भले ही बेगम हजरत महल को राजकाज चलाने का कोई अनुभव नहीं था, पर नवाब वाजिद अली शाह के अंग्रेजों की कैद में होने के बाद भी उन्होंने खूबसूरती से अवध सल्तनत का राजकाज संभाला। वाजिद अली शाह की जगह गद्दी पर बैठे बिरजिस कदर की उम्र 14 वर्ष ही थी।
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बेगम हजरत महल
- फोटो : amar ujala
वह बेगम हजरत महल के सगे पुत्र भी नहीं थे, पर बेगम ने उन्हें पूरा संरक्षण दिया। नवाब वाजिद अली शाह की कैद से वह तिलमिला उठी थीं। तभी उन्हें पता चला कि वाजिद अली शाह के बड़े भाई मिर्जा मोहम्मद मुस्तफा अली खां को भी कई लोगों के साथ अंग्रेजों ने बेलीगारद (रेजीडेंसी) में बंद कर दिया है। बेगम हजरत महल पर किताब बताती है, ‘बेगम हजरत महल ने अवध में इधर-उधर छिपे फिरंगियों को पकड़कर इन्हें मुक्त कराने की योजना बनाई।
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बेगम हजरत महल
- फोटो : amar ujala
बेलीगारद की घेराबंदी कर दी। वह बेलीगारद के भीतर अंग्रेज अफसरों और भारतीय सिपाहियों के बीच मतभेद पैदा कर संघर्ष कराना चाहती थीं। उनका अनुमान था कि जब अंग्रेज अफसरों और उनके मातहत काम करने वाले भारतीयों में मतभेद हो जाएगा। तभी किसी अंग्रेज अफसर पर हमला कराकर भगदड़ करा देंगी। इससे अंग्रेज अफसर घबराकर वहां से निकल जाएंगे। इसके लिए बेगम ने दो ऐसे शख्स तलाश लिए जो बेलीगारद में रसद की आपूर्ति करते थे।
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बेगम हजरत महल
- फोटो : डेमो
इनको जिम्मेदारी सौंपी कि वे वहां ऐसी अफवाहें फैलाएं, जिससे अंग्रेज अफसरों और उनके अधीन काम करने वाले भारतीयों में मतभेद हो जाए। निश्चित हुआ कि सिख रेजीमेंट के दो सिपाही 26 अगस्त 1857 को बेलीगारद में कमान संभालने वाले अंग्रेज अफसर से वेतन मांगने जाएंगे। वेतन मांगने के दौरान बाहर से इशारा मिलते ही तमंचे से गोली चला देंगे।
तभी बाहर से दुर्ग जय सिंह और राणा बेनी माधव सिपाहियों के साथ हमला बोलकर फिरंगियों को हथियार डालने पर मजबूर कर देंगे, पर कुछ गद्दारों ने इसकी सूचना अंग्रेजों को दे दी। नतीजतन बेगम हजरत महल की रणनीति सफल नहीं हो पाई।’