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जब पूर्व प्रधानमंत्री ने भीड़ नियंत्रण को लाठी की जगह शुरू कराई पानी की बौछार, पढ़ें ये पूरा मामला

Wed, 28 Aug 2019 04:17 PM IST
Amulya Rastogi अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
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लाल बहादुर शास्त्री
लाल बहादुर शास्त्री किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उनका जन्म वाराणसी के रामनगर में हुआ था। उनके पिता का नाम था मुंशी शारदा प्रसाद। जवाहर लाल नेहरू के बाद वह देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने ही ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा दिया। अनाज की बरबादी के खिलाफ लोगों में जागरूकता फैलाई। उनके जीवन से जुड़े तमाम ऐसे प्रसंग हैं जो उनकी संवेदनशीलता और आम आदमी की समस्याओं को लेकर उनके दिल में मौजूद पीड़ा का प्रमाण देते हैं।
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लाल बहादुर शास्त्री - फोटो : INC.IN
महिला डिग्री कॉलेज के शिक्षक अमित पुरी उनसे जुड़ा एक किस्सा बताते हैं, ‘गोविंद वल्लभ पंत सरकार में शास्त्री जी प्रदेश के संसदीय सचिव रहे। उन्हें मंत्री के रूप में गृह एवं परिवहन विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
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लाल बहादुर शास्त्री
एक दिन वह बिना किसी को बताए बस से यात्रा कर रहे थे ताकि उन्हें यात्रियों की समस्याएं मालूम चल सके। उन्होंने देखा कि जो महिलाएं अकेले सफर करती हैं उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद उन्होंने परिवहन विभाग की बसों में महिला कंडक्टरों की भर्तियां शुरू कराईं।

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लाल बहादुर शास्त्री
इसी तरह जब वह प्रदेश के गृहमंत्री थे तब उन्होंने एक दिन पुलिस अधिकारियों को बुलाया और उनसे कहा, ‘अब अंग्रेजों का शासन नहीं है। अपने ही लोगों पर लाठी चलाकर हम कैसे यह कह सकते हैं कि हम आजाद हैं।’ पुलिस अधिकारियों ने तर्क दिया, ‘कभी-कभी प्रदर्शन और आंदोलन को लेकर लोग उग्र हो जाते हैं।
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लाल बहादुर शास्त्री
ऐसे में उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग जरुरी हो जाता है।’ शास्त्री जी ने शांति से तर्क सुने और कहा, ‘लाठी चलाना एकमात्र विकल्प नहीं है। पानी की बौछार डालकर भी भीड़ को रोका जा सकता है।’ इसी के बाद वह पानी की बौछार से भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था शुरू हुई।

 
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