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ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार कर इन आईपीएस ने बनाई थी अपनी खास पहचान, अलग था इनका मिजाज

Thu, 22 Nov 2018 04:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आईपीएस एन के श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala
लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें एनके श्रीवास्तव की अलग पहचान थी। उन्होंने अपराध नियंत्रण के साथ यातायात व्यवस्था को सुधारने के भरसक प्रयास किए। 
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- फोटो : डेमो
प्रदेश में बसपा शासनकाल में पुलिस उपमहानिरीक्षक स्तर के अधिकारी को राजधानी का कप्तान बनाए जाने की व्यवस्था शुरू होने पर छह फरवरी 2009 को एनके श्रीवास्तव ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस उपमहानिरीक्षक का चार्ज संभाला। राजधानी की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।
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डेमो
अपराधियों की धरपकड़ कराने के साथ कानून व्यवस्था और यातायात की गहन समीक्षा करके विशेष पुलिस अधिकारी की तर्ज पर विशेष यातायात अधिकारी बनाने की पहल की।उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने वाले व्यापारियों को यातायात में सहयोग के लिए प्रेरित किया।

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ips
चौराहों के सौंदर्यीकरण और आदर्श चौराहा बनाने की दिशा में काम शुरू कराया, लेकिन पांच महीने बाद ही तबादला हो गया। विशेष यातायात अधिकारी बनाकर लोगों को जाम से निजात दिलाने की उनकी पहल को कुछ समय बाद भुला दिया 
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डेमो
कार्यालय में नियमित रूप से जनता की शिकायतें सुनते और शिविर कार्यालय में भी नागरिकों से रूबरू होते थे। थाने से टकराए जाने या प्राथमिकी दर्ज करने में टालमटोल की शिकायत की सच्चाई पता करने के बाद क्षेत्राधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक को तलब करके क्लास लेते थे। उनका मानना था कि गहन पर्यवेक्षण से स्थिति सुधारी जा सकती है।  
 
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