शायद ही किसी को भरोसा होगा कि संगीत की दुनिया में बुलंदियों पर पहुंचने वाले और फिल्मी संसार में उत्तर भारत के लोक संगीत का डंका बजवाने वाले इस शख्स को कभी मुंबई में 15 रुपये महीने पर नौकरी करनी पड़ी थी। उन्हें फुटपाथ पर भी कई रातें गुजारनी पड़ी थीं।
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संगीतकार नौशाद
- फोटो : डेमो
नौशाद का जन्म लखनऊ में हुआ था। उनके पिता वाहिद अली लालबाग स्थित कंधारी लेन में रहते थे। नौशाद बाद में नक्खास में रहने लगे। वाहिद कचहरी में मुंशी का काम करते थे। इसलिए उनके नाम के साथ मुंशी जुड़ गया।
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नौशाद
मुंशीजी संगीत को बकवास मानते थे। एक दिन रात में देर से घर लौटने पर जब मुंशीजी ने गुस्से में नौशाद की हारमोनियम बाहर गली में फेंक दिया और घर या संगीत में चुनने को कहा तो वह गली में फेंकी गई हारमोनियम उठाकर लखनऊ से मुंबई के लिए चल दिए। पत्रकार राकेश मंजुल बताते हैं, ‘नौशाद तो खाली जेब थे। एक दोस्त से 25 रुपये उधार लिए और मुंबई का टिकट कटाया।
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संगीतकार नौशाद
- फोटो : डेमो
पर, मुंबई में भी उनकी शुरुआती जिंदगी भी बहुत आसान नहीं रही। भूखे पेट उन्हें कई दिन फुटपाथ पर गुजारने पड़े। हारमोनियम के साथ फुटपाथ पर जिंदगी गुजर करने के दौरान एक दिन फिल्म निर्माता एएम कारदार की नजर उन पर पड़ी। कारदार ने नौशाद की मुलाकात संगीतकार हुसैन खान से कराई और उन्हें काम देने की सिफारिश की।
हुसैन ने नौशाद को 15 रुपये महीने पर नौकरी दी। बाद में खुश होकर हुसैन ने उन्हेें अरेंजर (वाद्य यंत्रों का संयोजन करने वाला) बना दिया और तनख्वाह भी 40 रुपये महीने कर दी। नौशाद उनके यहां प्यानो बजाते थे।’