुल्क में रह रहे हैं। अंग्रेज चले गए तो उनके बनाए हुए कानून का क्या मतलब। देखिए! पान खाना मेरे लिए सांस लेने जैसा है। अगर आप को ये मंज़ूर नहीं है तो मैं चला जाता हूं। बिना पान के क्या इंटरव्यू! यह कहते हुए जोश बाहर जाने के लिए मुड़े ही थे कि अजीम हुसैन और अजमल खां ने कहा, 'आप पान खा सकते हैं।
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जोश मलिहाबादी
- फोटो : डेमो
जोश ने पान निकाला और मुंह में दबाते हुए कहा, 'पूछिए, क्या पूछना है। अजमल खां बोले, 'जोश मलिहाबादी का क्या इंटरव्यू! आपने निजाम के खिलाफ जो नज्म लिखी है, उसे सुनने की ख्वाहिश है। जोश साहब ने जवाब दिया, 'मेरी नज्म का उन लोगों के लिए कोई मतलब नहीं जो अब भी अंग्रेजों के बनाए तौर-तरीक़ों से चलते हैं।
इस पर इंटरव्यू लेने वाले सभी लोग जिनमें पान खाने पर टोकने वाले सज्जन भी थे बोले, 'आप अपनी नज्म सुनाइए। हम सभी आप के प्रशंसक हैं। जोश ने नज्म पढ़ी। जाहिर है कि नज्म के बाद इंटरव्यू कहां आगे बढ़ना था।