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शिया-सुन्नी दंगा रोकने के लिए इस आईपीएस ने बनाया था फूलप्रूफ प्लान, पूरी तरह थम गई थीं वारदातें

Thu, 25 Oct 2018 04:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आईपीएस अनिल अग्रवाल - फोटो : amar ujala
लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही अलग बात वाले वार्दीवालों से परिचित कराते हैं। इनमें अनिल अग्रवाल की एक अलग पहचान थी। उन्हें महकमे को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और सख्त पुलिसिंग के लिए याद किया जाता है।
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- फोटो : डेमो
आईपीएस अनिल अग्रवाल ने 16 साल पहले ही यह अंदाजा लगा लिया था कि आने वाले समय में राजधानी की यातायात व्यवस्था का क्या स्वरूप होगा। 20 जुलाई 2002 को जब उन्होंने राजधानी के एसएसपी की कुर्सी संभाली तो सबसे पहला काम यातायात व्यवस्था को सुचारु और सुगम बनाने के लिए किया।
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डेमो - फोटो : डेमो
उनके ही कार्यकाल में राजधानी के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर ट्रैफिक लाइटें लगवाई गईं। इससे पहले हजरतगंज चौराहे समेत इक्का-दुक्का महत्वपूर्ण चौराहों पर ही लाल-नीली-पीली बत्तियां लगी थीं। अनिल अग्रवाल की छवि ईमानदार, सख्त और अनुशासित अधिकारी की रही। गड़बड़ी करने वाले पुलिसकर्मियों पर वह तत्काल कार्रवाई करते।

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उन्होंने आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पुलिस महकमे में बखूबी इस्तेमाल किया। विभाग को हाईटेक और तकनीकी रूप से दक्ष करने के लिए हर कदम उठाया। अपने कार्यकाल में उन्होंने छतर मंजिल की खंडहर इमारत में बने एसएसपी ऑफिस को डालीगंज स्थित नए भवन में स्थानांतरित कराया। यही नहीं, पीजीआई में यातायात पुलिस लाइन बनवाई।
 
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डेमो
बंद कराया था शिया-सुन्नी दंगा
आईपीएस अनिल अग्रवाल बेहतरीन प्रबंधन में माहिर थे। उन्होंने ही मुहर्रम व अन्य मौकों पर होने वाला शिया-सुन्नी दंगा बंद कराया था। पुराने लखनऊ में लोगों से संपर्क कर अमन पसंद वालंटियर्स की ऐसी फौज तैयार कर दी थी, जो दंगा या झगड़े के हालात पैदा होने पर तत्काल सक्रिय हो जाते थे। उनकी ही मेहनत का नतीजा था जो साल में दो से तीन बार होने वाला दंगा कई साल तक थमा रहा।अनिल अग्रवाल के कार्यकाल में चर्चित मधुमिता हत्याकांड हुआ था। इसमें उन्होंने सीतापुर से मधुमिता के गर्भ में पल रहा भ्रूण मंगवाकर आगे की जांच के लिए सुरक्षित कराया था।
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