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चौधरी साहब को पैदल चलते देखा तो मेरठ वाले खरीद लाए गाड़ी, बोले- मना न करिएगा...मेहनत की कमाई की है

Tue, 26 Feb 2019 03:48 PM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
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चौधरी चरण सिंह
चौधरी चरण सिंह जमीन से जुड़े नेता थे। समझौतावादी न होने के कारण उन्हें सियासत की डगर पर काफी संघर्ष करना पड़ा। सुचेता कृपलानी और चंद्रभानु गुप्त जैसे मुख्यमंत्रियों से चौधरी साहब की नहीं बन पाई। वर्ष 1967 में चुनाव के बाद कांग्रेस ने चंद्रभानु गुप्त को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया।
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चौधरी चरण सिंह - फोटो : डेमो
चौधरी साहब की शर्त थी कि बतौर मंत्री दागी रहे दो नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर रखा जाए। केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर सहमति भी दे दी, पर गुप्त ने मंत्री बनाए जाने के लिए जिन नामों की सूची तत्कालीन राज्यपाल को सौंपी उनमें वे दो चेहरे भी शामिल थे, जिनपर चौधरी साहब को एतराज था। 
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चौधरी चरण सिंह - फोटो : डेमो
 नतीजतन चौधरीजी ने मंत्री पद की शपथ ही नहीं ली। मंत्री थे नहीं सो गाड़ी कहां से होती। एक और कबीर पुस्तक में एक संस्मरण है, ‘चौधरी साहब पैदल आते-जाते, पर उनके पूर्व निजी सचिव तिलक राम शर्मा को इस पर काफी कष्ट होता।

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चौधरी चरण सिंह - फोटो : डेमो
वह किसी न किसी अफसर से आग्रह कर चौधरी साहब के घर भेजते और वहां जाकर उनसे कहते, ‘चौधरी साहब! मैं उधर ही जा रहा हूं। चलिए छोड़ दूं।’ कई दिन यह सिलसिला चला तो उन्हें शर्मा पर शक हुआ और उन्होंने सख्ती से उन्हें मना कर दिया। अब वह रोज पैदल ही विधानसभा से घर आते-जाते।
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चौधरी चरण सिंह - फोटो : डेमो
 एक दिन मेरठ से कुछ लोग आए हुए थे। उन्होंने चौधरी साहब को पैदल देख बोले तो कुछ नहीं, पर कुछ दिन बाद वे मेरठ से नई गाड़ी लेकर लौटे। उन्होंने चौधरी साहब से कहा, ‘मना न करिएगा। यह मेहनत की कमाई की है।’
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