अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री पद से हट चुके थे। वे पूर्व प्रधानमंत्री के नाते आवंटित कृष्णा मेनन मार्ग स्थित आवास में जा चुके थे। उनके घुटनों की दिक्कत बढ़ गई थी। सभी को पता है कि लखनऊ में रहने के दौरान अटल जी डॉ. राममनोहर लोहिया से मिलने का कोई अवसर नहीं चूकते थे। उस समय दीपक मिश्र समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव थे।
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अटलजी
- फोटो : डेमो
जनेश्वर मिश्र ने एक दिन उनसे कहा, ‘पत्रकार रहे हो। तो कुछ लिखो-पढ़ो। सिर्फ नारेबाजी और बैठकें ही राजनीति नहीं है।’ जनेश्वर जी के कहने पर उन्होंने ‘अनुशीलन’ नाम की पत्रिका निकालने की सोची। फैसला किया कि पहला अंक डॉ. लोहिया को समर्पित होगा। लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष रवि राय ने सलाह दी कि अटल जी के लेख बिना डॉ. लोहिया पर विशेषांक पूरा नहीं होगा।
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अटलजी
- फोटो : डेमो
दीपक बताते हैं, ‘उत्साह में मैंने अटल जी को पत्र लिख दिया। उस पर फोन नंबर भी डाल दिया। एक दिन कार्यालय के फोन की घंटी बजी। फोन उठाया तो उधर से कहा गया, ‘पूर्व प्रधानमंत्री जी बात करेंगे। ’ खुशी से मेरे हाथ-पैर कांप रहे थे। जैसे-तैसे प्रणाम किया। उन्होंने कहा, ‘तुम्हारी उम्र क्या है? मैने तो तुम्हारा नाम नहीं सुना।
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अटल बिहारी वाजपेयी
’उनके पूछने पर मैने आयु बताई तो बोले, ‘ बधाई हो। लखनऊ से हो तो मेरी और बधाई। लखनऊ मेरी ‘यशोदा’ है। मेरे पैर साथ देते तो मैं आ जाता। पर, आप नौजवान हो। उड़कर आ जाओ।’
मेरी खुशी का तो जवाब नहीं था। रात में बस पकड़ी और सुबह दिल्ली पहुंच गया। अटल जी ने लगभग साढ़े तीन घंटा बात की। फिर बोले, ‘हाथ ठीक से साथ देते तो लिख भी देता। खुद लिख लेना। मेरा तरुण मन लोहिया जैसा ही बनना चाहता था। पर, सत्ता की बेड़ियां तोड़ना सिर्फ लोहिया के वश का ही था। मेरे वश का नहीं।’